तिलांजलि दो नासमझों को

अज्ञानी, वज्रमूर्ख और नासमझ की उपेक्षा करो, भूल जाओ क्योंकि इन लोगों का कल्याण प्रभु भी नहीं कर सकता। भगवान ने भी इन्हें उपेक्षित कर रखा है तभी तो ये अहंकार से भरा पब्लिसिटी गुब्बारा बनकर हवा में उड़ने लगे हैं और गुणों और इंसानों की कद्र करना भूल गए हैं। जिसे भगवान त्याग देता है, भक्त और सज्जनों को भी चाहिए कि ऎसे नालायकों को तिलांजलि दे दें, उन्हें कभी याद न करें। ऎसे लोगों को याद करना भी महापाप है और इसका परिहार न हैमाद्रि से हो सकता है, न इसके लिए कोई व्रत-उपवास कहीं बताया गया है।