सभी साधकों के लिए विशेष …

भौमाश्विनी योग में प्राप्त होती है देवी मैया की प्रसन्नता

यह योग 18 दिसम्बर 2018, मंगलवार को है। 

भौमवार यानि की मंगलवार को यदि अश्विनी नक्षत्र हो तो वह दिन अमृतसिद्धि योग होता है। यह दिन अमृत फल की प्राप्ति वाला होने से इस दिन का विशेष महत्व है।  इस योग को भौमाश्विनी योग कहा जाता है।

देवी साधना में वर्णित है कि भौमाश्विनी योग में यदि श्री देव्यथर्वशीर्षम् का अनुष्ठान किया जाए तो देवी मैया शीघ्र ही प्रसन्न होती हैं और साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति कराती हैं। खासकर संसार के समस्त बंधनों से मुक्त कर जीवन्मुक्ति का वर प्रदान करती हैं।

देवी अथर्वशीर्ष में कहा गया है – भौमाश्विन्यां महादेवीसंनिधौ जप्त्वा महामृत्युं तरति। स महामृत्युं तरति। …

भौमाश्विनी योग में देवी अथर्वशीर्ष के 108 पाठ कर लिए जाने पर पुरश्चरण पूर्ण हो जाता है।

इसके उपरान्त जब भी समय मिले देवी अथर्वशीर्ष को रोजाना अपनी पूजा में शामिल करें।

इसकी फलश्रुति में कहा गया है कि इसके पाठ से पापों का नाम होता है। दस बार पाठ कर लेने पर तत्काल पापों से मुक्त हो जाता है।  निशीथकाल में तुरीय संध्या के समय पाठ करने से वाणी की सिद्धि होती है। नवीन मूर्ति के सम्मुख पाठ से देवता का सान्निध्य प्राप्त होता है। प्राण प्रतिष्ठा के समय पाठ करने से प्राणों की प्रतिष्ठा होती है।

दुर्गा सप्तशती में देवी अथर्वशीर्ष है। मंगलवार को यथाशक्ति इसके अधिक से अधिक पाठ करें।

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