शोषक नहीं, मददगार बनें

हमारे आस-पास जो लोग होते हैं उनमें से अधिकांश जरूरतमन्द होते हैं और उनकी जरूरतों के बारे में संवेदनशील रहना तथा उनकी खुशहाली व समृद्धि में हिस्सेदारी निभाना हमारा फर्ज है। जो इस फर्ज को जितनी अच्छी तरह निभाता है उतना उसके साथ वाले उससे प्रसन्न और सन्तुष्ट रहते हैं। जो इंसान अपने आस-पास और साथ वालों के सुख-दुःख और ... Read More »

न राजधरम, न राम धरम

देश की सबसे बड़ी समस्या एकमात्र यही है कि हमें जो काम करना चाहिए उसे हम न तो फर्ज मानते हैं और न ईमानदारी से करते हैं और दूसरी तरफ उन सारे कमों-कुकर्मों में पूरी दिलचस्पी लेते हैं जो  हमें नहीं करने चाहिए। कर्म, कर्महीनता और कुकर्म इन तीनों के बीच की खायी इतनी अधिक बढ़ती जा रही है कि ... Read More »

श्री अपनाएं

लोग धन-सम्पदा और संसार भर का पूरा का पूरा ऎश्वर्य पाने को तो उतावले रहते हैं लेकिन इसे पाने के लिए जिन रास्तों से होकर चलना चाहिए, उन्हें भुला दिया करते हैं। प्राचीनकाल से श्री प्राप्ति के द्वार खोलने वाला पासवर्ड रहा है श्री।  लेकिन अपनी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं के प्रति आत्महीनता रखने वाले मूर्खों, पाश्चात्यों के तलवे चाटने ... Read More »

खर-दूषणी खरपतवार

संसार ढेरों विचित्रताओं से भरा है। अपने आप में यह संसार वह बहुत बड़ा कड़ाह है जिसमें दुःख, विषाद, तनाव, रोग, समस्याएं, अभाव और विपदाएं हैं और कोई प्राणी ऎसा नहीं है जो कि इन कारकों से प्रभावित न हो। अभावों और समस्याओं से भी ज्यादा लोग बेवजह पैदा हो जाने वाली शत्रुओं की फसलों से दुःखी है। यह फसलें ... Read More »

जब अकबर बादशाह को हुआ अचम्भा ….

शहंशाहे हिन्द अकबर बादशाह के आज हरम में आने से पहले किसी ने कोई चेतावनी नहीं दी। बादशाह खासे नाराज हुए। गुस्से से तरबतर हो पूछ ही लिया – आज कोई आवाज नहीं पड़ी, कैसे पता चलेगा हरम में। सिपहसालार ने अदब से कहा – हुजूर अब आवाज लगाकर चेतावनी देने की जरूरत नहीं है।  बेगमों, रण्डियों और रक्काशाओं के ... Read More »

शान्ति से सुनें आत्मा की आवाज

हर जीवात्मा के जीवन में आने वाले परिवर्तन के बारे में परमात्मा कोई न कोई संकेत देता ही है। माना जाता है कि ईश्वर की ओर से हरेक घटना-दुर्घटना, चाहे-अनचाहे काम और आकस्मिक परिवर्तन को लेकर तीन बार किसी न किसी रूप में पूर्वाभास कराता ही है। इसे ही आत्मा की आवाज कहते हैं। जो लोग स्थिर चित्त, शांत, धीर-गंभीर ... Read More »

आगे बढ़ें अपनी काबिलियत से, औरों की निन्दा के सहारे नहीं

आगे बढ़ना हम सभी चाहते हैं। अनपढ़ हो या पढ़ा-लिखा, हुनरमन्द हो या ढपोड़शंख, सभी के भीतर महत्वाकांक्षा से लेकर उच्चाकांक्षाओं का ज्वार हर क्षण लहराता रहता है।  कुछेक ही होंगे तो स्थितप्रज्ञ और आत्म आनंद से भरे-पूरे होने की वजह से मस्त, शान्त और अपने ही हाल में जीने वाले हों,  अन्यथा संसार में हर तरफ प्रतिस्पर्धा, कुछ न ... Read More »

फक्कड़ी का दूसरा नाम – वागड़ विभूति दिनेश दादा बादशाह

दक्षताओं और हुनर के बावजूद कठोर जिन्दगी के ढेरों पड़ावों से होकर जो कोई तप कर निकलता है उसी के साथ  ज्ञान, अनुभवों और व्यवहारिक जीवन के सारभूत तत्वों का मिश्रण व्यक्तित्व में ऎसा निखार ला देता है कि फिर इंसान को न किसी से भय होता है, न अपेक्षा या उपेक्षा का भाव। हर मामले में बिन्दासगी, मुखर अभिव्यक्ति ... Read More »

कब तक पालते रहें भीखमंगों और कामचोरों को

आखिर कब तक पालते रहें उनको जो किसी काम-काज के नहीं हैं।  जो कार्यस्थलों के लिए नाकारा हैं उनके लिए घर वाले भी यही कहते हैं कि घर के लिए भी इनका कोई उपयोग नहीं। जो लाभ जहाँ से मिल सकता है, मिल रहा है उसमें कहीं कोई कमी नहीं आए, ऊपर से जो कुछ अतिरिक्त मिल जाए, उसके लिए ... Read More »

गाँधी-शास्त्री को समझें, जीवन में उतारें

महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री दोनों भारतवर्ष के वे रत्न थे जिनके जीवन को सीखने, समझने और आत्मसात करने की आवश्यकता है। भारत को स्वाधीनता दिलाने से लेकर विकास की बुनियाद रचने में दोनों ही महापुरुषों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। किसी एक को अधिक और दूसरे को कम नहीं आंका जा सकता।  न ही दोनों में भेददृष्टि रखी ... Read More »