व्यंग्य लेख …. यह है चमत्कार – गधों के श्राप का

व्यंग्य लेख …. यह है चमत्कार – गधों के श्राप का

आखिर देख ही लिया न गधों के श्राप का परिणाम। और वह भी कोई एक गधे या गधी का नहीं, पूरी की पूरी गधा प्रजाति जब रुष्ट हो जाती है तब कितना बड़ा भूकम्प ला देती है, यह बात इतिहास सदियों तक सुनाता रहेगा।

गधों की महिमा के बखान का यह ऎतिहासिक चमत्कार पूरी की पूरी गधा प्रजाति के लिए स्वाभिमान और सामथ्र्य का पर्याय एवं पूरक बनकर गधों की भाग्यरेखाआें को चमकाता हुआ गौरव प्रदान करता रहेगा।

गधों ने जो चमत्कार दिखलाया है उसे देख गधों के पूर्वज भी चमत्कृत रह गए हैं और वर्तमान गधा कुनबा तो गौरवान्वित है ही। सृष्टि के उद्भव के बाद से लेकर दुनिया भर के इतिहास में गधों की करिश्माई करामात का शायद यह पहला मौका ही है।

अन्यथा गधों का इतिहास गवाह है कि उन्होंने सब कुछ सहा मगर अपने बूते सबक सिखाने का यह पहला कामयाब उदाहरण ही पेश किया है। आखिर गधों ने क्या कुछ नहीं सहा। गधों के लिए अब हर जगह एक नहीं सैकड़ों मालिक हैं जो उसे खोटी-खोटी ही सुनाते हैं, डण्डे मार-मार कर काम कराते हैं, गधे ऊफ तक नहीं करते, दिन-रात काम करते रहते हैं।

गधों ने कभी अपना सर ऊँचा नहीं किया, हर वक्त सर नीचा रखकर जो कुछ सुनाया वह सुन लिया, धीर-गंभीर होकर स्वामीभक्ति को अपनाया और जो बोझ डाला उसे सहते हुए मालिक के इशारों से हर तरह के सफर को तय किया।

गधों ने कभी यह नहीं देखा कि टाईम ओवर हो गया है, कभी ओवर टाईम की मांग नहीं की, कभी वेतन-भत्तों और पे ग्रेड बढ़ाने या प्रोमोशन की लालच नहीं दिखाई, कभी जोब चार्ट के दायरों में रहकर काम करने की बात नहीं की, न कभी किसी गधा आयोग या गधा आरक्षण की मांग की, न गधा कल्याण योजनाओं की बात कही।

मतलब कि गधा होने का अर्थ सिर्फ यही समझा कि भगवान ने उन्हें बोझ ढोने और सब कुछ सहकर भी, अधमरे-मरे, भूखे-प्यासे रहकर भी काम ही काम करते रहने के लिए भेजा है।

भगवान की इच्छा का सम्मान करते हुए गधों ने भी मन से मान लिया कि वे काम करने के लिए ही पैदा हुए हैं चाहे उनका मालिक एक रहे या ढेर सारे मालिक बनते-बिगड़ते चले जाएं।

पिछली सदियों ने गधों ने तमाम तरह के मालिकों को देखा है, अपने मालिक के नौकर-चाकरों और परिचितों तक को मालिक ही माना है, लेकिन कभी गधा स्वतंत्रता की मांग नहीं की।  गधों से अपने मालिकों का श्वेत-श्याम इतिहास कहाँ छुपा हुआ है, गधे इन मालिकों की हर करतूत और हथकण्डों से वाकिफ हैं, अपने पर होते रहने वाले अत्याचारों और तमाम तरह के अन्याय से परिचित हैं मगर सब कुछ होने के बावजूद केवल इसलिए चुप रहते हैं क्योंकि ये गधे हैं और इन्हें गधा कहा जाता है।

और गधा होना अपने आप में ऎसा स्टेटस सिम्बोल है जहाँ चाहे कोई जुल्म ढहाए जाएं, चाहे जितना बोझ लाद दिया जाए, सिर नीचे कर मालिक के प्रति स्वामीभक्ति का परित्याग नहीं करना है। गधों को अच्छी तरह पता है कि वे जिनकी बजा रहे हैं उनमें मालिक होने के जरा भी लक्खण नहीं हैं, फिर भी गधे सबकी सुनते और मानते हैं।

गधों के इन्हीं विलक्षण गुणों और लक्षणों के कारण ही तो शीतलता और शांति की देवी शीतला मैया ने इन्हें वाहन के रूप में स्वीकारा है। और कोई देवी या देवता ऎसा नहीं था जो गधों की भारी-भरकर और अन्यतम महिमा से परिचित हो।

गधों को भी उनके लायक शान्त देवी का आशीर्वाद प्राप्त हो गया। पर इस बार तो गधों ने गजब ही ढा दिया है। पूरे संसार के गधों के लिए गधों का यह मौन संघर्ष गधा प्रजाति के लिए महा क्रान्ति सिद्ध हो गया है जहाँ गधों ने उन सभी को ऎसा सबक दिखा दिया है जो गधों की महिमा और कर्मयोग को दरकिनार कर गधों के लिए अनाप-शनाप बकवास करने के आदी हो गए थे, गधों की अस्मिता और परंपरागत गौरव का उपहास उड़ाने लगे थे।

