अपनी मौलिकता बनाए रखें

जो हम हैं वह हैं ही, यह हमारी मौलिकता ही है कि हम ‘हम’ हैं। परमात्मा ने जैसा शरीर, मन और बुद्धि प्रदान की है उसी के अनुरूप साँचे में ढले हुए हैं। जैसे भी हम हैं वैसे हैं क्योंकि दुनिया में भगवान ने हर इंसान को अन्यतम मौलिक स्वरूप और गुणधर्म प्रदान किया है। फिर किसी के अच्छा कहने ... Read More »

जो भौंकेगा वही भोगेगा

आदमियों की जात में कई किस्में हैं। दुनिया में आदमी की जितनी प्रजातियाँ हैं उतनी किसी और की नहीं। कुछ आदमी अपनी आदमियत से जाने-पहचाने जाते हैं जबकि बहुतरे अपनी अजीबोगरीब हरकतों की वजह से। आप गौर करें तो पाएंगे की अपने आस-पास की आदमियों की कई-कई रोचक किस्में विद्यमान हैं। इनमें बहुसंख्य तो ऎसे हैं जिनका केवल जिस्म ही ... Read More »

अनुभव – अजब-ग़ज़ब हैं मूर्खो के अंधविश्वास

हम इन दिनों अजीब सी मनःस्थिति में जी रहे हैं। हम भगवान, अपने कर्म या किसी इंसान पर विश्वास भले न कर सकें, अंधविश्वासों पर हमारा अगाध विश्वास हमेशा बन जाता है और यह जीवन की उस बुराई में शामिल हो जाता है जो हमारी मृत्यु तक हमारे साथ बनी रहती है। कुछ लोगों में यह अंधविश्वास रहता है कि ... Read More »

पहले जरूरतों का ख्याल, बाद में मनोरंजन की बात

आदमी की बुनियादी सुख-सुविधाओं और क्षेत्र की आधारभूत जरूरतों के बारे में चिन्तन और कार्य सबसे पहले होना चाहिए। इसके बाद सारे दूसरे काम। जहाँ जरूरतों को प्राथमिकता दी जाती है वहाँ मनोरंजन भी अपने उद्देश्यों में सफल होता है और इसका प्रभाव जनमानस बहुत बाद तक अनुभव करता है। दूसरी स्थिति में जहाँ मनोरंजन को प्रधानता देकर आदमी के ... Read More »

मस्ती चाहें तो स्वाभिमान न छोड़ें

जीवन का सबसे बड़ा दर्शन है आनंद से जीवनयापन और मानवीय लक्ष्यों की पूर्णता। इसके लिए विभिन्न मार्ग हैं जिन पर चलकर आनंदमय जीवन जीया जा सकता है।  एक मार्ग परम्परा से चला आ रहा है और वह है ईश्वरीय विधान को सहजता से प्रसन्नतापूर्वक अपनाते हुए स्वाभिमान से जीना और व्यक्तित्व में उन गुणों का समावेश करना जिनके माध्यम ... Read More »

हर पल हो यादगार

every-moment-memorable जीवन का सुनहरा पक्ष है हर दिन नयापन और हर घटना यादगार। जीवन में आनंद की प्राप्ति और  अभिव्यक्ति दोनों के लिए यह जरूरी है कि अपना हर क्षण ताजगी भरा हो। इसके लिए नित नवीनता का समावेश जिन्दगी के प्रत्येक पहलू में होना जरूरी है। खासकर व्यक्ति की वैचारिक भावभूमि पर  सात्विक संकल्पों के अनुरूप शाश्वत बीजों का ... Read More »

किस काम के हैं ये बिकाऊ और भटकाऊ बुद्धिजीवी

समाज और देश को बुद्धिजीवियों पर भरोसा था। उनके नीर-क्षीर विवेक पर गर्व था। यह विश्वास था कि इनकी बुद्धि से सबका भला होगा, देश की उन्नति में योगदान दिखेगा, नवनिर्माण और विकास की धाराओं को सम्बल प्राप्त होगा और ऎसा कुछ हो सकेगा कि दुनिया में अपने मुल्क का नाम इनकी वजह से ऊँचा होगा। पर ऎसा हो नहीं ... Read More »

कर्म करो या करने दो, जियो और जीने दो

भारत भोग भूमि नहीं कर्म भूमि है। इसमें धर्म, अर्थ और मोक्ष के उपायों की अपेक्षा कर्मयोग को अधिक महत्व दिया गया है। संसार श्रेष्ठ कर्मों के लिए अपार संभावनाओं से भरा है। जब तक रुचि और क्षमताएं हैं तब तक कर्म करें, न कर पाएं तो दूसरों को कर्म करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए भरपूर मदद दें। आसक्ति ... Read More »

स्मृति शेष – वास्तु महर्षि चन्दूलाल सोमपुरा

हमेशा के लिए अस्त हो गया सुनहरे चन्द्र का एक युग श्री चन्दूलाल सोमपुरा यानि की वास्तुसिद्ध, वास्तुविज्ञानी और भूगर्भज्ञानी चन्दूभाई तलवाड़ा वाले। न केवल सोमपुरा समुदाय बल्कि पूरे वागड़ क्षेत्र का नाम गौरवान्वित करने वाले चन्दूभाई अब नहीं रहे। शुक्रवार रात उनका निधन हो गया। वह महान हस्ती उस पावन धाम को चली गई जहाँ से किसी का लौटना ... Read More »

सुरमा ने दिया सुनहरा भविष्य

लगातार व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा के दौर में आजीविका का जुगाड़ करना कितना मुश्किलों भरा है इसे समझना आसान है लेकिन बांसवाड़ा में एक शख़्स ऎसा है जिसने आँखों में सुरमा लगाने का हुनर अपनाया और इसे अपनी आजीविका का साधन बनाने के साथ ही लोकप्रियता भी हासिल की। हालांकि वर्तमान युग में सुरमे का प्रचलन करीब-करीब खत्म सा ही हो गया ... Read More »