निष्काम लोकमंगल अपनाएं

परिवेश में जो परिवर्तन लाने के लिए यह जरूरी है कि हमारे मन में इसके लिए स्वस्थ और सकारात्मक बीजों का अंकुरण हो। चित्त की भावभूमि शुद्ध और परोपकारी दृष्टि से युक्त होती है तभी लोक मंगल की भावनाओं का सृजन बिंब पाने लगता है। वैचारिक शुद्धता के साथ लक्ष्यों की पवित्रता भरी भावभूमि जितनी अधिक निर्मल, स्वच्छ और लोकमंगल ... Read More »

सिद्धावस्था पाने देह तृप्ति अनिवार्य

परमात्मा का दिया हुआ दुर्लभ मानव शरीर ही हमारा वह साधन-पात्र है जिसके माध्यम से हम पहले दिव्यत्व और उसके बाद दैवत्व की सिद्धि प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि अधिकांश लोगों को जन्म लेने के बाद संसार की माया इस कदर अपने पाशों में जकड़ लिया करती है कि उन्हें यह तक पता नहीं होता कि वे क्यों आए हैं, ... Read More »

लेखन में अपनाएँ मौलिकता और सच्चाई

बहुत कुछ छपता है जो उनका नहीं होता जिनके नाम से छपा है। लिखने वाले भी हैं और लिखवाने वाले भी बहुत हैं।  नगण्य होंगे जो भलमनसाहत में किसी के भी आग्रह को टाल नहीं पाते, किसी के लिए भी जो सामने वाले चाहते हैं, वैसा लिख डालते हैं।अधिकांश लिखने-लिखवाने वाले हैं जिनमें दोनों पक्षों में चतुर भी हैं, शातिर ... Read More »

व्यवहार में लाएं मानव धर्म

बातें तो हम सभी इंसानियत की करते हैं और इन्हीं पर भाषण-उपदेश झाड़ते रहते हैं। लेकिन असल में हम कितने फीसदी इंसानियत अपना रहे हैं, इस एक मात्र प्रश्न का जवाब हम तलाश लें तो हमारे जीवन की सारी सच्चाई सामने आ जाए। इंसान किसी भी जात-पात या धर्म-सम्प्रदाय का हो, चूंकि पहले वह मनुष्य है इसलिए उसके लिए मानव धर्म ... Read More »

सिद्धि पाना सहज, यदि शुचिता बनी रहे

साधना को लेकर अक्सर यह भ्रम रहता है कि इसके लिए बहुत सारा समय चाहिए। खूब सारे बंधनों और मर्यादाओं के पालन की जरूरत है। मनोकामना पूर्ति या सिद्धि पाने के लिए दीर्घकाल तक कठोर साधना करने की जरूरत पड़ती है। इसी सोच के मारे अधिकतर लोग साधना को दुश्कर मान कर इस दिशा में आगे बढ़ते ही नहीं, बहुत ... Read More »

बढ़ते जा रहे हैं बवाली और मवाली

लोगों की जीवनीशक्ति और कर्तव्य परायणता अब खत्म होती जा रही है। इस वजह से अब कोई काम या सेवा करना नहीं चाहता। जिन लोगों को भरपूर मेहनताना मिल रहा है वे भी काम नहीं करना चाहते, और दूसरे लोग भी परिश्रम से जी चुराते हैं। जिन्हें आवश्यकता है वे भी चाहते हैं कि पकी पकायी मिल जाए, और जिन्हें ... Read More »

परफेक्शन की प्रतीक्षा न करें

खूब लोगों की आदत होती है कि कोई सा काम हाथ में ले लेते हैं तब उसे बेहतर और चरम गुणवत्ता के स्तर पर लाने तक के लिए लम्बा समय गुजार देते हैं।इसका हश्र यह होता है कि वह समय निकल चुका होता है जिस वक्त इस काम की आवश्यकता होती है अथवा उपयोगिता। ऎसे ढेरों काम हमारे जीवन के ... Read More »

विरोधी अमर रहें, चुनौतियाँ बनी रहें

सृष्टि में जागरण हो तभी नवप्रभात का अहसास होता है अन्यथा बहुत सारे लोग हैं जिनके भाग्य में उषाकालीन सूर्य के दर्शन नसीब नहीं हैं। हर इंसान के जीवन में रोजाना नवप्रभात का सुनहरा सूरज उगता है, कुछ लोग इस शाश्वत सत्य को स्वीकार कर उसका लाभ लेते हैं और दूसरे सारे बिना अंधकार के उदासीनता की चादर ओढ़कर भोर के ... Read More »

दासत्व भाव अंगीकार कर चुके सभी मुर्दालों को समर्पित

औरों की देखादेखी करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। हम खुद कोई पहल करने को तैयार नहीं होते। हम सोचते हैं कोई तो पहल करे और हम उसके पीछे-पीछे हो लें। अच्छा लगे तब तक साथ चलते रहें, न लगे जो मुंह फेरकर भला-बुरा कहते हुए लौट जाएं और अलाप करते रहें। यह सब स्थितियां देश के उन सभी ... Read More »

इसे धर्म कहना बेमानी है

इसे धंधा कहा जाना अधिक उपयुक्त होगा। असल में वे लोग भगवान के शत्रु ही हैं जो भगवान को पैसा दान देते हैं, भगवान के प्रसाद को बेचते हैं। जिन मन्दिरों में वीआईपी दर्शन का रिवाज है, प्रसाद को पैसों में बेचा जाता है उन मन्दिरों से भगवान पलायन कर जाता है। इन मन्दिरों की मूर्तियां शो केस में रखे ... Read More »