उदयपुर विकास का प्रवाह होगा तीव्रतर

लोक कल्याण और विकास की घोषणाएं देंगी तरक्की को रफ्तार

राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के सार्थक क्रियान्वयन की बदौलत निरन्तर विकास की डगर पर गतिमान उदयपुर जिले की बहुआयामी तरक्की निरन्तर जारी है। राज्य सरकार की इस बार की बजट घोषणाओं से जिले की वैकासिक गतिविधियों को और अधिक रफ्तार के साथ ही सर्वांगीण विकास को सुनहरी दशा एवं दिशा प्राप्त होगी।  उदयपुर जिले के लिए की गई बजट घोषणाओं से आंचलिक विकास को सम्बल मिलेगा और जन कल्याण के साथ क्षेत्रीय विकास के संकल्प भी मूर्त रूप ग्रहण करेेंगे।

इस बार के बजट में मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने उदयपुर जिले के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इनमें राज्य राजमार्ग जिला उदयपुर में एलसी नम्बर 43 X, बप्पारावल पेनोरमा मठाठा-उदयपुर के कार्य करवाने, मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना के तहत वन क्षेत्रों, वन्यजीव क्षेत्रों तथा गैर-वन क्षेत्रों में जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने हेतु उदयपुर में परियोजना लागू करने, उदयपुर जिले के एक विकास खण्ड को पूर्ण रूप से जैविक खेती में बदलने हेतु विशेष योजना बनाकर पायलट बेसिस पर कार्य प्रारंभ किए जाने, उदयपुर के 8 आश्रम छात्रावासों में सीटों की वृद्धि, उदयपुर में एक राजकीय मॉडल आवासीय विद्यालय की क्षमता 210 से बढ़ाकर 350 करने, उदयपुर में 11 विद्यालयाें में विज्ञान या कृषि या वाणिज्य संकाय प्रारंभ करने, चिकित्सा महाविद्यालय उदयपुर में 100 एमबीबीएस सीट्स की वृद्धि,  रविन्द्र नाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, उदयपुर में नयी कॉबोल्ट मशीन की स्थापना तथा सीनियर रेजिडेंट हॉस्टल के नवीन भवन का निर्माण की घोषणाएं की हैं।

इसी प्रकार बजट में उदयपुर शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करवाये जाने,  सैनिक विश्रामगृह, उदयपुर के विस्तारीकरण का कार्य करवाने,  खेरवाड़ा उदयपुर में एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना और फूड़ क्राफ्ट इन्स्टीट्यूट को स्टेट इन्स्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट में अपगे्रड किए जाने की घोषणाएं भी की गई है। राजस्थान ही नहीं अपितु देश भर में तीव्र अनवरत विकास करने वाले क्षेत्रों में पहचान बनाते जा रहे उदयपुर में विभिन्न विकास योजनाओं, कार्यक्रमों, परियोजनाओं और नवाचारों के बेहतर क्रियान्वयन के साथ ही इन बजट घोषणाओं के अन्तर्गत होने वाले कार्यों से आंचलिक विकास और लोक कल्याण की गतिविधियों को और अधिक सम्बल प्राप्त होगा।