सफलता की कहानी – – मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान ने बदली तस्वीर

पहाड़ों से होकर बह जाने वाले बरसाती पानी को पहाड़ों से लेकर जमीन और पाताल तक में रोकने के लिए प्रदेश भर में संचालित मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान इन दिनों उदयपुर जिले में पूरी बेहतरी और व्यापकता के साथ परवान पर है।baara

आसमानी पानी को रोक कर धरती के जल भण्डारों को समृद्ध किए जाने का यह अभियान जिले में युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। राजस्थान का यह एकमात्र ऎसा जिला है जहां इस अभियान के अन्तर्गत प्रदेश भर मेंं सर्वाधिक 11 हजार 490 कार्य इस अभियान के अन्तर्गत हाथ में लिए गए हैं और अब तक बेहतर उपलब्धियां हासिल हुई हैं।

मेवाड़ के पर्वतीय क्षेत्रों से बहकर चले जाने वाले पानी को रोकने के लिए स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार युद्धस्तर पर यह समयबद्ध अभियान चलाया जा रहा है जो कि पूर्णता की ओर डग बढ़ा रहा है।

यों तो सैकड़ों जल संरचनाएं पानी के आवाहन को तैयार हैं लेकिन इनमें कई काम ऎसे हैं जो अपनी उपयोगिता और समर्पित जन सहभागिता के लिहाज से खास महत्व रखते हैं।

इनमें बांरा तालाब भी है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 पर उदयपुर से 42 किलोमीटर दूर गिर्वा पंचायत समिति की बांरा ग्राम पंचायत के बांरा गांव में सिंचाई विभाग द्वारा चार दशक पहले निर्मित बांरा तालाब के जीर्णोद्धार का काम देखने लायक है।

लगातार गाद भर जाने से यह मैदान की तरह होकर अपनी उपयोगिता खो चुका था। अभियान के अन्तर्गत उदयपुर जिला पुलिस प्रशासन ने इसे पूर्णता देने की ठान रखी है। पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों, जन प्रतिनिधियों और क्षेत्रीय ग्रामीणाें के सामूहिक श्रमदान से शुरू यह कार्य अभियान का तोहफा सिद्ध होगा।

इसका केचमेंट एरिया 5 हजार 250 हैक्टर है और डूब क्षेत्र 6 हजार 050 वर्ग मीटर है। तालाब की दीवार की लम्बाई 140 फीट है जबकि तालाब की ऊँचाई 10 फीट है। लगातार काम चलाकर श्रमदान, जेसीबी और ट्रैक्टर से खुदाई कर लगभग 1 हजार 200 घनमीटर मिट्टी तालाब से बाहर निकाली जा चुकी है। इसे गहरा करने का काम इन दिनों युद्धस्तर पर चल रहा है।

इस क्षेत्र में जल भराव, हरियाली विस्तार और नहरों के माध्यम से सिंचाई सुविधा सुनिश्चित करने के लिए काफी कार्य किए गए हैं। हरित धारा के अन्तर्गत 31.14 लाख की लागत से बांरा तालाब सुदृढ़ीकरण एवं नहर निर्माण कार्य के अन्तर्गत पहले से निर्मित तालाब की मरम्मत एवं 900 मीटर नहर का कार्य होने से रबी एवं खरीफ दोनों ही फसलों में उत्पादन बढ़ेगा।

इसी प्रकार हिन्दुस्तान जिंक लि. द्वारा सीएसआर के अन्तर्गत 25 लाख रुपए खर्च कर 20 मीटर आरसीसी रिटेनिंग दीवार का काम कराया जा रहा है। इससे साईड कटिंग का कटाव रुकेगा।

इस तालाब में जमा गाद निकालने की दृष्टि से हुआ कार्य सामूहिक श्रमदान का आदर्श उदाहरण है। यहां पुलिस एवं प्रशासन द्वारा श्रमदान, जेसीबी एवं ट्रेक्टर के माध्यम से गाद निकालने का काम निरन्तर जारी है।

आस-पास के ग्रामीणों ने भी तीन दिन में पन्द्रह घण्टे मेहनत कर 300 घनमीटर मिट्टी बाहर निकाल डाली।  ग्राम पंचायत के सरपंच श्री हरीश मीणा द्वारा जेसीबी एवं ट्रेक्टर लगवाकर 150 घनमीटर मिट्टी बाहर निकलवायी गई।

इसी प्रकार राज्य स्तर से जेसीबी कंपनी के सहयोग से जेसीबी एवं ट्रेक्टर से 3 दिन में 15 घण्टे तक काम कर 450 घनमीटर मिट्टी बाहर निकाली जा चुकी है। यह कार्य निरन्तर जारी है और जल्द ही बांरा तालाब का कार्य पूर्णता पाकर सुनहरे आकार में सामने आ जाएगा।

बांरा तालाब से क्षेत्र में भूमिगत जलस्तर बढ़ेगा तथा कुओं और दूसरे सभी जल स्रोतों में पर्याप्त जल बना रहेगा। सिंचाई क्षेत्रफल 50 से बढ़कर 70 बीघा होगा तथा आस-पास के 40 से अधिक जनजाति काश्तकार परिवार दो फसलें लेकर लाभान्वित होंगे। फल-फूल और सब्जी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

साल भर मवेशियों एवं वन्य जीवों के लिए पेयजल उपलब्ध रहेगा। तालाब के पास ही श्मशान है और इसे अंतिम संस्कार में आने वाले ग्रामीणों को नहाने-धोने की सुविधा रहेगी।

इन बड़े कामों के साथ ही जल संग्रहण संरचनाओं और हरित क्रान्ति की दृष्टि से बांरा ग्राम पंचायत में बहुत से कार्य किए गए हैं जिनका लाभ ग्रामीणों को प्राप्त होगा। उम्मीद की जा रही है कि बरसात के बाद बांरा आधुनिक जल तीर्थ के रूप में नई भूमिका में सामने आएगा। हाल ही जयपुर से आए राज्यस्तरीय अधिकारियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने भी बांरा तालाब के कार्यों को देखा तथा इनकी सराहना की।