दूर भगाएं टाईमपास फालतुओं को

दूर भगाएं टाईमपास फालतुओं को

हमारे जीवन भर का पचास से सत्तर फीसदी समय फालतू की चर्चाओं और बेकार के कामों में नष्ट होता है। इस समय का यदि हम सदुपयोग करना सीख जाएं तो दुनिया में नाम कमाने लायक बन सकते हैं लेकिन इसके लिए जीवन में बहुत तरह के संयम की जरूरत होती है जो सामान्य लोग रख नहीं पाते। और इसीलिए भीड़ का हिस्सा बनने वाले लोग कभी कोई यादगार काम या उपलब्धि हासिल नहीं कर पाते।

अपने आपको दूसरों से अलग पहचान देने के लिए बहुत से उन कामों, स्वभाव और व्यवहारों को छोड़ने की जरूरत होती है जो भीड़ में शामिल असंख्य लोगों की आदत में शुमार होता है।

बड़े-बुजुर्ग, धर्मग्रंथ, नीति शास्त्र और पुराणों से लेकर वेद और उपनिषद तक में यही वर्णित है कि अपनी मर्यादाओं को जानें, स्व कर्म के प्रति गंभीर रहें, स्तुतिगान और निन्दा के पाप से दूर रहें और उन सभी कर्मों को त्यागें जिनमें समय नष्ट होने के बाद पछतावा होता है।

दुनिया के वे सारे कर्म निन्दित माने गए हैं जिन्हें कर चुकने के बाद पश्चाताप होता है। और उन सभी कर्मों को अनुकरणीय माना गया है जिन्हें करने के बाद बार-बार करने की  इच्छा होती है। किन्तु इन कर्मों के अच्छे-बुुरे होने का निर्णय अपने दिमाग के स्तर पर नहीं बल्कि आत्मा के स्तर पर करने की जरूरत है। जिन कामों को हमारी आत्मा प्रसन्नतापूर्वक स्वीकारती है वे ही कर्म करने योग्य हैं तथा जिनके लिए आत्मा के स्तर पर पछतावे का अनुभव होता है, उन सभी प्रकार के कामों को तिलांजलि दी जानी चाहिए।

हम सभी को सर्वाघिक पछतावा समय को लेकर होता है। जो समय आज अपने पास है वह कल नहीं आने वाला। हमारे पास ही नहीं बल्कि उस बीते समय को कोई लौटा नहीं सकता। इसलिए आज के समय के महत्व को जानकर उसका उपयोग कर लेना ही बुद्धिमानी है अन्यथा जो लोग समय का मोल नहीं पहचानते वे लोग जीवन भर पछताते और दुःखी होते हैं।

इंसान की पूरी जिन्दगी में सबसे बड़ा दुःख कोई है तो वह यह है कि उसका कोई सा सोचा हुआ काम समय पर नहीं हो पाया और इसका मलाल मरते दम तक रहता है। एक आम इंसान की पूरी जिन्दगी में हजारों काम ऎसे होते हैं जिन्हें वह सोचता तो है लेकिन कर नहीं पाता और समय आगे से आगे निकलता चला जाता है।

इन्हीं कामों का बोझ इंसान पर इतना अधिक बढ़ जाता है कि उसके सामने दुनिया के चाहे सारे के सारे भोग-विलास और आनंद क्यों न परोस दिए जाएं, वह फीके ही रहते हैं और दिमाग उन सोचे हुए कामों के बोझ से मुक्त नहीं हो पाता, जो काम वह न तो आधे-अधूरे कर पाया होता है और न ही पूर्ण।

सांसारिक माया-मोह, संगी-साथियों/साथिनों का वाग् विलासी दौर और विवेकशून्यता का दावानल हमारे सामने इस कदर उछालें मारता रहता है कि हमें सूझ ही नहीं पड़ती कि क्या करें। सोचे हुए कामों को आकार दें या फिर गपियाते हुए बातों का आनंद पाएं।

बहुत सारे लोगों को जिन्दगी भर यही शिकायत रहती है कि वे चाहते तो हैं कि सोचे हुए सारे काम समय पर हों, लेकिन लोग इस कदर घेरे रहते हैं कि कोई काम नहीं हो पाता और दिन निकल जाता है।  दिन हो या रात, हर वक्त कोई न कोई पास में बना ही रहता है।

