व्यक्तित्व विकास का अर्थ किताबी ज्ञान नहीं

आजकल नई पीढ़ी केवल किताबी ज्ञान के सहारे जिन्दा है जहां किताबों के संसार में ही जीना है, रट्टू परंपरा का निर्वाह ही करना है। ऎसी विद्या किस काम की जो जीवन व्यवहार और जगत व्यवहार की बजाय केवल किताबों के कबाड़ से बांधे रखे।