महान रहस्य का उद्घाटन – नालायक पण्डित और बाबा ऎसे करते हैं टोटके

धन लोभ और प्रभावशाली वीआईपी से घनिष्टता बनाए रखने के चक्कर में इन विशिष्टजनों के कुकर्मों और पापों का भार उतारने के लिए कतिपय ढोंगी बाबा और धुतारे लोभी पण्डित ऎसे कई सारे टोटके करते हैं जिनके कारण से बेचारे नासमझ और भोले-भाले लोगों को दुःखी होना पड़ता है।

ये वीआईपी कहे जाने वाले बड़े और महान लोगों की प्रतिष्ठा वृद्धि और उनके शत्रुओं का खात्मा करने के नाम पर पण्डितों की जमातें बिठाकर पूजा-पाठ और अनुष्ठान तो कराते ही हैं, इसके साथ ही किसी खास दिन अमावास्या, दीवाली, होली या पूर्णिमा आदि को सामूहिक प्रसादी – भण्डारा करते हैं।

इसमें मिष्टान्न सामग्री जो भी परोसी जाती है उसे इन वीआईपी के पूरे शरीर से एक सौ आठ या एक हजार आठ बार उतार कर इसे भोजन में परोसवा देते हैं। इससे पापों और अनिष्ट का अंश उन सभी को ट्रांसफर हो जाता है जो भोजन ग्रहण करते हैं और उधर वह वीआईपी इन अनिष्टकारी शक्तियों से राहत पा जाता है।

कई सारे धूर्त बाबों और मुद्रा लोभी पण्डितों के ऎसे आयोजनों से दूरी बनाए रखें।  इससे बचने का एक और उपाय है और वह यह है कि इस तरह के किसी भी आयोजन में जो भी खान-पान करें, उसे पहले अपने ईष्ट देव का मन ही मन स्मरण कर अर्पित कर दें और प्रसाद रूप में ग्रहण करें।

यों भी धर्मशास्त्रों में स्पष्ट वर्णित है कि जो लोग अमावास्या को किसी दूसरे का अन्नग्रहण करते हैं उनके माह भर का पुण्य खिलाने वाला प्राप्त कर लेता है। पूर्णिमा को खा लेने पर पन्द्रह दिन का, और सूर्य या चन्द्र ग्रहण में पराया अन्न खा लिए जाने पर जिन्दगी भर का पुण्य समाप्त हो जाता है।

(सभी धंधेबाज पण्डितों और सांसारिक आसक्तियों से परिपूर्ण किन्तु वैराग्य पा चुके बाबाओं से क्षमायाचना सहित)

2 comments

  1. Bhanwar Lal Garg

    बहुत ही बढि़या
    पढ़कर सदैव की भांति आनन्द आ गया।