महाराणा प्रताप का वैश्विक गौरवगान करेगा प्रताप गौरव केन्द्र

महाराणा प्रताप का वैश्विक गौरवगान करेगा प्रताप गौरव केन्द्र

 प्रातः स्मरणीय वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के अलौकिक व्यक्तित्व और शौर्य-पराक्रम की जाने कितनी गाथाओं से भरपूर ऎतिहासिक कर्मयोग से देश-दुनिया को परिचित कराने की दिशा में मेवाड़ के लिए एक नए युग का उदय होने जा रहा है जब राष्ट्रीय तीर्थ प्रताप गौरव केन्द्र का 28 नवम्बर 2016, सोमवार को लोकार्पण होने जा रहा है। राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे सहित कई मंत्रियों और हस्तियों की मौजूदगी में आरएसएस के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत इसका लोकार्पण करेंगे।

 

समूची दुनियाdscn5089 के लिए उदयपुर का प्रताप गौरव केन्द्र कई मामलों में अद्वितीय है। भारतीय सभ्यता, संस्कृति, शौर्य परंपराओं, पराक्रमी इतिहास और विभूतियों के त्याग-तपस्या और बलिदान की गाथाओं का स्मरण करने वाला यह केन्द्र राष्ट्रीय पुनर्जागरण की दिशा मेंं अहम् भूमिका निभाएगा।

संसार भर के लोगों के लिए दुनिया में यह अद्वितीय और अलौकिक केन्द्र है जहाँ वह सब कुछ है जिसकी झलक पाकर हर कोई राष्ट्रभक्ति के ज्वार में नहाने का अनुभव करता हुआ देश के लिए जीने और सर्वस्व बलिदान करने की भावना को आत्मसात करने के दृढ़ संकल्पों को मूर्त रूप देने को उद्यत हो उठता है।

प्रताप गौरव केन्द्र का प्रथम चरण का कार्य पूर्ण हो गया है। इसे 9 दिसम्बर, 2016 को दर्शकों के लिए सुलभ करा दिया जायेगा। प्रताप गौरव केन्द्र को देखने में 2 से 3 घन्टे dscn5085का समय लगेगा। यहां हल्दीघाटी युद्ध पर एक विजय दीर्घा, महाराणा प्रताप के जीवन पर चित्र प्रदर्शनी, मेवाड़ के महापुरुषों के जीवन पर मेवाड़ रत्न दीर्घा, मेवाड़ के प्रेरक प्रसंगों पर आधारित एक डाक्यूमेन्ट्री फिल्म देखने को उपलब्ध रहेगी।

दर्शकों को भारत के प्रति भक्ति का भाव पैदा हो, इस दृष्टि से राजस्थान दीर्घा एवं भारत दर्शन पर लाइट एण्ड साउंड शो की रचना  की गई है। प्रताप गौरव केन्द्र का विशेष आर्कषण मेवाड़ के महापुरुषों के जीवन पर लाईव मेकेनिकल दीर्घा बनाई गई है जिसमें 45 मिनिट में 9 दीर्घाओं dscn5092के माध्यम से रोमांचक कर देने वाली घटनाएं देखने व सुनने  को मिलेगी।

महाराणा प्रताप की 57 फीट विश्व की सबसे ऊँची मूर्ति अष्टधातु से निर्मित की गई है तथा भारत माता का भी भव्य मंदिर बनाया गया है जिसमें 12 फीट ऊंची अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित की गई है। पूरे परिसर में चेतक, मीरांबाई, पन्नाधाय आदि 500 प्रतिमाएं धातु व फाइबर से निर्मित कर लागई गई हैं। 25000 हजार गमलों से परिसर को सुसज्जित किया गया है। एक जलाशय और प्रताप चरणों से निकलता जलप्रताप (वॉटर फॅाल) देखते ही बनता है। केन्द्र में 500 लोगों के बैठने की क्षमता वाला फिल्म थियेटर भी बनकर तैयार है।

राष्ट्रीय भावनाओं के उद्दीपन की दृष्टि से यह राष्ट्रीय तीर्थ महाराणा प्रताप, मेवाड़ व भारत के इतिहास को आधुनिक माध्यमों से प्रदर्शित कर अपने उद्देश्य को पूर्ण करेगा। आम नागरिक 9 दिसम्बर, 2016 से इसके अवलोकनार्थ आ सकेंगे। (– डॉ. दीपक आचार्य, उदयपुर)