जो आजमाएं सो निहाल- सेहत और समृद्धि पाने का अनूठा दीवाली टोटका ….

जो आजमाएं सो निहाल- सेहत और समृद्धि पाने का अनूठा दीवाली टोटका ….

दीपावली पर उपहारों, मिठाइयों और भेंट-पूजा से पाएं नई जिन्दगी

दीपावली पर दो तरह के लोगों की भरमार रहती है। एक तरफ वो बहुसंख्य लोग हैं जिनके लिए यह विवशता होती है कि अपने बॉस-बॉसियों, आकाओं, कल्याणकारी समाज की नवरचना के लिए ही पैदा हुए मध्यस्थों और लोकपूज्य माने जाने वाले महान और बड़े लोगों को खुश करने के लिए उपहार भेंट करने की परंपरा का निर्वाह करना ही पड़ता है।

इस स्थिति में सामान्य लोग दीवाली पर मुद्राओं, मिठाइयों, वस्त्रों और नाना प्रकार के उपहारों को ले जाकर उनके चरणों में समर्पित करते हैं और बेमन से ही सही, उनके समक्ष शीश नवाते हैं। ऎसा करना हम सबकी मजबूरी भी है क्योंकि पीढ़ियों से भूखे और प्यासे मुफतखोर लोग उपहारों और प्राप्ति से ही खुश होते रहे हैं।

दूसरी तरफ एक पूरी की पूरी मिक्स और संकर प्रजाति है जिसमें शामिल लोग किसी न किसी बहाने त्योहारों को मिठाइयों, उपहारों आदि की प्राप्ति का जरिया बनाये रहते हैं। इन लोगों के चेहरों पर तभी खुशी आ पाती है कि जब त्योहारों पर उनके यहां प्राप्ति के ढेर लगे रहें। भले ही ये सारा कबाड़ उनके किसी काम न आए। इन्हें बेचकर ये खुश हो जाते हैं।

इन महान लोगों को अच्छे आदमियों, गुणवत्ता और कर्मयोग से कोई सरोकार नहीं रहता। इनके लिए वो इंसान ही दुनिया में सर्वश्रेष्ठ होता है जो इनकी खुशी के लिए सब कुछ करने को हर क्षण हर प्रकार के समर्पण को तैयार रहता है।

इन उपहार-पिपासु और भिखारी मानसिकता वाले लोगों का भरपूर उपयोग करते हुए हम अपने जीवन के पापों, अनिष्टकारी ग्रह-नक्षत्रों के कुप्रभावों, मैली और पैशाचिक विद्याओं तथा टोने-टोटकों के प्रभावों से मुक्ति पा सकते हैं और अलग से खर्च कोई नहीं।

इसके लिए अपने द्वारा दी जाने वाली मिठाइयों और उपहारों से दोहरा फायदा उठाएं। आका भी खुश और ऊपरी बाधाओं से हम भी मुक्त।

जो भी मिठाई या उपहार भेंट में देने जाएं, इससे पहले इस पूरी की पूरी सामग्री को अपने शरीर से सात बार उतार लें और यह भावना करें कि हमारे जीवन में अब तक किए गए सारे पाप हमसे निकल कर इस सामग्री में आ जाएं। हमारे सारे ग्रह-नक्षत्रों और मैली विद्याओं के प्रभाव इसमें आ जाए, सभी प्रकार की नकारात्मकताएं इसमें उतर आएं और अपने जीवन की सारी बीमारियां आदि सब कुछ हमारे शरीर से निकल कर इस उपहार सामग्री मेंं समा जाएं।

ऎसा करने मात्र से ही हमारे जीवन के लिए अनिष्टकारी प्रभाव सी क्षण समाप्त हो जाते हैं जिस क्षण हम यह सामग्री सम्माननीय भिखारियों के श्रीचरणों में रख देते हैं।

इन महान लोगों से हाथ मिलाते और चरण स्पर्श करते हुए भी यही भावना करें कि हमारी तमाम प्रकार की नकारात्मकता इन कल्याणकारी और उपहारी महापुरुषों के शरीर में चली जाए।

इस विद्या का उपयोग करने के बाद हम अपने आप में हल्कापन भी महसूस करेंगे और थोड़े दिनों में यह भी अनुभव करने लगेंगे कि यह प्रयोग हमारे जीवन के लिए जबर्दस्त आनंददायी रहा है।

तब हम भगवान का आभार जताना नहीं भुलेंगे कि उसने ऎसे-ऎसे बड़े और महान लोक उपकारी लोग पैदा किए हैं, उनमें उपहारों और मिठाइयों को पाने की कुंभकरणी भूख पैदा कर दी है और इनके माध्यम से जगत के जीवों का कितना कल्याण हो रहा है।

बात केवल दीवाली तक ही सीमित नहीं है। साल भर में कोई सा अवसर हो, इस अचूक विद्या का प्रयोग किया जा सकता है।