यूज करो और भूल जाओ

हर इंसान काम का है। कोई अच्छे काम में मददगार हो सकता है तो कोई बुरे काम में।  हर फसल के साथ हर तरह की खरपतवार भी होती है और हर उद्यान में सुगंधित पुष्पों के साथ निर्गन्ध वनस्पति भी होती है। इन सभी का अपना कोई न कोई उपयोग होता ही है। आजकल इंसान में इतनी अधिक और अतिरिक्त ... Read More »

यहीं हैं जो करते हैं असली सेवा

कुछ सेवाएं ऎसी हैं जिनके बारे में कहा जा सकता है कि वाकई वे ही लोग हैं जिनके भरोसे क्षेत्र, समाज और देश चल रहा है और वे न होते तो परिवेश का कोई सा आयोजन न तो सफल हो सकता है न ही शान्तिपूर्ण ढंग से सम्पन्न। सेवाओं के मामले में सब तरफ किसम-किसम के लोग व्याप्त हैं। इनमें ... Read More »

आगे बढ़ें, मगर अपने बूते

आगे बढ़ने और दुनिया का सारा वैभव, प्रतिष्ठा और भोग-विलास पा जाने की चाहत हर इंसान में होती है। यह मनुष्य की स्वाभाविक वृत्ति है और गिनती के लोगों को छोड़ दिया जाए तो सभी यही चाहते हैं कि दुनिया का सारा सुख उनकी झोली में आ जाए और भौतिक सम्पदाओं का पूरा का पूरा उनके नाम होकर उन्हीं के ... Read More »

दुर्लभ हो गई है निश्छल मुस्कान

सब कुछ हाजिर होने लगा है सिवाय मुस्कान के। और वह मुस्कान भी निश्छल। छलिया और चतुराई भरी कुटिल मुस्कान हर कोई प्रदर्शित कर सकता है लेकिन बिना किसी छल-कपट के मौलिक मुस्कान के दर्शन आजकल दुर्लभ हो गए हैं। अधिकांश चेहर या तो मुस्कुराहट भूल गए हैं या फिर माहों और बरसों से उनके चेहरों पर मुस्कान तैराने लायक ... Read More »

सम्बल दें सृजन धाराओं को

जो जहाँ रहकर अच्छा काम कर रहा है उसे सहयोग करना ही पुण्य है और उसके मार्ग में बाधाएं खड़ी करना अथवा बाधक या स्पीड़ ब्रेकर की भूमिका में रहकर टाँग अड़ाना ही सबसे बड़ा पाप है। वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में लोग अपने ही अपने में जीने के आदी हैं और इस वजह से वे लोग सामाजिक और क्षेत्रीय, सामुदायिक ... Read More »

शुभचिन्तक बढ़ाएँ, अमंगलदर्शी नहीं

जीवन की सम्पूर्ण सुख-समृद्धि और शान्ति का मूलाधार है अपने प्रति लोगों की सद् भावनाएं। जिन लोगों के प्रति अपने सहकर्मियों, घर-परिवार और पड़ोस वालों, अपने क्षेत्र और समुदाय वालों तथा जानने वालों की अच्छी और सकारात्मक भावनाएं होती हैं वे लोग जीवन के हर क्षेत्र में सफलता, यश और कीर्ति का वरण करते हैं। इन लोगों द्वारा जो भी ... Read More »

इंसानियत अपनाएँ खुशहाली लाएँ

धरती पर मनुष्य के आकार-प्रकार में पैदा हो गए हर इन्सान का फर्ज है कि वह इंसानियत से जीना सीखे और जिन्दगी भर इंसान की तरह व्यवहार करे। केवल इंसानियत के आ जाने मात्र से आदमी में वह सारे गुण आ जाते हैं जिनकी वजह से वह पूजने लायक हो जाता है और हर कोई उसकी इज्जत करता है। आदमी ... Read More »

जीवन यथार्थ

अब तो सच में लगने लगा है – राम से बड़ा राम का नाम, गांधी से बड़ा गांधी छाप का काम महात्मा गांधी की जय Read More »

समर्थ स्वामिनी है स्त्री

अक्सर सवाल उठते रहते हैं कि स्ति्रयों को तरह-तरह की पूजा के अधिकार हैं या नहीं। कई जगहों पर स्ति्रयों पर वर्जनाएं बांध दी गई हैं और उन्हें मुख्य धारा से पृथक रखा गया है। पौरुषी मानसिकता और पोंगापंथी परंपराओं ने स्ति्रयों के अधिकारों में बिना सोचे-समझे कटौतियां कर डाली हैं। जबकि ऎसा है नहीं। वेद-पुराण और हमारी साधना परंपराओं ... Read More »

प्रसन्नता से स्वीकारें आभासी दण्ड

जीवात्मा के प्रत्येक कर्म का शुभाशुभ फल सृजित होता है और उसे किसी न किसी जन्म में भोगना ही पड़ता है। कोई चाहे या न चाहे, हर कर्म का प्रतिफल भोगना अवश्यम्भावी है और इससे कोई नहीं बच सकता।  किसी भी जन्म की खराब कर्मों के फलस्वरूप प्राप्त होने वाली प्रतिकूलताओं को जो ईश्वरीय प्रसाद मानकर सहजता, सरलता और विनम्रतापूर्वक ... Read More »