झर महादेव – जहाँ झरता है भोलेनाथ का स्नेह

अरावली की उपत्यकाओं में भगवान भोलेनाथ के सैकड़ों मन्दिर और स्थानक हैं जहाँ शिव उपासना की धाराएँ वनों से लेकर नदी-तालाबों और नालों के किनारे, वनों से लेकर घाटियों और बस्तियों सभी जगह सदियों से बहती रही हैं।

इनमेें भी घने और दुर्गम जंगलों के बीच कई प्राकृतिक स्थल ऎसे हैं जहाँ भगवान शंकर के प्राचीन मन्दिर विद्यमान हैं और इनके प्रति लोक आस्था का ज्वार उमड़ता रहता है। उदयपुर-पिण्डवाड़ा मार्ग पर उदयपुर जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर अवस्थित इस मन्दिर को ढाई हजार साल पुराना माना जाता है।

इन्हीं में एक है झर महादेव, जिन्हें गौतम ऋषि की तपस्या स्थली होने की वजह से गौतमेश्वर महादेव भी कहा जाता है। वृक्षावली से भरपूर पहाड़ की गोद में प्राकृतिक गुफानुमा स्थल में विद्यमान भगवान गौतमेश्वर का यह धाम क्षेत्र के प्रसिद्ध शिवालयों में गिना जाता है।

मन्दिर का द्वादशस्तंभीय सभामण्डप बड़ा ही आकर्षक है। यहीं हरिहर उदासीन आश्रम का गुरु निवास है जिसके बाहर धूँणी है जहाँ इस समय महन्त गोपालदास विराजमान हैं। घनी हरियाली भरे पर्वतीय परिवेश में बहुत सी प्राचीन प्रतिमाओं व स्तंभों, समाधियों और अनेक शिवलिंगों के साथ ही भैरव, गणेश, विष्णु, गायत्री, हनुमान, सिंहवाहिनी देवी, महर्षि गौतम आदि की मूर्तियां स्थाापित हैं। यहां होने वाले शैव अनुष्ठानों के लिए यज्ञ मण्डप भी बना हुआ है। श्रद्धालुओं के लिए महर्षि गौतम भवन उपलब्ध है जहाँ रहकर साधना, भजन-कीर्तन और सत्संग किए जा सकते हैं। 

गौतमेश्वर महादेव के मन्दिर के निचले हिस्से में पहाड़ों से पानी झरता है जो यहां कुण्ड में भरता रहता है। पहाड़ पर जिस स्थान से पानी निकलता रहता है उसे गुप्त गंगा कहा जाता है। श्रद्धालु जल कुण्ड में स्नान करते हैं तथा गुप्त गंगा के पानी से भगवान गौतमेश्वर का अभिषेक करते हैं। केवड़ा यहाँ बहुतायत में है।

यहीं पर जल भरा एनिकट, वन विभाग की हरी-भरी नर्सरी और मनोरम परिवेश मिलकर जंगल में मंगल को साकार करते हैं। यों तो गौतमेश्वर मन्दिर पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है लेकिन महाशिवरात्रि और श्रावण मास में यहाँ शिवभक्तों का तांता बंधा रहता है।

1 thought on “झर महादेव – जहाँ झरता है भोलेनाथ का स्नेह

  1. Very nice sir.I request to write about Kamalnath Mahadev ,(मंगवास झाडोल)/ history with photos.. मैं आपका आभारी रहूंगा

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