इन्हें दिखाओ बाहर का रास्ता ..

जो किसी काम के नहीं, उन्हें क्यों बनाए रखे हो अपने पास, दिखाओ उन्हें बाहर का रास्ता और करो प्रेमपूर्वक विदा। खुल कर कह ही डालो – तुम किसी काम के नहीं, न हमारे, न समाज और देश के। काम के न काज के, ढाई मन अनाज के। यमराज से भी विनयपूर्वक कहो – अपनी फैक्ट्री की रफ्तार तेज करो।

धरती पर बढ़ता ही जा रहा है इनका भार। हे प्रभु ! अब तो लो अवतार, धरती का भार उतारन को।

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