अमावास्या के अनुभूत प्रयोग –   आभामण्डल से हटाएं नकारात्मकता

अमावास्या के अनुभूत प्रयोग – आभामण्डल से हटाएं नकारात्मकता

लगातार लम्बे समय से शरीर भारी-भारी लग रहा हो, इच्छा होने के बावजूद काम में उत्साह न आ रहा हो, निराशा और निरुत्साह की स्थिति हो, बेवजह गुस्सा आता हो, किसी भी प्रकार की बीमारी या संकट का अहसास हो रहा हो तब यह उपाय कर लें।

इससे शरीर का भारीपन दूर हो जाएगा, रोग से मुक्ति मिलेगी और अपने कर्म के प्रति उत्साह बढ़ेगा, आनंद की अनुभूति होने लगेगी।

रोजाना ब्रह्ममुहूर्त में उठकर गौमूत्र का पान करें।

अमावास्या के दिन अपनी जितनी आयु है उतनी रोटियां अथवा बिस्किट अपने पूरे शरीर पर से उतार कर कुत्तों को खिला दें। शर्त यह है कि कुत्ते पूरी की पूरी रोटियाँ खा जाए, पड़ी न रहें।

अमावास्या के दिन मध्याह्न में अपने शरीर पर से पानी भरा नारियल सात बार उतार कर किसी बहती नदी में उछाल कर फेंक दें। पीछे मुड़ कर न देखें।

पानी वाला श्रीफल अपने शरीर से सात बार उतार कर धधकती अग्नि में डाल दें।

अमावास्या के दिन अपनी जितनी आयु है उतने ग्राम कीड़ीनगरा (सत्तू) अर्थात शुद्ध घी, आटा, शक्कर आदि मिलाकर चींटियों को डाल दें।

मकौड़ों वाले स्थान पर गुड़ डाल दें।

इन प्रयोगों से अचूक लाभ का अनुभव होने लगेगा।