प्रेम से स्वीकारें आभासी प्रतिकूलताएँ

अनुकूलताओं और प्रतिकूलताओं के आवागमन का नाम ही इंसानी जिन्दगी है और ऎसा कोई इंसान दुनिया में नहीं है जिसके जीवन में इन दोनों में से केवल और केवल एक का ही समावेश हो, अर्थात या तो जिन्दगी भर प्रतिकूलताएं ही हों या फिर अनुकूलताएं ही। मनुष्य के पूर्वजन्म के कर्म के अनुसार ही कर्मफल का भोग भोगना पड़ता है। ... Read More »

ये हैं असली निःशक्त

असली इंसान वही है जो अकेले अपने दम पर बहुत कुछ कर लेता है और उसे किसी की सहायता की जरूरत नहीं होती, न ही वह किसी की दया, कृपा और अनुकंपा पर जिन्दा होता है। असली इंसान बहुमुखी प्रतिभाओं और अपार क्षमताओं के धनी होते हैं और इसलिए कई सारे लोगों का काम अकेले ही कर डालने की क्षमता ... Read More »

बीमारू होते हैं चुप्पी धारी

अभिव्यक्ति इंसान के लिए श्वास-प्रश्वास की तरह है। जो हम सोचते हैं, कल्पनाएँ करते हैं और चिन्तन-मनन करते हैं उनके सारभूत तत्वों का बाहर निकलना जरूरी है। यह ठीक उसी तरह है जिस प्रकार समुद्र मंथन से जो कुछ निकलता है उसे किसी न किसी को स्वीकार करना ही होता है। ऎसा न किया जाए तो समुद्र मंथन का कोई ... Read More »

सच बोलें, सच सुनें, चुप्पी साधे न रहें

अभिव्यक्ति वही कर सकता है जो सच्चा इंसान हो। झूठे और जूठन चाटने वाले लोग न कभी मुखर हो सकते हैं और न ही कभी मौलिक अभिव्यक्ति कर सकते हैं। जो इंसान परायी उच्छिष्ट सामग्री और जूठन पर पलते हैं, औरों के भरोसे जिन्दगी जीते हैं, दूसरों को मालिक और भगवान का दर्जा देते हुए उनकी हर बात को आज्ञा ... Read More »

यों पाएं आशातीत सफलता

सांसारिक कर्म और फल प्रत्यक्ष होते हैं जबकि आध्यात्मिक कर्म का फल अप्रत्यक्ष होता है इसलिए सांसारिकों के जीवन की पहली प्राथमिकता सांसारिक कर्म, दैहिक आनन्द और भोग होती है। प्रत्येक प्राणी अपने समग्र जीवन में सम्पूर्ण सफलता और समृद्धि चाहता है और सारे कर्म इसीलिए करता है। और ऎसे में वह पुरुषार्थ चतुष्टय के दो आधारों काम और अर्थ ... Read More »

जो खुलेगा, वही खिलेगा

इंसान की जिन्दगी पुष्प की तरह है। उसकी गंध और सौन्दर्य तभी अनुभव में आ सकता है जब वह कली के रूप में पूर्ण यौवन भी प्राप्त करे और पूरी स्फूर्ति के साथ उपरान्त खिले। तभी उसकी सुन्दरता और सुगंध जमाने भर को प्रभावित कर सकती है। कोई सा पुष्प चाहे कितना दुर्लभ हो, वह यदि कली ही न बन ... Read More »

देश के दुश्मन हैं ये

मर्यादाओं, संस्कारों और परंपराओं का ह्रास होता है और अपने स्वार्थ और ऎषणाओं के अनुरूप जब परिभाषाएं गढ़ी जाती हैं तब प्रकृति और परमेश्वर भी अपना साथ छोड़ देते हैं और वह सब कुछ होने लगता है जो नहीं होना चाहिए। पेड़-पौधों, जड़-जंगम और दूसरे जीवों को छोड़कर इंसान अब अपनी सारी की सारी मर्यादाओं और मौलिक संस्कारों को भुलाकर ... Read More »

स्मृति शेष – कमला बा

जीवन और जगत के व्यवहारिक ज्ञान-अनुभवों की सदानीरा वागड़ अंचल में आधे आसमाँ की पुरानी पीढ़ी में बहुमुखी विलक्षणताओं की बदौलत अपनी अन्यतम पहचान रखने वाली महिलाओं में ख़़ास किरदार रही श्रीमती कमला बा के निधन की खबर शोक और दुःख का अनुभव कराने वाली रही। श्रीमती कमला बा जीवन के सभी पक्षों के ज्ञान और अनुभवों की वह दादी-नानी ... Read More »

बचें-बचाएँ सर्द हवाओं से

मौसम का मिजाज बहुत कुछ बदला हुआ है। कहीं खौफनाक मंजर है और कहीं सुप्तावस्था सुहानी लगने लगी है। हवाओं और बादलों की जुगलबन्दी का यह दौर अजब-ग़ज़ब ढाने लगा है। बदहवास चक्रवातों का दौर परवान पर है और शीतल से शीतल तीखी बयारों ने जीना दुश्वार कर दिया है। किसी ने यह कल्पना तक नहीं की थी सूरज पर ... Read More »