poem – वाह-वाह

आकर्षक नेम प्लेट लगी बेशकीमती गाड़ियां थी

लाल-पीली-नीली बत्तियाँ भी जल रही थीं

बड़ी शिद्दत से देखा भीतर तो दंग रह गया

इंसान की बजाय भेड़ियों का अक्स नज़र आया।