दुनिया में जितने सुनने वाले हैं उनसे सौ गुना बोलने और सुनाने वाले हैं। इन सुनाने वालों को हर क्षण उन लोगों की आतुरता से खोज और प्रतीक्षा बनी रहती है जो उनकी बातों को तसल्ली से सुनेें और हुंकारा भरते हुए शाबाशी देते रहें, चाहे उनकी बातें गले उतरने वाली न हों या झूठ से भरी हुई ही क्यों न हों।

सुनाने वालों में उग्र, निरंकुश, क्रोधी, नकारात्मक और धूर्त-मक्कार लोगों का ही बाहुल्य होता है क्योंकि ये ही वे लोग हैं जो एक जगह का कचरा उठाकर फ्राई करते हुए दूसरी जगह परोसते रहते हैं और उन्हें इसी कचरे की ब्राण्डिंग और परोसगारी में ही आनंद आता है।

जिस तरह  नशे के आदी, तलबदार, अप्राकृतिक मैथुनी या समलैंगिक लोग अपने दैहिक आनंद को पाने के लिए किसी न किसी की तलाश में लगे रहते हैं उसी तरह दुनिया भर के बकवास की परोसगारी करने वाले लोगों को भी उन धीर-गंभीर, सहनशील और तसल्ली से पूरा का पूरा सुनने वालों की तलाश बनी रहती है।

हमारी पूरी जिन्दगी का काफी सारा बेशकीमती समय इन टाईमपास लोगों की भेंट चढ़ जाता है। टाईमपास लोग इतने बेशर्म और लज्जाहीन होते हैं कि हमारे कीमती समय की हत्या में ही उन्हें आनंद आता है चाहे हमारे पास कामों का ढेर हो या फिर कितने ही जरूरी काम हमारे सामने क्यों न पड़े हों।

भीड़ का हिस्सा माने जाने वाले और फालतू लोगों में शामिल सारे के सारे टाईमपास लोग दुनिया के उन सभी लोगों के अघोषित शत्रु और हत्यारे हैं जो लोग मनस्वी और कर्मयोगी हैं तथा समाज, अपने क्षेत्र व देश के लिए जीना और कुछ नया करना चाहते हैं।

हममें से बहुत से लोग मिल जाएंगे जो उन लोगों से हैरान-परेशान हैं जो टाईमपास और फालतू हैं। बहुत से लोग इन्हें देखकर चिढ़ते और क्रोधित भी होते हैं किन्तु कुछ कर नहीं पाते, मन मसोस कर रह जाते हैं।

टाईमपास लोगों को समय देना या इन्हें बर्दाश्त करना देश के अमूल्य समय की बर्बादी है और इसे रोका जाना चाहिए। इसके लिए कुछ नुस्खों का इस्तेमाल किया जाए तो टाईमपासिया लोगों से मुक्ति पायी जा सकती है। जो इंसान अपने पास टाईमपास के लिए आए, खुद किसी न किसी काम में व्यस्त हो जाएं और उसे कुछ देर उपेक्षित कर रखने का स्वभाव पाल लें। समझदार होगा तो चला जाएगा अन्यथा भौन्दू की तरह बैठा रहेगा।

इस पर भी नहीं जाए तो उसे अपने काम में से कोई सा काम दे दें और सहयोग करने के लिए कहें। दो-चार बार ऎसा हो जाने के बाद वह लौट कर नहीं आएगा। यह धारणा बना लेगा कि फंस जाते हैं।

फिर भी बार-बार टाईमपास के लिए चक्कर काटता रहे तो उसे कोई ऎसा असाध्य और बड़ा काम बता दें जो उसके बूते में नहीं हो। बड़े लोगों से सीधे सम्पर्क की डींगे हाँकने वाले ये लोग काम करवा देने का भरोसा तो देेंगे मगर कर नहीं पाएंगे।  जैसे ही सामने आएं, उन्हें याद दिलाते रहो।

तंग होकर आने की बात ही भूल जाएगा और नहीं मिल पाने के बहानों का सहारा लेने लगेगा। और इससे भी न मानें तो सबसे बड़ा चमत्कारिक नुस्खा यह है कि उससे कुछ हजार या लाख रुपए जरूरी काम होने का बहाना बनाकर उधार मांग लें, इसके बाद शर्तिया तौर पर वह हमारे पास नहीं आएगा। हमसे दूर-दूर भागेगा।

यही नुस्खे उन लोगों के लिए आजमाएं जो वक्त-बेवक्त फोन पर समय की बर्बादी करते हैं।  टाईमपास करने वाले लोगों से जो अपना बचाव कर लेता है, दूरी बना लेता है, समय उसके सर्वथा अनुकूल व सहयोगी हो जाता है और कालजयी यश-कीर्ति और महा आनंद प्रदान करता है।