गधों की मौन क्रान्ति ने ऎसा बदलाव ला दिया है कि अब आने वाली सदियों तक इसकी धमक रहेगी और कोई भी गधों के प्रति अपशब्द कहने या उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने की जुर्रत नहीं कर पाएगा।

जो लोग समझते रहे हैं कि गधे हैं, और गधे कुछ नहीं कर सकते, चाहे जितना दिन-रात काम लो, चाहे जितना बोझ का दबाव डालो, गधों के साथ कैसा भी बर्ताव कर लो, मगर वे कुछ नहीं कहेंगे, चुपचाप सुनते और काम करते रहेंगे।

मगर अब गधों का स्वाभिमान जग गया है, गधा प्रजाति को अपने गौरव और गर्व का अहसास हो गया है। अब गधे गधे नहीं रहने वाले, गधों के खिलाफ कहीं  भी कुछ होगा, गधे अब चुप बैठे रहने वाले नहीं, चुप रहने और सहने के दिन लद गए।

गधे मौन साधना क्रान्ति से आदमी को गधों से भी बदतर स्थिति में ले आने का सामथ्र्य पा चुके हैं। गधों की बेकद्री ने शीतला मैया को भी व्यथित कर दिया है और वे भी गधों को  पूरा आशीर्वाद देने में पीछे नहीं रही।

शीतला मैया ने अपने वाहन गधों की पूरी प्रजाति के स्वाभिमान को जगाने और बचाने में पूरी दैवीय शक्ति उण्डेलने में कोई कंजूसी नहीं की।

गधों की महाशक्ति का ऎसा अपूर्व उदय हुआ कि ऎरावत भी धराशायी हो गया और पहियों के चक्के भी जाम। जिन हाथों ने गधों के स्वाभिमान को रौंदने की कोशिशें की उनकी भाग्यरेखाएँ भी ऎसी मिट गई कि बिल्लोरी काँच से भी ढूँढे़ नहीं मिल पा रही।

गधों का श्राप ऎसा जबर्दस्त कहर बरपा देगा, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।  अति सर्वत्र वज्र्यते। गधों के श्राप ने कइयों की लुटिया डुबो दी है, अरमानों पर पानी फेर दिया है, बना बनाया खेल बिगाड़ दिया है और बहुत सारे ऎसे हैं जिन्हें राजा से रंक बना डाला है।

गधों के श्राप से अब हर कोई इतना अधिक भयभीत हो उठा है कि जो सीधे मुँह बात नहीं करते थे वे अब गधों की तरह ही सिर नीचा कर डर-डर कर चलने लगे हैं।

जो कुछ हो रहा था वह गधों की बर्दाश्तगी के बाहर हो चला था और इसीलिए गधों के धैर्य, सहनशीलता और सहिष्णुता के सारे बाँध टूट गए और इसकी चपेट में आकर वे सारे के सारे लोग बहकर चकनाचूर हो गए जिन्हें गधों के बारे में बकवास करते हुए गौरव और लोकप्रियता का अहसास हो रहा था। फूले नहीं समा रहे थे।

गधों को अपमानित करने वाली बात कोई एक कहता, फिर दूसरे सारे इसी तरह रेंक-रेंक कर तरह-तरह की बातें बना-बना कर गधों के स्वाभिमान और प्रतिष्ठा को रौंदते रहे।

गधों ने अपने अपमान का सारा बदला ले लिया है और दुनिया भर को यह चुनौती एवं चेतावनी दे डाली है -जो गधों की बात करेगा, वो मिट्टी में मिल जाएगा। शीतला मैया की कृपा और आशीर्वाद से आज का युग गधों के जागरण और मौन क्रान्ति के युग के रूप में जाना जाएगा। जो गधों से शापित होगा उसकी पूछ कोई नहीं करेगा।

अब यह साबित हो गया है कि गधे कुछ भी कर सकते हैं, यदि उन्हें छेड़ा जाए। अब गधे पुराने जमाने के गधे नहीं रहे, गधों ने नये और जागरुक दौर में प्रवेश कर लिया है। गधे अब किसी को बख्शने वाले नहीं, जो गधों के साथ बुरा बर्ताव करेगा, उसे मुँह की खानी पड़ेगी, गधों की तरह सारा वैभव छोड़ कर मिट्टी में लौटने को विवश होना पड़ेगा।

दुनिया भर के गधों ने भी भारत के गधों के रणकौशल और मौन क्रान्ति के दम-खम को स्वीकार कर लिया है। इस मामले में अब दुनिया के सत्ता-समर में गधों के दखल और परिवर्तन का सशक्त शंखनाद हो चुका है।

कोई आश्चर्य नहीं कि भारत के गधों से प्रेरणा पाकर विश्व भर के गधे नई दिशा और दृष्टि पा लें और युग परिवर्तन का आगाज न कर दें। गधे भी आदर-सम्मान के अधिकारी हैं, गधों के स्वाभिमान की रक्षा करें, उन्हें यथोचित सत्कार दें अन्यथा तैयार रहें, अब गधे कुछ भी कहर ढा सकने की स्थिति पा चुके हैं। गधों ने यह भी सिद्ध कर दिया है कि जो उनकी महिमा का गान करेगा, उनके स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा करेगा वही सत्ता के गुलाबजामुन का स्वाद पा सकेगा।

अब गधों का सम्मान मनोकामनापूर्ति का जरिया बन चला है। जो गधों की बात करेगा, वही दिलों पर राज करेगा। दुनिया भर के गधों के प्रति श्रद्धा और आदर भाव सहित।