उपयोगी बनाएं इस भीड़ को

मजमा लगाना और मजमा लगाकर बैठना, तमाशा बनना और तमाशा बनाना-दिखाना आदमी की फितरत में शुमार हो चला है। हमारे यहां गली-कूंचों से लेकर महानगरों तक सर्कलों, रास्तों, चौराहों, तिराहों, डेरों, पाटों और सहज उपलब्ध सभी स्थानों पर बुद्धिजीवियों, अति-बुद्धिजीवियों, महा-बुद्धिजीवियों, चिन्तकों और विचारकों की विभिन्न श्रेणियां विद्यमान हैं जिनका एकसूत्री एजेण्डा जिन्दगी  भर चर्चाओं में रमे रहना ही है ... Read More »

मंगतों को नहीं, जरूरतमन्दों को दें

पूरा संसार लेन-देन पर टिका हुआ है। यों कहा जाए कि सृष्टि में जन्म का आधार ही पूर्वजन्म के हिसाब-किताब का परिणाम है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। संसार चक्र में जो फंसा हुआ है उसके लिए लेना-देना जीवन भर का ऎसा क्रम बना हुआ है कि उससे कोई बच नहीं सकता। राजा और रंक-फकीर, सभी को एक-दूसरों से काम ... Read More »

ऎसे लोग मरते हैं कुत्तों की मौत

हमारे जीवन में माता-पिता, गुरु और ईश्वर के बाद उन सभी लोगों और संस्थाओं के प्रति श्रद्धा और आदर-सम्मान का भाव होना जरूरी है जो हमारे लिए रोजी-रोटी का प्रबन्ध करते हैं। चाहे वह कोई आश्रयदाता, सेठ, मालिक हो या फिर सरकारी, अद्र्ध सरकारी या निजी संस्थान, विभाग अथवा कार्यालय। इन सभी के प्रति आत्मीय निष्ठा, वफादारी और इनसे जुड़ी ... Read More »

बोलें कम, लिखें ज्यादा

जो बोला जाता है उसे वर्तमान पीढ़ी का मात्र एक से पाँच फीसदी हिस्सा ही सुन पाता है और इनमें भी अस्सी फीसदी बातें भुला दी जाती हैं अथवा भूल जाते हैं। या फिर अपने काम ही नहीं होने की वजह से हम लोग उस पर कान नहीं धरते, बिना सुने ही सर हिलाते रहते हैं या हाँ जी- हाँ ... Read More »

वसुधैव कुटुम्बकम् …

स्पिरिट ऑफ इण्डिया रन के अन्तर्गत कन्याकुमारी से श्रीनगर तक दौड़ लगा रहे आस्ट्रेलिया के सांसद एवं पूर्व मंत्री, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मशहूर धावक श्री पेट फार्मर एवं उनकी पत्नी तान्या के साथ उदयपुर की होटल शिकारबाड़ी में यादगार मुलाकात Read More »

गौदुग्ध का ही प्रयोग होना चाहिए …

वे सारे शिवभक्त ढोंगी, पाखण्डी और धूर्त हैं जो गौमाता के दूध की बजाय दूसरे पशुओं के और कृत्रिम दूध से शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं। शिवलिंग और दैवप्रतिमाओं पर केवल और केवल गौदुग्ध का ही प्रयोग धर्म सम्मत है। हमारे देश के लोभी-लालची और धुतारे बाबाओं, महंतों और पण्डितों की यह कमी रही है जो कि जनता को धर्म और ... Read More »

आनंद से ईश्वर या ईश्वर से ही आनंद

अपना लक्ष्य ईश्वर और वैभवशाली जीवन है। उसकी तरफ ध्यान दो। बाकी सब रास्ता भटकाने वाले हैं । जो भक्ति, कर्म और ज्ञान तथा ईश्वर की ओर बढने के मार्ग को बाधित करता है वह मित्र, प्रेमी और आनंद देने वाला होकर भी हमारा परम शत्रु है। यह सत्य ही है। कोई हमें पकड़ता नहीं है। हम ही हैं जो ... Read More »

यह न करें …

हथेली एवं नोट पर कुछ न लिखें। न अपना नाम लिखें न रेखाएं खींचे] न और कुछ भी इससे सौभाग्य में कमी आती है। Read More »

जनहित में विनम्र सुझाव …

शौक से जलाओ पुतले …पर सामूहिक भोज भी तो करो … जो लोग आए दिन देश में किसी न किसी मुद्दे को लेकर किसी न किसी का पुतला फूंकते रहते हैं। उन्हें चाहिए कि उत्तरक्रियाओं में भी कंजूसी नहीं बरतें। पुतला फूंकने के बाद सभी उत्तर क्रियाएं भी की जानी चाहिएं। ऎसा न करने से अनिष्ट होता है। जो पुतला ... Read More »