अपनी बात

मेरा कोई भी लेखन मेरा नहीं है। जो अनायास विचार आते हैं वह भगवान के वहां से आते हैं और धड़ाधड़ लिपिबद्ध हो जाते हैं। और इन्हें ही आगे से आगे परोसगारी का दायित्व निभा रहा हूं।

वैसे मेरा लेखन किसी भी मोड़ पर असत्य या धर्महीन लगे, तो जरूर बताएं।  सत्य कड़वा होता है और रहेगा।  इसका यह अर्थ नहीं कि हम सत्य का उद्घाटन ही न करें। किसी को अच्छा लगे तो श्रेय प्राप्ति की कामना नहीं, बुरा लगे तो कोई बात नहीं क्योंकि मेरा विश्वास निर्भयता, निरपेक्षता और सदा-मुदिता में रहा है।

नाम दीपक है, सूरज का प्रतिनिधि हूं इसलिए मेरा लेखन और व्यक्तित्व अग्निधर्मा जरूर है, लेकिन उष्मा-किरणों की भी अपनी ताजगी है जिसका कोई मुकाबला नहीं।  पर इतना साफ कर दूं कि मेरा लेकिन किसी के भी प्रति पूर्वाग्रह या दुराग्रह से युक्त नहीं है। यह केवल और केवल मौलिक एवं स्वाभाविक अभिव्यक्ति मात्र है। इसका उद्देश्य न लेखक, चिन्तक या दार्शनिक के रूप में प्रतिष्ठा पाना है, और न ही और कुछ।

यह मेरे वैचारिक भण्डार से विचार श्रृंखलाओं का विरेचन मात्र है। यह ठीक उसी तरह है कि वमन के उपरान्त कितना अधिक हल्कापन लगता है, सुकून मिलता है। अपने आपको विचारों के भार से हल्का कर लेने मात्र का उपक्रम है यह। और इस ईश्वरीय कृपा को कोई छीन नहीं सकता। भगवान की मुझ पर असीम कृपा है और इसका अनुभव मैं हर क्षण करता हूं।