मानवीय मूल्यों के प्रसार के लिए दुनिया में एक लाख किमी बाईक भ्रमण

अद्वितीय विलक्षण व्यक्तित्व – रोहित सुब्रह्मण्यम

दुनिया विलक्षण व्यक्तित्वों से भरी पड़ी है जिनके अद्वितीय कर्मयोग और जुनून ने पूरे विश्व को चकित किया है। ऎसे ही एक अपार ऊर्जावान युवा हैं श्री रोहित सुब्रह्मण्यम।

हार्ट फुलनेस, मेडिटेशन और वैश्विक भ्रातृत्व भाव जगाने का संदेश लेकर चेन्नई से मोटरसाईकिल पर एक लाख किलोमीटर दुनिया के भ्रमण के संकल्प को पूरा करने निकले रोहित सुब्रह्मण्यम से 15 मार्च 2016 को सहज योग के लिए समर्पित राजस्थान प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं इस समय चित्तौड़गढ़ में अतिरिक्त जिला कलक्टर के पद पर कार्यरत श्री मुकेश कलाल के Udaipur आवास पर मुलाकात हुई।

श्री रोहित सुब्रह्मण्यम से आत्मीय मुलाकात साक्षात्कार का भी रूप लेती रही। बीच-बीच में श्री मुकेश कलाल भी सहज योग के बारे में चर्चा करते रहे। उदयपुर पहुंचने पर अपने स्वागत से अभिभूत 21 वर्षीय श्री सुब्रह्मण्यम तब तक 15 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर दस राज्यों का भ्रमण कर चुके थे। जनवरी-2015 से शुरू की इस अनूठी यात्रा के बारे में उन्होंने बताया कि वे पूरे भारत में पांच माह में 30 हजार किलोमीटर की यात्रा कर पूरे देश का भ्रमण करने के बाद विदेशों का भ्रमण करेंगे। इसमें 46 देशों में भ्रमण का उनका संकल्प व्यक्त हुआ।

उन पर अपने मिशन को पूरा करने का जुनून सवार है। वे सहज मार्ग के सिद्धान्तों के प्रचार-प्रसार के साथ ही ध्यानविधियों से लोगों को जोड़ते हैं तथा आत्मिक आनंद ध्यान के लिए भावभूमि तैयार करते हैं। अपनी यात्रा वे भोर में सवेरे पांच बजे आरंभ करते हैं और रोजाना 350 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। रास्ते में वे सहज मार्ग और ध्यान विधि के बारे में लोगों को बताते हैं। 

उनका मानना है कि आजकल इंसान तनावों के दौर से गुजर रहा है और ऎसे में उसे रिलेक्स कर सहज बनाने के लिए सहज मार्ग की हार्ट फुलनेस विधि से जोड़ा जाए तो ध्यान का अभ्यास इंसान को सारे तनावों और समस्याओं से मुक्त कराकर हमेशा उत्साहित और ऊर्जित रख सकता है।  इसी तकनीक को वे पूरी यात्रा में जन समुदाय को बताते हैं।

उनका प्रण है कि वे किसी होटल में नहीं रुकते बल्कि किसी अभ्यासी के घर या अन्यत्र रुकते हैंं। अपनी यात्रा के दौरान वे जीवन के नए-नए अनुभवों से वाकिफ होने के लिए कई किरदारों का परिचय देते हैं।

रोहित युवाओं से कहते हैं कि वे अपनी जिन्दगी अपनी तरह, अपने अरमानों के अनुरूप जियें, भूत और भविष्य के सारे आयामों से परे रहकर वर्तमान को पूरे आनंद से जीयें और अपने आपको अन्यतम बनाएं। इससे जीवनयापन का आनंद कई गुना हो जाता है। 

वे कहते हैं कि समय कम है, रोजाना समय बीत रहा है इसलिए जो करना है उसे आज ही करो। ऎसा कुछ करो कि सब कुछ मौलिकता लिए हुए और अलग हो, समाज और विश्व सभी को आनंददायी लगे तथा प्रेरणा का संचार हो। बंधुत्व, माधुर्य और कल्याणकारी भावनाओं की प्रतिष्ठा हो।

अपनी बाईक पर जब वे यात्रा करते हैं तब जो उन्हें देखता है वह अभिभूत हुए बिना नहीं रहता।  जुनून से भरे युवा रोहित का जहां जाते हैं वहां सहज मार्ग के अभ्यासी और रास्ते भर लोग स्वागत करते हैं। यह विवेचन उदयपुर तक की यात्रा तक पर आधारित है।

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