गूढ़ रहस्य – जिम्मेदारी से करें वृक्षारोपण

आजकल फोटो खिंचवाने और खबरों में आने के लिए वृक्षारोपण समारोहों पर लोग जैसे टूट पड़े हैं। पौधा एक रोपेंगे और हाथ लगाएंगे दर्जन से अधिक लोग, जाने सारे के सारे पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के लिए ही धरा पर पैदा हुए हों और इनके रहते हुए ही धरती पर हरियाली की मोटी परत वाली चादर बिछ जाने वाली हो।

जो लोग पौधे लगाते हैं उन्हें चाहिए कि वह इन पौधों को जीवित रखने और सुरक्षित पल्लवन कर बड़े करने की जिम्मेदारी भी लें। अपने हाथों लगाए गए पौधों के जीवित न रहने की स्थिति में एक की बजाय दो के अनुपात में नए पौधे लगाएं अन्यथा जीव हत्या के बराबर पाप लगता है।

सामूहिक वृक्षारोपण के आयोजनों में लगाए गए पौधों में से यदि पौधे मृत हो जाएं तब वृक्षारोपण कार्यक्रम का उद्घाटन करने वाले अतिथियों के सर जीव हत्या का पाप चढ़ जाता है और जो-जो लोग पौधारोपण कार्यक्रम में शामिल होते हैं उन सभी को भ्रूण हत्या का पाप लगता है।

सायंकाल और रात्रि में पौधारोपण वर्जित है।

जिस भूमि पर पौधे रोपे जाएं उसे गौमूत्र और गोबर से शुद्ध करना जरूरी है।

जिसके हाथ से पौधे लगवाएं जाएं उस इंसान के हाथ किसी की हत्या, अपराध से सने नहीं होने चाहिएं। रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार में लिप्तजनों, भ्रूण हत्या, गर्भपात करने वाले, औरों को बेवजह प्रताडित करने वाले, संवेदनहीन, क्रूर और पुरुषार्थहीन लोगों के हाथों लगाए जाने वाले वृक्षों का कोई भविष्य नहीं होता, ये पेड़ इन पापियों के हाथों की तेज ऊष्मा से जल जाते हैं।

उन्हीं के हाथों लगाए पौधे पनपते हैं जो भ्रष्ट, रिश्वतखोर और दुष्ट न हों। निर्मल मन वाले, सच्चे और शुद्ध भावों वाले व्यक्तियों के हाथों लगने वाले पौधे शीघ्र बड़े और घने होते हैं और उनकी उपयोगिता सदियों तक रहती है।

अपने सारे ग्रह-नक्षत्रों और व्याधियों के समूल नाश के लिए अपनी आयु के वर्षों की संख्या में अपनी राशि और नक्षत्र के पेड़ लगाएं और इनकी इतनी ही परिक्रमा करें।

अपने हाथ लगाए गए  पेड़ यदि कुम्हला जाएं, संरक्षित न रह पाएं तो जान लें कि हमारे भीतर पाप भरा हुआ है और इस कारण से पेड़ पल्लवित नहीं हो पा रहे हैं। पहले पापमुक्ति के उपाय करें इसके बाद पौधारोपण करें।

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