जहाँ वसन्त वहाँ मोयले

मोयले भी आदमी की तरह मौकापरस्त हो गए हैं। आम दिनों में पता नहीं कहाँ दुबके रहते हैं और वसन्त आया नहीं कि सारे के सारे बाहर निकल कर जमीन से लेकर आसमान तक छा जाते हैं।

इन मोयलों को लगता है कि यह वसन्त उन्हीं के आता है इसलिए वसन्त की आहट पाते ही छापामार योद्धाओं की तरह आ धमकते हैं। इनके लिए हर क्षेत्र उनके अधिकार में होता है इसलिए गली-कूचों से लेकर कस्बाई, नगरीय और महानगरीय सड़कों, जंगलों और बस्तियों तक धमाचौकड़ी गचाने लगते हैं। जनपथ से लेकर राजपथ तक मोयलों के करतब देखे जा सकते हैं। 

पता नहीं मोयलोें को कौन से देवी-देवता, भूत-प्रेतों और असुरों का वरदान प्राप्त है कि यह इंसान तक को हिला देने की क्षमता पा जाते हैं। मोयले नहीं चाहते कि जमाने को कोई आदमी देखे, जमाने को देखने का पूरा का पूरा  अधिकार इन मोयलों ने ले रखा है इसलिए इंसान की आँखों में घुसकर उनकी दृष्टि में विकार पैदा कर दिया करते हैं।

साल भर लोग एक-दूसरे की आँखों में धूल झोंकने का प्रयास करते है लेकिन ये मोयले उससे भी आगे बढ़कर खुद घुस जाते हैं और इंसान को विवश कर देते हैं उसकी गति को थामने और आँखों को दुरस्त करने के लिए। 

आजकल मोयलों के पास एक ही काम रह गया है और वह है कि नेत्र कमलों में चुभ जाना। यों भी आजकल सब जगह उसी तरफ दौड़ बढ़ जाती है जिधर कुछ मिलने की उम्मीद हो। फिर ये वसन्त तो काम देव और रति का मौसम है, और ऎसे में मोयले प्रेम और प्रवाह में बाधक न बनें, यह हो ही नहीं सकता।

हम न तो किसी के सामने बड़े ही प्यार से देख पाते हैं। देखें तो आँख में घुस जाएं और अभिव्यक्ति के लिए मुँह खोलें तो ठेठ गले तक हमला कर डालें।  और संभल नहीं पाए तो उदरस्थ तक हो जाए। मोयलों को यह जन्म सिद्ध अधिकार है कि वे कहीं भी घुस सकते हैं। इन्हें इसके लिए किसी पास या लाईसेंस की आवश्यकता नहीं होती।

मोयलों का जन्म होते ही उन्हें वैश्विक परिभ्रमण और मनचाही धींगामस्ती का वरदान मिल जाता है। थोड़ा गहराई से सोचें और मोयलों के पूर्व जन्म के बारे में कयास लगाएं तो पक्के तौर पर इन मोयलों में हमारे आस-पास के लोगों, पुरखों और जानवरों का अहसास होने लगेगा।

चश्मे पहन कर कितनी ही आँखें ढंक लें, मोयलों को जहाँ घुसना है वहाँ घुस ही जाएंगे। पता नहीं ये बेशर्म मोयले कहाँ-कहाँ घुसकर पराग चाट लिया करते हैं।  पूर्वजन्म में हमसे सायास दूर रहे या जिनसे हम दूर रहे, वे सारे के सारे मोयले बनकर इस जनम में हमारे पीछे पड़े हैं। पता नहीं अपनी आँख में बस जाने की तमन्ना पूरी कर पुराने जन्मो का प्रेम दर्शा रहे हैं या फिर उन जन्मों में प्रेम ठुकराने की दुश्मनी पूरी कर रहे हैं।

मोयले लू के थपेड़ों, सर्द हवाओं और बारिश के समय नहीं आकर वसन्त के समय ही क्यों आ धमकते हैं, इसका कारण तलाशने के लिए हमें दिमाग लगाने की जरूरत है। वैसे भी जहाँ कुछ सुकूनदायी मिलता है, वहाँ मोयले तो क्या हर जीव खींचा चला आता है और तब तक जमा रहता है जब तक कि सफाचट न कर जाए। 

मोयलों और वसन्त का सीधा और गहरा रिश्ता रहा है इसलिए जहां कहीं वसन्त का सुकून पसरा होगा, वहां मोयलों का साम्राज्य रहेगा ही रहेगा। यह तो पक्ष-विपक्ष और प्रतिपक्ष वालाें को कोई रास्ता या तिलस्म नहीं दिख रहा है वरना इन मोयलों का इस्तेमाल कर चुके होते।

मोयले प्रेम के प्रतीक हैं तभी तो इस समय पसरे हुए हैं। इनमें वेलेन्टाईन से लेकर अपने-अपने प्रेमियों का अनुभव करें और पूर्व जन्म के बचे-खुचे लेन-देन या प्यार को पूरा करें। हर मोयला हमें प्रेम का संदेश देता हुआ अपनी आँखों में घुसकर हम पर मर मिटने के लिए आतुर है।

वेलेन्टाईन वीक और वसन्तोत्सव पर भी हम मोयलों के संदेश को आत्मसात न कर पाएं तो हमारा जीना है बेकार। ये मोयले हर युग में रहते हैं और विभिन्न प्रजातियों के रूप में अवतरित होकर अपनी कारगुजारियां कर जाते हैं। ये मोयले तो दस-बारह दिन में फुर्र हो जाएंगे लेकिन मोयला कल्चर के लोगों से हमारा वास्ता हमेशा पड़ता रहेगा।  यकीन न हो तो मोयलों का डीएनए टैस्ट करा लो।

2 thoughts on “जहाँ वसन्त वहाँ मोयले

  1. समझना बड़ा ही कठिन है मोयलों की माया
    मोयलों से परेशान लोगों को दिलासा दिलाने वाला है मेरा यह लेख।
    पढ़ें और मोयलों मनोविज्ञान को समझने की कोशिश करें।
    जो मोयले अपनी आँखों में बस कर मर मिटे, उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धान्जलि अर्पित करें और जो मोयले अभी हम पर मर मिटने से बचे हुए हैं उन्हें समय रहते समझने कर कोशिश करें।

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