आत्मघाती है यह मेहमानवाजी

आत्मघाती है यह मेहमानवाजी

आजकल सब तरफ चाय-नाश्ते का प्रचलन जीवन की अनिवार्यता की श्रेणी में आ चुका है। जहां जाएं वहाँ आतिथ्य सत्कार के नाम पर ड्राईंग रूम में सजी-धजी तरह-तरह की टी टेबल्स पर नाश्ता पहले से परोसा हुआ मिलता है नाश्ता करते हुए ही चर्चाओं का दौर जारी रहता है।

कई लोग मन से खिलाते-पिलाते और आनंदित होते हैं। खूब सारे बिना मन के। और कई ऎसे भी हैं जो उन्हीं की आवभगत किया करते हैं जो अपने किसी काम का हो या आने वाले समय में किसी भी काम में आ सकने वाला हो।

आतिथ्य सत्कार के मामले में नाश्ते का रोजमर्रा की जिन्दगी में अहम् स्थान है। इसके अलावा किसी भी प्रकार के उत्सवों, पर्वों और मांगलिक अवसरों, जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ आदि में नाश्ते का खास महत्व है।

खान-पान के बिना आजकल कोई सा आयोजन पूरा नहीं होता। और अब तो यह धारणा पक्की हो चुकी है कि आयोजन को सफल बनाना हो तो खान-पान नितान्त जरूरी है। इसके बिना भागीदारी की सारी बातें बेमानी हो चली हैं। यही कारण है कि अब लंच और डिनर कल्चर हर आयोजन पर भारी पड़ता जा रहा है।

लेकिन इस खान-पान के मामले में हमारी कई भूलें ऎसी हैं जिनके कारण हमें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अधिकांश मामलों में रहस्योद्घाटन यह है कि अलग-अलग तरह के आते-जाते रहने वाले अतिथियों की झूठन हमारे लिए इतनी घातक हो सकती है कि हमारा जीवन अभिशप्त भी हो सकता है।

आम तौर पर देखा यह जाता है कि होली-दीवाली हो या और कोई सा त्योहार। हमारे ड्राईंग रूम में हम झीना कपड़ा ओढ़ाकर नमकीन, मिठाई और तरह-तरह के व्यंजन रखते हैं। आगंतुक आते हैं और हम कपड़ा हटा देते हैं।

वे अपनी मनचाही सामग्री उठा कर खा लेते हैं। इनमें हम चम्मचों का प्रयोग भी करते हैं। खाने का काम पूरा होने के उपरान्त जब चाय-काफी-शरबत या ठण्डा आ जाता है तब प्लेट्स में सजाकर रखी गई सामग्री को हम वापस ढक दिया करते हैं।  फिर दूसरे आगंतुक आते हैं और यही क्रम त्योहारों के दिनों में चलता रहता है।

एक बार टेबल पर सजी सामग्री पर किसी का हाथ लग गया या उसमें से किसी ने कुछ भी अपने हाथ या चम्मच से लेकर खा लिया तब यह पूरी सामग्री उसी के हिस्से की हो जाती है लेकिन पूरा वह खा नहीं पाता। ऎसे में यह सामग्री झूठी हो जाती है और यह दोषपूर्ण हो जाती है।  चाहे वह चम्मच से ही क्यों न खाए।

दृष्टि स्पर्श के साथ ही चम्मच से खाने के कारण चम्मच लोहे, स्टील या किसी भी धातु की होती है और धात्विक सुचालकता होने के कारण भोक्ता और भोज्य सामग्री के मध्यम एक सुचालक चम्मच जुड़ जाती है।

इस वजह से भोक्ता के आभामण्डल और हाथों से निकलने वाली सूक्ष्म और अदृश्य तरंगों का प्रभाव खाद्य सामग्री पर पड़ता है। खास कर अन्न पर । इससे भोज्य सामग्री का सीधा रिश्ता भोक्ता का हो जाता है।

पहले पहल जो इसका भक्षण करता है केवल उसी के लिए यह ठीक होती है।  बाद में  आने वाले सभी लोगों को इसका उपयोग करने से दोष लगता है क्योंकि इसमें पूर्ववर्ती उपयोगकर्ता से जुड़े तत्वों का प्रभाव आ जाता है।

कई बार एक ही दिन में खूब सारे लोगों के लिए एक ही प्रकार के पात्र होते हैं जिन्हें बार-बार भरा जाता रहता है।  इससे तो अच्छा है कि नाश्ता, मिठाइयां आदि सभी प्रकार की अल्पाहार सामग्री को जो भी आगंतुक आएं, उन्हें वही का वही पात्र खोलकर खान-पान के लिए आमंत्रित करते रहने की बजाय यह खान-पान सामग्री सभी को अलग-अलग दी जाए।

पहले से इसे टी टेबल पर संग्रहित करके न रखा जाए ताकि यह उच्छिष्ट न हो।  मेहमानों के लिए यह सामग्री उच्छिष्ट की संज्ञा में आती है और इसका बड़ा भारी कुप्रभाव होता है।  हमारे यहां आने वाले आगंतुकों में सारे शुद्ध और पवित्र नहीं हुआ करते।

बहुत से लोग किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त होते हैं, खूब सारे पुरुषार्थहीन, भ्रष्टाचारी, बेईमान और रिश्वतखोर हैं, कई सारों के सर पर जीव हत्या, मद्यमान, गर्भपात, दूसरों की जमीन-जायदाद हड़पने और अतिक्रमण का पाप रहता है और खूब सारे ऎसे भी दुर्भाग्यशाली, अभिशप्त और अपशकुनी होते हैं जिन पर कई जन्मों से पाप या परायी आत्माओं, बाहरी प्रभावों का साया रहता है।

ये लोग जब हमारे अल्पाहार की सामग्री को छूते हैं तब उनके आभामण्डल में संचित अशुद्धता, अपवित्रता और पापों का कुछ प्रतिशत उस भोज्य सामग्री में आ जाता है। खासकर अन्न इस तरह की पापराशि और नकारात्मक तत्वों के लिए सर्वाधिक सुचालक व श्रेष्ठ संग्राहक होता है।

इससे अतिथियों के लिए रखा गया अल्पाहार अशुद्ध, शापित और नकारात्मक प्रभावों से भरा हो जाता है। इसका असर उस अल्पाहार का उपयोग करते रहने वाले लोगों में आ जाता है।

कई बार अन्त में बची हुई सामग्री का प्रयोग हम घर वाले भी कर डालते हैं। और हम न भी करें तो हमारे छोटे बच्चे बाल सुलभ स्वभाववश इस सामग्री का उपयोग करते रहते हैं।

इस तरह से पाप, बीमारियों और नकारात्मक प्रभावों का यह चक्र चलता रहता है जो हानि पहुंचाता है।  हमारे जीवन की कई बीमारियों और समस्याओं का यह भी एक बहुत बड़ा कारण है जिसके प्रति हम अनजान हैं अथवा उपेक्षा करते रहते हैं।

इनसे बचने का एक ही तरीका है कि खान-पान और व्यवहार में शुद्धता लाएं और हर नए आगंतुक के लिए नई प्लेट में सजाकर खाद्य और पेय सामग्री परोसें ताकि सारी खतरों से दूर रहा जा सके।