मैच के जीतने या हारने से साधकों का क्या भला होगा?

क्रिकेट हो या कोई सा मैच, अक्सर लोग पगलाये हुए रहते हैं। जीत-हार की चिन्ता और चिन्तन में दिन-रात लगे रहते हैं। कोई कहता है यह जीतेगा, कोई कहता है वह जीतेगा। साधकों को चाहिए कि वे भविष्यवाणियों और फालतू के औचित्यहीन प्रपंचों और प्रसंगों से दूर रहें। हम साधक लोग संध्या-गायत्री, जप-तप आदि के द्वारा दैवीय और दिव्य ऊर्जा ... Read More »

अतिथि सत्कार में न करें अपना-पराया

अतिथि के मामले में स्पष्ट रूप से इस बात को समझ लेने की जरूरत है कि जो कोई अतिथि हमारे दर पर आता है उसका आतिथ्य कर हम कोई अहसान नहीं कर रहे हैं बल्कि वह अतिथि हमें उपकृत करने के लिए आया है। अतिथि सेवा का बड़ा भारी पुण्य प्राप्त होता है और इसलिए हमारे घर पर जब भी ... Read More »

संतुलन और साम्य जरूरी है शरीर और प्रकृति के बीच

पिण्ड और ब्रह्माण्ड, शरीर और प्रकृति के बीच गहरा और सीधा रिश्ता है जो हर अंग-प्रत्यंग और परिवेशीय-खगोलीय एवं भौगोलिक घटनाओं को प्रभावित करता है। सीधी और सरल गणित यही है कि जिन तत्वों से जीव बना है उन्हीं तत्वों के विराट स्वरूप में प्रकृति भी अवस्थित है। इसलिए जो परिवर्तन प्रकृति में विराट स्वरूप में चरम व्यापकता के साथ ... Read More »

पावन सान्निध्य का सौभाग्य . . .

राजसमन्द के प्रभु श्रीद्वारिकाधीश मन्दिर में मंगलवार को श्री कृष्णागिरि शक्तिपीठ तमिलनाडु के पीठाधीश्वर, श्रीविद्या के विश्वविख्यात मर्मज्ञ और अगणित सिद्धियों के स्वामी विश्व शान्तिदूत राष्ट्र संत डॉ. वसन्त विजय जी महाराज सा. के पावन दर्शन और दिव्य-दैवीय ऊर्जावान सान्निध्य के साथ ही आशीर्वाद का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनके साथ संत श्री बृजतिलक जी महाराज भी थे। संतश्री ने आध्यात्मिक साहित्य ... Read More »

आत्म तत्व को जानें, भीतर की यात्रा करें

हम सभी लोग आत्म आनंद, शांति और सभी प्रकार की तृप्ति की तलाश में जिन्दगी भर कभी इधर और कभी उधर भटकते रहते हैं पर उसे प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं जिसकी तीव्र चाहत है। मूल कारण यह है कि जो हमारे भीतर है उसे हम बाहर तलाश रहे हैं और जो बाहर है उसे पाने के लिए बरसों ... Read More »

बदहवास कलियुग का नंगा नाच- अट्टहास

इंसान का अपना स्वाभिमान ही है जो उसके इंसान होने का सीधा सबूत पेश करता है। दुनिया में मनुष्य के अलावा कोई ऎसा प्राणी नहीं है जिसे स्वाभिमान का गर्व और गौरव प्राप्त हो। स्वाभिमान है तभी इंसान सच्चा है अन्यथा वह झूठा है और केवल इंसानी खोल हथियाये हुए है। असली इंसान वही है जो अपने स्वाभिमान को बचाये ... Read More »

जय राणा प्रताप की …

दुनिया आज प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप की जयन्ती मना रही है। प्रताप किसी वर्ग, जाति, सम्प्रदाय, भौगौलिक क्षेत्र, परिधियों आदि किसी भी प्रकार की संकीर्णताओं से बंधे नहीं थे। प्रताप वैश्विक महापुरुष रहे हैं और जिनसे पूरी दुनिया शौर्य, वीरता, साहस, देशभक्ति, त्याग, तपस्या और पराक्रम की प्रेरणा पाती हैं। प्रताप का वैश्विक व्यक्तित्व और दिव्य कर्मयोग ही है कि ... Read More »

कुछ कह रही है यह भीषण-भयावह गर्मी

कुछ कहना चाहती है बहुत कुछ कहना चाहती है यह गर्मी हम सभी से। उन लोगों से भी जो खुले में घूमने-फिरने और काम करने को विवश हैं और उनसे भी जो लोग एयरकण्डीशण्ड में रहने के आदी हैं, बिना एसी के जी नहीं सकते। उनसे भी बहुत कुछ कहना चाहती है जिनके पास न कूलर हैं, न फ्रीज और ... Read More »

इधर बचाओगे, उधर निकल जाएगा

पुरुषार्थ में रमे हुए लोगों की सफलता का मूल आधार यही है कि वे अवैध रूप से पैसे या संसाधन बचाने की कोई कोशिश नहीं करते बल्कि जहां जितना पैसा देना निर्धारित होता है उतना अपनी कमाई से निकाल कर दे ही डालते हैं। सामने वाला चाहे किसी संबंध या प्रभावों के आभामण्डल में आकर ना नुकर क्यों न कर, ... Read More »

उच्छिष्ट को त्यागें, देह को देवालय बनाएँ

मनुष्य की देह भगवान प्रदत्त अमूल्य और दुर्लभ वरदान है जो ईश्वरीय दिव्यता के साथ दैवत्व की प्राप्ति तक कराने का सहज, सुलभ और सरल माध्यम है लेकिन तब जबकि उसे हम दिव्य और दैवीय मानें और ताजिन्दगी पवित्र एवं शुद्ध बनाए रखें। मन की निर्मलता, मस्तिष्क की पावनता और शरीर की सर्वांग शुद्धता यदि हम बनाए रख सकें तो ... Read More »