धर्म की गंगा बहाता है धर्मेश्वर महादेव

शैव उपासना की दृष्टि से मेवाड़ अँचल सदियों से प्रसिद्ध रहा है। मेवाड़ क्षेत्र का कोई कोना ऎसा नहीं है जहाँ भगवान शिव को कोई प्राचीन या नवीन मन्दिर न हो। बहुत से मन्दिर अन्तरंग पहाड़ी क्षेत्रों में अवस्थित होने के बावजूद शिवभक्तों की आस्था के केन्द्र बने हुए हैं।

उदयपुर से पिण्डवाड़ा रोड पर पन्द्रह किलोमीटर दूर थूर में अंतेवर सागर की मजबूत पाल पर प्राकृतिक रमणीयता के मध्य अवस्थित धर्मेश्वर महादेव का मन्दिर प्राचीन होने के साथ-साथ ऎतिहासिक भी हैं जहाँ राणा कुंभा के आराध्य भगवान धर्मेश्वर महादेव और अन्य देव प्रतिमाएं हैं जिनके प्रति ग्रामीणों की अगाध श्रद्धा है। यहाँ वट वृक्ष सहित अनेक पुराने पेड़ों की छाया, दूर-दूर तक फैली हरियाली और पास ही बहती नदी है। इस दृष्टि से यह ग्रामीणों की श्रद्धा के साथ ही प्राकृतिक आनंद प्राप्ति का स्रोत भी है।

प्रकृति और परमेश्वर की मौजूदगी का सुकून देने वाले धर्मेश्वर महादेव का पूरा वातावरण आनंददायी है जहाँ वटवृक्ष की जटाओं की छाँव में भगवान शिव के कई लिंग हैं तथा मन्दिर परिसर में कई देव स्थानक, धूंणी आदि हैं। मन्दिर की दीवारों पर सुन्दर दैव लीलाएं चित्रित हैं।

क्षेत्रवासियों के लिए धर्मेश्वर मन्दिर प्रमुख तीर्थ है जहाँ होली के बाद जमरा बीज और भादवी तेरस को बड़ा भारी मेला भरता है। इसमें गवरी नृत्य अपना खास आकर्षण बिखेरता है। यहां पुराने जमाने में बहुत से संत-महात्माओं और तपस्वियों ने तपस्या की।

इनमें डेढ़ सौ वर्ष पूर्व हुए संत नंदपुरी महाराज के चमत्कारों की गाथाएं बहुश्रुत हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वे एक ही समय में कई स्थानों पर दिखते थे। यहां से तीर्थयात्रा के लिए गए यात्रियों को वे तीर्थस्थलों में दिखाई दिए और यहां आकर पूछताछ की तो पता चला कि संत यहीं पर तपस्यारत हैं और स्थान छोड़कर कहीं गए ही नहीं।

इस स्थान के प्रति ग्रामीणों के मन में विशेष आस्था का भाव है और यही कारण है कि क्षेत्र भर के हजारों ग्रामीणों के लिए धर्मेश्वर महादेव कष्ट निवारण करने वाले देवता के रूप में प्रसिद्ध हैं।

2 thoughts on “धर्म की गंगा बहाता है धर्मेश्वर महादेव

  1. Har Har Mahadev . Aapka aabhaar mewaad ke prasidh sthano ko khoj khoj kar naye platform se sabko avgat karaane ke liye . Jai ho

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