आत्म आनन्द सर्वोपरि

हर इंसान कर्म करता है लेकिन उसके अनुपात में उसे आत्म आनन्द का अनुभव नहीं हो पाता, न ही कर्मयोग के आनंद का ओज और तेज उसके शरीर और चेहरे से प्रतिभासित नहीं हो पा रहा। कोई सा अच्छा कर्मयोग आकार पा लेता है तब हम फूल के कुप्पा हो जाते हैं, दो-चार घण्टों या दो-तीन दिनों का क्षणिक आनंद ... Read More »

न बाँधे नया कर्मबंधन

जीवन का हर क्षण किसी न किसी कर्म का प्रतीक है और हर कर्म बांधने वाला होता है यदि वह आसक्ति से भरा हो। अनासक्त और परमार्थ के उन कामों का कोई कर्मबंधन नहीं बनता जो निरपेक्ष भाव से जगत के कल्याण के लिए होते हैं। लेकिन जिस कर्म में आसक्ति का भाव होता है, अपेक्षा और किसी न किसी ... Read More »

गुरु अमर रहें, चेला-चेली जिन्दाबाद

Gurupoornima Special भगवान श्री वेदव्यास को समर्पित यह वार्षिक पर्व गुरु पूर्णिमा उन महामनाओं के श्रद्धापूर्वक स्मरण, आराधना और पूजा का अवसर है जो वास्तव में गुरुत्व को धारण करते हैं, गुरु होने के समस्त लक्षण जिनमें विद्यमान है और जो अपने शिष्यों को भवसागर से तार देने की सभी प्रकार की क्षमताओं से युक्त हैं। गुरु न तो कोई ... Read More »

अपनी बात

मेरा कोई भी लेखन मेरा नहीं है। जो अनायास विचार आते हैं वह भगवान के वहां से आते हैं और धड़ाधड़ लिपिबद्ध हो जाते हैं। और इन्हें ही आगे से आगे परोसगारी का दायित्व निभा रहा हूं। वैसे मेरा लेखन किसी भी मोड़ पर असत्य या धर्महीन लगे, तो जरूर बताएं।  सत्य कड़वा होता है और रहेगा।  इसका यह अर्थ ... Read More »

छातीकूटिए अमर रहें

आज अगर छाती कूटने वालों की गणना शुरू हो जाए तो सभी जगह बहुत से लोग मिल जाएंगे जो बिना किसी कारण के छाती पीटते रहने के सिवा कुछ नहीं करते। इनके छाती पीटने के पीछे के कारणों को तलाशा जाए तो इनकी जिन्दगी से जुड़ा एक भी कारण  ऎसा नहीं मिलेगा जिसकी वजह से इन्हें छाती कूटनी पड़े। दूसरों ... Read More »

सामाजिक यंत्रणा है परिवार सुख छीनना

इकाई, परिवार, समाज, क्षेत्र और देश आदि सभी का अपना सीधा संबंध है और रहेगा। भारतवर्ष में परिवार की अवधारणा है और यह परिवार की इकाई जितनी अधिक मजबूत होगी उतना ही समुदाय, समाज, क्षेत्र, गांव या शहर, प्रदेश और देश मजबूती प्राप्त करेगा। आज के परिप्रेक्ष्य में सर्वाधिक चिन्ता परिवार को लेकर है। परिवार की जो सनातन और शाश्वत ... Read More »

नैसर्गिक आकर्षण का विज्ञान

स्त्री और पुरुष में आकर्षण स्वाभाविक नैसर्गिक गुण है। पूर्ण पुरुष और पूर्ण स्त्री ही एक-दूसरे को आकर्षित करने और दुनिया को कुछ दे पाने की क्षमताएं रखते हैं। आधे-अधूरे या आंशिक स्त्री-पुरुष और नपुंसकों के भाग्य में कुढ़ना, महाविधुरों और महाविधवाओं की तरह रोना-धोना और आत्मीय प्रेम संबंधों तथा शाश्वत माधुर्य के खिलाफ जंग में डटे रहकर जिन्दगी बर्बाद ... Read More »

कड़वा सच

गौहत्यारों को प्रश्रय देने वाले हैं ये सब, इनकी हिम्मत ही नहीं है सच और कड़वा कहने की  … भारतभूमि पर सच्चे संत-महात्माओं, बाबाओं, ध्यानयोगियों की कोई कमी नहीं है लेकिन धन-वैभव, भोग-विलासिता, भक्तों की भारी भीड़ जुटाने और प्रतिष्ठा पाने के चक्कर में फंसे हुए ‘‘वैराग्यवान’’ लोगों ने धर्म क्षेत्र का कबाड़ा करके रख दिया है। इन संतों, कथावाचकों ... Read More »

भ्रम अमर रहे …

कुत्तों की तरह जहां-तहां का झूठन चाटने वाले, भिखारियों की तरह पैसा बटोरने वाले, छोटे-छोटे स्वार्थों के लिए सब कुछ खोल-खुलाकर पूरी बेशर्मी ओढ़कर पसर जाने वाले तथा औरों के इशारों पर भौंकने वाले लोग गजराज की तरह मुक्तामणि का अहसास कर खुद को सर्वोपरि और मदमस्त मान बैठे हैं। इसमें आखिर किसकी गलती है?  भ्रम में जीना, भ्रमित करना ... Read More »

देश है पहले, हम सब बाद में  ..

आतंकवाद क्या है, आतंकवादी कौन हैं, किस मजहब के हैं, इनके साथ क्या सुलूक किया जाना चाहिए ? इन सब बातों को कुछ समय के लिए दरकिनार कर थोड़ी गंभीरता से मंथन करें तो यह सार्वभौम स्वीकार्य निष्कर्ष निकल कर सामने आता है कि इन आतंकवादियों के माई-बाप, दादा-दादी और नाना-नानी हमारे ही बीच विद्यमान रहे हैं जिन्होंने अपनी कुर्सी ... Read More »