MOST IMP TIPS : यों करें सोशल मीडिया का कबाड़ा

फेसबुक, व्हाट्सएपव हो या और कोई सा ग्रुप। हर ग्रुप किसी न किसी विशेष उद्देश्य से बनता है अन्यथा ग्रुप बनाने की जरूरत ही क्यों पड़ती। लोग ग्रुप बना डालते हैं लेकिन ज्यादा चल नहीं पाते, थोड़े दिनों बाद लोग बोर होकर छोड़ देते हैं।  इस तरह किसी भी ग्रुप को खत्म किया जा सकता है। जो ग्रुप जिस किसी ... Read More »

भगवान को नहीं चाहिए पैसा

ईश्वर सर्वोपरि सत्ता है जिसकी कृपा से दृष्टि से लेकर सृष्टि तक का अस्तित्व है। ईश्वरीय सत्ता में प्रगाढ़ विश्वास करने वाले लोग इसे अच्छी तरह समझते हैं जबकि बाहरी मन से ईश्वर की बात करने वाले कई जन्मों में भी समझ पाने लायक नहीं हो पाते। अपने सुख-दुःखों और ऎषणाओं से भगवान का कोई संबंध नहीं है बल्कि इनका ... Read More »

कृतघ्न नहीं, कृतज्ञ बनें , यूज़ एण्ड थ्रो की आदत छोंड़ें

हमेशा मस्त रहने के लिए दो बातों का होना सर्वाधिक जरूरी है। जीवन व्यवहार को सुन्दर बनाने के लिए कृतघ्नता का परित्याग करें और कृतज्ञता अभिव्यक्त करना अपनी आदत में ढाल लें। इन दो बातों को अपनाने मात्र से व्यक्तित्व में ताजगी भरी वह गंध आ जाती है कि हर कोई अपना होने को चाहता है। सभी को इन मानवीय ... Read More »

जरा परखें उन लोगों को जो पाँव छूने के आदी हैं

पाँव छूने वालों की भी अजीब किस्में हैं। एक प्रजाति ऎसी भी है जो जिन्दगी भर पाँव छू छूकर अपने काम निकलवाते रहते हैं, अपने स्वार्थ पूरे करते रहते हैं और दूसरों को खुश करते रहते हैं। Read More »

अभिशप्त रहते हैं पुस्तक चोर

जो वस्तु अपने परिश्रम और कमायी से प्राप्त नहीं है उसे प्राप्त कर लेना अपने आप में चोरी है और यह चोरी जीवन भर हमारा पीछा नहीं छोड़ती। रोजाना कई-कई बार हमें अपनी इस चोरी के पाप कर्म की याद आती है, और हमारा आत्मविश्वास छलनी होता रहता है। संसार में जिस की जरूरत हो उसे मांग कर ली जाए ... Read More »

आलोकित करें अन्तस

संसार में आने के बाद इंसान की पूरी जिन्दगी दुनिया को देखने, जानने और समझने में लग जाती है और पूरी जिंदगी यही सब करने के बावजूद पूरी दुनिया का एकाध फीसदी से भी कम ही आनंद या उपभोग पा सकता है। मनुष्यों में मुण्डे-मुण्डे मतिर्भिन्ना वाली स्थिति होती है। कुछ लोग पूरी दुनिया के बारे में खबर रखना चाहते ... Read More »

गायत्री साधना को समर्पित दिव्य साधक ः बण्डू महाराज

शैव, शाक्त और वैष्णव उपासना धाराओं के साथ ही वैदिक परम्पराओं और प्राच्यविद्याओं का गढ़ रहा राजस्थान का दक्षिणांचलीय जिला बांसवाड़ा धर्म-कर्म के क्षेत्र में पूरे भारतवर्ष में अनूठा स्थान रखता है। पुरातन काल में ऋषि-मुनियों और सिद्ध संतों की तपस्या से अनुप्राणित इस अंचल में प्राचीन काल से संत-महात्माओं और महन्तों की लम्बी श्रृंखला विद्यमान रही है। हिन्दुस्तान का ... Read More »

लोक सेवा की मुरली बजा रहे हैं निष्काम कर्मयोगी 89 वर्षीय युवा पं. मुरलीधर भट्ट

रत्नगर्भा वसुन्धरा बांसवाड़ा आदिकाल से रत्नों को जन्म देती हुई अंचल को धन्य करती रही है। माही, मैया और प्रकृति के इस आँगन में समाज-जीवन के हर क्षेत्र में एक से बढ़कर एक विभूतियों ने अपने कर्मयोग की छाप छोड़ी है। बांसवाड़ा की इस अखूट और अजस्र परम्परा में आज भी कई हस्ताक्षर ऎसे हैं जो समाज को रोशनी देने ... Read More »

न खाएं ऎसा कुछ …

ऎसी कुछ भी खाद्य सामग्री ग्रहण न करें जो किसी की तुली हुई हो। इससे अपना नुकसान होता है। बहुत से शातिर लोग हैं जो अपने पापों और बीमारियों के निवारण के लिए ऎसे प्रयोग करते-करवाते रहते हैं। Read More »

ईश्वरीय वरदान है बेबाक अभिव्यक्ति

किसी भी क्रिया-प्रतिक्रिया, वाणी, स्वभाव या व्यवहार की परिपूर्ण शुद्धता तभी प्रकट हो सकती है जबकि वह पूरी तरह मौलिक हो। हृदय से निकली कोई सी बात यदि सीधी होंठों से बाहर निकलेगी तो वह मौलिकता लिए हुए और शत-प्रतिशत शुद्ध होगी तो ही उसका प्रभाव जगत पर पड़ेगा। हृदय से निकले विचार यदि मस्तिष्क के गलियारों से होकर बाहर ... Read More »