झकझोर डालें सूक्ष्म जगत को

आज की सबसे बड़ी समस्या यही है कि कोई कुछ बोलना या करना नहीं चाहता। सारे के सारे मूक-दर्शक होकर चुप्पी साधे हुए देखने-सुनने के आदी हो गए हैं या फिर तमाशबीन। जो तमाशबीन हैं वे तमाशा पैदा करने के लिए दिन-रात कुछ न कुछ षड़यंत्र, खुराफात और धमाल रचने के ताने-बाने बुनते रहते हैं और दूर रहकर तमाशा देखने ... Read More »

कुत्ते भी शरमाते हैं इन्हें देखकर

अभिव्यक्ति और संवाद हर प्राणी चाहता है क्योंकि यह उसका जन्मजात नैसर्गिक गुण है। संवाद और अभिव्यक्ति के प्रकार और माध्यम कई तरह के हो सकते हैं किन्तु बिना अभिव्यक्ति के कोई रह नहीं पाता। इसी तरह जिनसे हमारा किसी न किसी रूप में संबंध जुड़ा होता है उनसे सीधा संवाद कायम करना और पारस्परिक ज्ञान एवं अनुभवों का आदान-प्रदान ... Read More »

क्षमा नहीं, संहार करें

क्षमा करने का समय अब नहीं रहा। क्षमा का उपयोग उसी जमाने के लिए ही उपयुक्त था जब लोग नीति-धर्म और सत्य पर चला करते थे और सच्चे और अच्छे लोग बहुतायत में हुआ करते थे। उन दिनों दण्ड का प्रावधान आज की अपेक्षा सौ गुना अधिक था इसलिए दुष्टों और पापियों पर प्रभावी अंकुश था। फिर भी दयावान और ... Read More »

गायब हो रहा है निष्काम सेवा भाव

सेवा का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है। भगवान की सेवा-पूजा करना हर जीवात्मा को आनंद देता है। धर्म-अध्यात्म में कई मत-सम्प्रदाय हैं जिनमें विभिन्न प्रकार की सेवा और नवधा भक्ति का अवलम्बन होता है। सेवा के मामले में आजकल इन्सानों को कई सारे खेमों में बाँटकर देखा जा सकता है।  जहाँ सेवा शब्द आ जाता है वहाँ सब कुछ अपेक्षाओं से ... Read More »

यह है असली आस्था

धर्म के प्रति आस्थाओं में भी भेद है। एक तरफ वे लोग हैं जो धर्म के नाम पर पैसा बनाने, लोगों को उल्लू बनाने, पद और प्रतिष्ठा पाने के लिए लगे हुए हैं और दूसरी तरफ वे असली श्रद्धालु हैं जिन्हें न पैसा चाहिए, न प्रतिष्ठा, उन्हें तो बस भगवान चाहिएं, और वो भी न मिल पाएं तो भगवान की ... Read More »

दिव्य रहस्योद्घाटन पहली बार – ग्रहण काल के अनुभूत प्रयोग

ग्रहणकाल अपने आप में कई विलक्षणओं से भरा हुआ होता है। इसमें जो कुछ किया जाता है उसका सीधा संबंध संबंधित उपास्य देव या देवी से हो जाता है। इसमें साधक और उपास्य देव के बीच के सारे अवरोध समाप्त हो जाते हैं। इसलिए कम समय में हजार गुना फल की प्राप्ति होती है और सिद्धि मिलना आसान रहता है। ... Read More »

आशातीत सफलता चाहें तो ग्रहण काल में साधना का आश्रय पाएं

अधिकांश लोग ग्रहण की महिमा से अनभिज्ञ हैं और उन्हें यह तक पता नहीं है कि ग्रहण काल में क्या करना चाहिए और क्या नहीं। इन लोगों को ग्रहण के महत्व से कोई सरोकार नहीं है। वर्तमान मेंं हर तरफ कलियुगी माहौल है, मैले मन वालों और मैली विद्याओं का बोलबाला है और अधर्म, असत्य एवं कुटिलताओं भरी गलाकाट प्रतिस्पर्धा ... Read More »

दैवीय रहस्य  – यों धूल चटाएं चीन-पाक और आतंकियों को . . .

ग्रहण के समय जो कुछ किया जाता है, जो वाक्य बोला जाता है वह मंत्रसिद्धि के दायरे में आ जाता है। ग्रहण काल में जिस किसी अक्षर, वाक्य या शब्द का उच्चारण होता है उसका प्रभाव हजार गुना हो जाता है। हम चाहें तो चीन, पाक, आतंकियों और भारतमाता के तमाम दुश्मनों का खात्मा कर डालने की ताकत पा सकते ... Read More »

देवी साधना के रहस्य

देवी साधना रात्रिकाल में करना ज्यादा फलदायी होता है। देवी मन्दिरों में देवी के दर्शन से पूर्व भैरव और देवी के वाहन सिंह के दर्शन व पूजन कर लें। किसी भी देवी की साधना करें, इससे पूर्व भगवान भैरवनाथ का स्मरण जप कर लें। इसके बाद देवी साधना की शुरूआत करें। इससे भैरवनाथ हमारी साधना में जल्दी सफलता के लिए ... Read More »

न हो जाए पानी-पानी

बरसात का मौसम है चारों तरफ। बरस रहा है सब तरफ पानी ही पानी। क्या मैदानी, क्या पहाड़ी और क्या रेगिस्तानी धरा, अबकि बार पानी ने कहीं का नहीं छोड़ा है। कई बार तो लगता है कि जैसे पानी-पानी हो गई है धरा। बरसात की कहीं कमी है, और कहीं जरूरत से अधिक, और अधिक बारिश का कहर बरपा रही ... Read More »