बाँसवाड़ा में है दुनिया का एकमात्र अनूठा गणेश मन्दिर

इस मन्दिर जैसा दुनिया में और कहीं नहीं

अद्वितीय और अद्भुत है पिपली चौक का पिपलिया गणेश मन्दिर

 

राजस्थान के बांसवाड़ा शहर के बीचों-बीच है पिपली चौक। और यहाँ है मशहूर श्री रघुनाथजी मन्दिर। सदियों पुराने पीपल के पेड़ के नीचे होने की वजह से गणेशजी का नाम पिपलिया गणेश पड़ा।

पिपलिया गणेश का मन्दिर संसार भर में इस मायने में अन्यतम और खास है कि इस छोटे से मन्दिर में प्रधानदेवता के रूप में गणपतिजी ऊँचे सिंहासन पर प्रतिष्ठित हैं और इनके ठीक नीचे आलिये में देवी पार्वती की मूर्ति प्रतिष्ठित है जबकि फर्श पर बीच में जलाधारीयुक्त छोटा सा शिवलिंग स्थापित है।

बांसवाड़ा को धर्म-कर्म, अध्यात्म, संस्कृति और वैदिक-पौराणिक परंपराओं का गढ़ होने के कारण लोढ़ी काशी की संज्ञा प्राप्त है। यहाँ विद्वानों, सिद्धों, भक्तों की सुदीर्घ परंपरा विद्यमान रही है जिन्होंने चमत्कारों, विद्वत्ता और कर्मकाण्ड, ज्योतिष, तंत्र-मंत्र और प्राच्यविद्याओं के बल पर पूरी दुनिया में प्रसिद्धि हासिल की।

इसी लोढ़ी काशी के इस  गणपति मन्दिर में माता पार्वती और पिता शिवलिंग के मुकाबले पुत्र गणेश को अत्यधिक महत्व देते हुए अधिष्ठान पर प्रतिष्ठित करने के पीछे धर्मशास्त्र, मन्दिर वास्तु और इस अन्यतम विशिष्ट परंपरा के बारे में अभी तक रहस्य बना हुआ है कि आखिर ऎसा क्यों है।

यह मन्दिर दुनिया भर में अपनी तरह का एकमात्र मन्दिर होने के साथ ही अनुसंधान का विषय भी है कि आखिर पण्डितों, भक्तों और मन्दिर निर्माण व प्रबन्धन से जुड़े धर्मावलम्बियों द्वारा मंगलमूर्ति गणेश को प्रधान देवता का स्थान देते हुए शिव-पार्वती को फर्श पर तथा नन्दी को इनकी सीध में मन्दिर के बाहर स्थान क्यों दिया गया है।

भोर से लेकर देर रात तक भारी भीड़ की आवाजाही का साक्षी रहा यह गणपति मन्दिर विश्व भर में एकमात्र होने के कारण बांसवाड़ा को गौरव तथा गर्व का अहसास कराता हुआ लोढ़ी काशी और इसके पण्डितों तथा भक्तों का जयगान करता नज़र आता है।

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