सेहत संरक्षण सरोकारों का कमाल मेडिकल हब बन रहा राजस्थान

आम जन से लेकर प्रदेश भर की सेहत सँवारने की दिशा में राजस्थान सरकार की बहुद्देशीय योजनाएं वरदान साबित हो रही हैं। राज्य सरकार ने आम जन के कल्याण और सामाजिक सरोकारों के बखूबी निर्वहन की दिशा में ऎतिहासिक पहल करते हुए लोक स्वास्थ्य रक्षा के बहुआयामी संकल्पों को मूर्त रूप प्रदान करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में हर आदमी को लगने लगा है कि सरकार उसकी सेहत सँवारने के लिए पूर्ण निष्ठा और समर्पण भावना से जुटी हुई है।

राज्य में लोक स्वास्थ्य रक्षा के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से ढेरों योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो रहा है। इससे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्धियों और लोक सेवा के नित नए आयाम स्थापित हो रहे हैं।सरकार का लक्ष्य है कि हर प्रदेशवासी स्वस्थ हो। इसके लिए प्रदेश में करीब 17 हजार से अधिक उप स्वास्थ्य केंद्र से लेकर मेडिकल कॉलेज जैसे स्वास्थ्य संस्थान संचालित  हैं।  इस वर्ष चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 8 हजार 742 करोड़ का प्रावधान है।

गत दिसम्बर में शुरू की गई  ‘भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना‘  से अब तक 43 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हो चुके हैं।  इस योजना में विभिन्न बीमारियों के लिए 1 हजार 715 पैकेज स्वीकृत हैं। इसमें 850 राजकीय और निजी चिकित्सालयों को योजना से जोड़ा गया है। प्रदेश में  ‘आरोग्य राजस्थान‘ के अन्तर्गत 1 करोड़ 5 लाख ग्रामीण परिवारों का हैल्थ सर्वे कर इसकी ऑनलाइन एंट्री पूरी होने पर इसे ई-हैल्थ कार्ड से जोड़ा जाएगा।  ‘ई-हैल्थ कार्ड‘ को ‘भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना‘ से जोड़ा जाएगा।

गांवों में डॉक्टरों की कमी की शिकायत को देखते हुए सरकार हरसंभव प्रयासों में जुटी हुई है। डॉक्टरों के रिक्त पद भरने के साथ-साथ डॉक्टरों की रिटायरमेंट की आयु  अप्रैल, 2016 से 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष की गई है।  प्रदेश में एमबीबीएस की सीटों में 350 की वृद्धि की गई है। इस पर 420 करोड़ रुपये खर्च होंगे। राज्य में आयुर्वेद समेत अन्य चिकित्सा पद्धतियाें के विस्तार के लिए भी अनेक प्रावधान किए गए हैं।  इसी प्रकार राज्य में चिकित्सा की दृष्टि से अनेक नवाचार किए जा रहे हैं।  आज राजस्थान इस क्षेत्र में इतना आगे बढ़ चुका है कि लोग दूर-दूर से यहां इलाज कराने के लिये आ रहे हैं।

राजस्थान में मेडिकल टूरिज्म का विस्तार हो रहा है। आज प्रदेश में ब्रेन एंजियोप्लास्टी  भी होने लगी है जो अब तक सिर्फ दिल्ली, मुम्बई और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में ही हुआ करती थी।  इसके अलावा स्किन, हार्ट, लीवर, किडनी, बोन मेरो ट्रांसप्लान्ट इसके अलावा प्रदेश में स्कीन, हार्ट, लीवर, किडनी, बोन मेरो ट्रांसप्लान्ट  भी होने लगा है। यहां तक की जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल सहित निजी अस्पतालों में शव  से भी अंगों का ट्रांसप्लान्ट होने लगा है। इन सभी नवाचारों, सुविधाओं के विस्तार और अत्याधुनिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रणालियों की उपलब्धता को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अब राजस्थान मेडिकल हब बन गया है और चिकित्सा की दृष्टि से देश का आदर्श राज्य बनता जा रहा है।

राज्य में 7 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हैं, जिनमें से 6 नए मेडिकल कॉलेजों (चूरू, डूंगरपुर, भीलवाड़ा, बाड़मेर, भरतपुर और पाली) की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। प्रदेश सरकार द्वारा लोक स्वास्थ्य सेवाओं के विकास तथा विस्तार की दिशा में अनथक प्रयास जारी हैं जिनकी बदौलत ये सेवाएं आम जन तक पहुंच बना रही हैं।