अनिष्ट निवारण के लिए होली के समक्ष लें संकल्प

जो लोग एक पेड़ नहीं लगा सकते, पेड़ों की कटाई करते हैं, वनों का सफाया करते हैं और प्रकृति का शोषण करते हैं उन्हें होली दहन का कोई अधिकार नहीं है। ये लोग होली के नाम पर लकड़ियां जलाते हैं तो उन्हें पाप का भागी होना पड़ता है और साल भर के भीतर उतने अनिष्ट आते हैं जितनी लकड़ियाँ ये होली के दिन जलाते हैं। अब तक जो हो चुका, उसे भूल जाएं। होली दहन के वक्त जलती होली की परिक्रमा करते हुए क्षमा मांगें और इस वर्ष वर्षाकाल में अनुकूल समय और मुहूर्त में कम से कम उतने पेड़ लगाएं जितनी अपनी आयु हो चुकी है। इन पेड़ों को लगाकर ही कर्तव्य की इतिश्री न कर लें बल्कि इनके सुरक्षित पल्लवन और विकास के लिए भी गंभीर रहें। तभी प्रकृति माफ करेगी अन्यथा तैयार रहें अनिष्ट का सामना करने के लिए। पेड़ लगाने में रुचि नहीं है और होली की पूजा करते हुए नारियल समर्पित करते हैं, परिक्रमा करते हैं और चाहते हैं कि अपनी मनोकामनाएं पूरी हो जाएं। यह संभव नहीं। नवजात शिशुओं की ढूँढ़ करने वाले भी यदि चाहते हैं कि उनके बच्चों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य उत्तम रहे, तो होलिकाग्नि के फेरे लेते हुए पेड़ लगाने का संकल्प लें। जो लोग वृक्षारोपण के नाम पर केवल भाषण झाड़ते हैं, वे भी अपयश के भागी होते हैं यदि पेड़ न लगाएं।