यों करें अपने पापों और बीमारियों का ट्रांसफर

अनुभूत रामबाण प्रयोग

मानसिक संकल्पों में बहुत बड़ी ताकत होती है। यही मानसिक तरंगे हैं जिनसे संसार का व्यापार चलता है। जानिये कैसे हम अपने पापों का कचरा पात्र मात्र अपनी संकल्प शक्ति के बल पर दुष्टों को ट्रांसफर कर सकते हैं।

आम तौर पर सत्य यही है कि अपने से छोटों के पाँव कभी नहीं छूने चाहिएं। इसी प्रकार भ्रष्ट, चोर-उचक्कों, हराम का खान-पान करने वालों, अहंकारियों, शोषकों, अपने अधिकारों और पद का दुरुपयोग करने वालों, कार्यस्थलों का सामान घर में लाकर उपयोग करने वालों, अपराधियों और रिश्वतखोरों के पाँव छूने से घोर पाप लगता है। जहां तक हो सके इनसे बचें।  फिर भी किसी कारणवश या लोक व्यवहार को देखते हुए, दुष्टों को राजी रखने के लिए शोषकों, संवेदनहीनों और इन नुगरे-नालायक व कमीन लोगों के चरण स्पर्श करने की विवशता हो तो पूरा झुककर अपने दाँये हाथ से उनके दाँये पाँव के अंगूठे और बाँये हाथ से उनके बाँये पैर के अंगूठे को छूकर यह भावना करें कि अपने ज्ञात-अज्ञात सारे पाप कर्म से उत्पन्न या संचित नकारात्मक ऊर्जा अंगुलियों से पोरों से होकर उन दुष्टों के शरीर में प्रवेश कर रही है। यह भी भावना करें कि हमारे शरीर का पाप पुरुष निकल कर इनके शरीर में प्रवेश कर रहा है। ऎसा करने से चरणस्पर्श का दिखाऊ लोकाचार भी पूरा हो जाएगा और अपने पाप भी इन महान लोगों को पूरे आदर के साथ दान दिए जा सकेंगे।  फिर चुपचाप दूर जाकर भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए अपने दाहिने कान का स्पर्श कर लें, साफ पानी से हाथ धो लें और मन ही मन तीन बार यह मंत्र पढ़ लें – ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः।