लघु कथा – वरदान

रात के चौथे पहर में गहरी नींद में सो रहे माईक वाले को भगवान ने जगाया।

कहा – वत्स मांगों वरदान ! मैं तुम्हारी भक्ति से बहुत खुश हूँ।

माईक वाला – प्रभु मैंने कुछ नहीं किया, मैं वर पाने लायक कहाँ ?

शिवजी – नहीं वत्स ! तू ने दोहरी-तिहरी भक्ति का पुण्य कमा लिया है।

तेज आवाज वाला माईक लगाकर देर रात तक मेरी भक्ति वाले मंत्र-स्तुतियों, भजनों का हजारों भक्तों को चाहे-अनचाहे श्रवण कराया, शोर मचाते हुए आस-पास के लोगों का रात्रि जागरण करवाया। पुजारी और मन्दिर ट्रस्ट वालों को कमायी करायी। और सुन, बहुत से मेरे भक्त तुम्हारे माईक के शोर से घबरा कर मन्दिर आए ही नहीं, उन्होंने घरों पर ही मेरी चारों प्रहर की अभिषेक-पूजा षोड़शोपचार से की, अन्यथा मन्दिर में तो भारी-भरकम लोक लुभावन श्रृंगार के कारण मैं एक बूंद जल को भी तरस गया था, चारों प्रहर की पूजा की बात तो दूर है। और फिर मेरी अभिषेक-पूजा करने वाले भक्तों को आशीर्वाद देने उनके घरों तक गया और धरती पर हो  रहे उत्सव का आनंद पाया सो अलग।

बोलो भगवान भोलेनाथ की जय।