वागड़ अंचल को गर्व है नवाचारी सृजनधर्मी शिक्षिका ऊषा पण्ड्या पर …

वागड़ अंचल को गर्व है नवाचारी सृजनधर्मी शिक्षिका ऊषा पण्ड्या पर …

सुनहरा भाग्य लिखती है हर लकीर …

लकीरों का कमाल अपने आप में इतना अधिक करामाती और तिलस्मी होता है कि यह अक्षर ब्रह्म की आराधना का आरंभिक चरण है।

बांसवाड़ा जिले की होनहार शिक्षिका श्रीमती ऊषा पण्ड्या ने अपने मौलिक हुनर के बूते जिस तरह लकीरों से अक्षरों और वर्णों की दुनिया को नवीन आयाम दिए हैं, यह अपने आप में वागड़ अंचल की रचनाधर्मिता और शिक्षा के प्रति वास्तविक व दिली लगाव का दिग्दर्शन कराता है।

समाज-जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में विस्फोटक भीड़ है जो लकीर की फकीर बनी रहकर उन्हीं परंपराओं और धाराओं में तिनकों की तरह साथ-साथ बहती रहती है लेकिन कुछ बिरले ही होते हैं जो शिक्षा जगत में नवाचारों के माध्यम से अपने क्षेत्र के नौनिहालों के सुनहरे भविष्य को आकार देने के लिए जी जान से निष्काम भाव से प्रयास करते रहते हैं।

श्रीमती ऊषा पण्ड्या इन्हीं विलक्षण और अन्यतम व्यक्तित्वों में शुमार हैं जिन्होंने अपने बूते कुछ नया करने की ठान रखी है और कुछ-कुछ दिनों में उनकी सृजनधर्मिता हमारे सामने आती रहकर सुकून भरी अलख जगाती रहती है।

शिक्षा जगत में कुछ भी नवाचारी प्रयोग अथवा कोई सा नवीन एवं अन्यतम कार्य करना कितना अधिक मुश्किल और प्रहारों से भरा हुआ है इसे बताने की जरूरत नहीं है। हर नवाचार अपने  से नीचे व ऊपर वालों, साथ वालों, आस-पास वालों और सभी प्रकार के सम्पर्कितों के असली चरित्र और मन-मस्तिष्क में छिपे रहस्यों को उद्घाटित करने वाला होता है और इन्हीं अनुभवों से शुरू होता है श्रेष्ठ कर्म।

कई प्रकार की चुनौतियां अपने आप आ जाती हैं और कई सारे बिजूकाधर्मी और उदासीनगिरोही लोग अच्छे कामों के क्रियान्वयन के दौरान चुनौतियों के रूप में सामने आते रहते हैं।

इन सभी के बावजूद चट्टानी व्यक्तित्व की धनी श्रीमती पण्ड्या द्वारा किए जा रहे निरन्तर प्रयास स्तुत्य हैं और इनकी जितनी अधिक सराहना की जाए, वह कम है।

शिक्षक वह होता है जो  श्रेष्ठ कर्म से अपने होने और सबसे अलग होने का अहसास कराता हुआ तालीम की चहारदीवारी में वो धूम मचाता है कि जिसकी गतिविधियां दूर-दूर के पहाड़ों तक को प्रतिध्वनित करने को विवश होना पड़ता है।

हम सभी उनके प्रयासों की आशातीत सफलता के लिए कामना करते हैं और यह भरोसा है कि अंधेरों के बीच ऊषा की यह किरण किसी दिन सुनहरे सूरज के निकलने का शंखनाद करने वाली सिद्ध होगी।

समय अच्छा आ रहा है, अंधेरा छंटने की प्रतीक्षा शुरू हो चुकी है। काले और घने बादलों को उड़ा कर ध्रुवों की ओर ले जाने की तैयारी हवाओं ने कर ली है और अंधेरों की सियासत का गुणगान करने वालों की शामत भी समझो अब करीब आ ही चुकी है।

हजारों-लाखों की भीड़ में एक शिक्षिका का यह छोटा सा किन्तु बहुत बड़े भविष्य की रचना करने वाला यह प्रयास अपने आप में गौरव और गर्व का भान कराने वाला है।