वागड़ यात्रा : रामभरोसे हिन्दू होटल – दुर्लभ हो गया है यह नाम

आम तौर पर रामभरोसे हिन्दू होटल, शंकर विजय होटल जैसे नाम आजादी से पहले और कुछ दशक बाद तक प्रचलित रहे लेकिन अब ये नाम दुर्लभ हो गए हैं।

आरंभिक दौर में इन नामों से स्Ram Bharosen Hindu Hotel TS 170416 (4)थापित वाली होटलों में दीवारों पर देवी-देवताओं और मनोहारी प्राकृतिक दृश्यों वाली श्रृंखलाबद्ध सुन्दर सी फ्रेम में जड़ी तस्वीरें लगा करती थी । चाय आने तक लोग इन तस्वीरों का निहारते रहते थे। श्रद्धावान और प्रकृतिप्रेमियों सभी के लिए इन होटलों में बैठकर ईष्टमित्रों के साथ चाय-काफी और नमकीन का स्वाद लेना अपने आप में आनंददायी था। चाय भी मिलती तो पीतल के कप में, साथ में प्लेट, जिसे स्थानीय भाषा में रकाबी कहा जाता है। आज भी काफी लोगों को इसी में चाय पीने का मजा आता है। वागड़ अंचल के नाम से प्रसिद्ध बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में बहुत से घरों में यह परंपरा अब भी प्रचलित भी है।

अब तो होटलों के नामों में क्रांति आ गई है। दुनिया भर के नामों से होटलें हैं जिनमें अंग्रेजी कल्चर का प्रभाव भी कोई कम नहीं। पर अब रामभरोसे हिन्दू होटल नाम से इक्का-दुक्का होटलें ही दिखाई देती हैं। इसी नाम की एक होटल प्रRam Bharosen Hindu Hotel TS 170416 (1)सिद्ध देवी तीर्थ त्रिपुर सुन्दरी के बाहर लगी है। यह विश्वविख्यात तीर्थ बांसवाड़ा-अहमदाबाद मुख्य मार्ग पर जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर अवस्थित तलवाड़ा गांव से 5 किमी दूर है।

मन्दिर जाने के रास्ते पर ही बांयी ओर है रामभरोसे हिन्दू होटल। यहाँ चाय-नाश्ता भी आनंददायी है। होटल संचालक श्री राजेश उपाध्याय बताते हैं कि यह होटल उनके काका  श्री ईश्वरलाल उपाध्याय चलाते थे। वे अब नहीं रहे। राजेश के अनुसार ईश्वर काका ने अमिताभ बच्चन की फिल्म नसीब से प्रेरणा पाकर रामभरोसे होटल स्थापित की जो इसी नाम से चल रही है। नाम भले पुराने जमाने का लगता है लेकिन लोगों की श्रद्धा बरकरार है।

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे का एक फोटो भी होटल में लगा है जिसमें ईश्वर काका उनके सम्मान में पुष्पहार पहनाकर खड़े हैं।  पूरी होटल में लगे देवी-देवताओं के चित्रों से धार्मिक माहौल का दिग्दर्शन होता है।सामने की दीवार पर काफी लम्बी सर्प कांचली जड़ी हुई है। इस बारे में राजेश कहते हैं कि इससे धंधे में बरकत आती है। गुजरात में कई दुकानों पर साँप की कांचली लगी मिल जाएगी। ऎसा माना जाता है कि इससे पितर और नाग देवता खुश रहते हैं।  राकेश तलवाड़ा के ही रहने वाले हैं और देवी मैया के भक्त हैं। वे कहते हैं कि भगवान राम का भरोसा पा जाने के बाद जीवन निर्वाह की सारी जिम्मेदारी श्रीराम की है, और राम निभा रहे हैं।