सुझाव – गरीब को सम्बल दें


कहीं भी बाहर चाय-नाश्ते का मौका मिले, बड़ी होटलों और रेस्तरांओं की बजाय छोटी और साफ-सुथरी होटलों को पहले प्राथमिकता दें। चाय-काफी पीने, ठण्डा और दूसरी किसी भी प्रकार की सामग्री के लिए बड़े प्रतिष्ठानों की बजाय ताजा सामान बेचने वाली दुकानों पर ज्यादा भरोसा करें। बड़ी दुकानों वालों के लिए आप हजारों में एक हैं और उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप उनके ग्राहक बनें या न बनें, लेकिन छोटी दुकानों वालों के लिए आप सम्मानीय ग्राहक जरूर होते हैं और वहाँ आपका ध्यान भी रखा जाता है। कई बार बड़ी दुकानों और फैशन के मोह में हम चकाचौंध के मारे भटक जाते हैं मगर वहाँ ऊँची दुकान – फीके पकवान से ज्यादा कुछ नहीं होता। छोटे व्यवसायियों को लाभान्वित करते हुए हम समाजवाद का पोषण करते हुए उन्हें सम्बल प्रदान कर सकते हैं जबकि बड़ी दुकानों वालों के लिए आपका योगदान राई के बराबर भी नहीं होता। समाज के उस तबके को ऊँचा उठायें, जिसे वाकई सम्पन्न बनाना है, उन लोगों को नहीं जो सम्पन्नता पाकर समाज को नीचे गिरा रहे हैं।