किसे बनाएं आदर्श, किसका करें अनुकरण

आज का सबसे बड़ा यक्षप्रश्न है – किसे बनाएँ अपना आदर्श। यह अपने आप में छोटा सा किन्तु सृष्टि के हर इंसान से संबंधित है। हर तरफ अभिभावकों, प्रेरकों, गुरुओं, बाबाओं, कथाकारों, सत्संगियों, उपदेशकों, नेतृत्वकर्ताओं और मार्गद्रष्टाओं की भारी बाढ़ आयी हुई है। और सभी एक ही बात को बार-बार दोहराते हुए कहते हैं आदर्शों पर चलें। कोई भी इंसान ... Read More »

बांसवाड़ा की बात – अम्बा बा होने का मतलब आतिथ्य सत्कार की प्रतिमूर्ति

बांसवाड़ा की रत्नगर्भा वसुन्धरा में असंख्य ऎसी हस्तियां पैदा हुई हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इनका माधुर्यपूर्ण और औदार्य से लक-दक जीवन-व्यवहार और आत्मीयता ऎसी कि कहीं और देखने तक न मिले। इन्हीं में एक थीं अम्बा बा।  कुलीन औदीच्य परिवार की अम्बा बा का मकान सिंगवाव से औदीच्यवाड़ा स्कूल के रास्ते है जिसमें प्रवेश का ... Read More »

मुखिया हैं या दुःखदायी

मुखिया उसे ही कहा जा सकता है जो कि पूरे कुटुम्ब के लिए वफादार, जिम्मेदार और हर गतिविधि के लिए उत्तरदायी हो। उसके लिए परिवार का मंगल और सभी सदस्यों की सर्वतोमुखी अभिवृद्धि का निष्काम भाव सर्वोपरि हो। हर सदस्य के प्रति निश्छल स्नेह बरसाने वाला मुखिया ही सभी छोटाें-बड़ों की श्रद्धा व आदर-सम्मान का पात्र होता है। मुखिया के ... Read More »

खुश हैं मदारी, मदमस्त हैं जमूरे

जीवन में न कोई अनुकूलताएं होती हैं, न प्रतिकूलताएं, न कुछ अच्छा, न बुरा। जो एक के लिए अच्छा हो वह दूसरे के लिए बुरा मान लिया जाता है, इसी प्रकार जो एक के लिए प्रतिकूल होता है वह दूसरे के लिए स्वाभाविक रूप से अनुकूल मान लिया जाता है। असल में मनुष्य का पूरा जीवन परिवर्तनों की भेंट चढ़ा ... Read More »

इतराए और बदहवास हैं वल्लरियाँ और कुकुरमुत्ते

कहा जाता है समय बड़ा बलवान होता है। यह वक्त ही है जो गधों को प्रतिष्ठित कर गुलाबजामुन, रसगुल्ले और मावाबाटियाँ खाने के लायक बना  देता है, कौओं के लिए मोती चुगने के तमाम मालखाने खोल देता है। बेचारे हाथी तृण-तृण को तलाशते हुए घूमने को विवश हो जाते हैं और मानसरोवर के हँसों को पलायन करना पड़ता है। जिनकी ... Read More »

कुत्तों को पछाड़ रहे हैं तलवे चाटने वाले

जो असली और सौ फीसदी खरा है उसका जीवन संघर्षों भरा होगा ही। इनके सामने पग-पग पर चुनौतियों के पहाड़ खड़े हुए नज़र आएंगे ही। कारण स्पष्ट है कि जो वास्तविक है वह इसीलिए खरा और परखा हुआ है क्योंकि वह पूर्णतया मौलिक है। फिर चाहे वह सोना हो या आदमी या फिर दुनिया का कोई सा तत्व। पंच तत्वों ... Read More »

कभी नगाड़े, कभी ढपोड़शंख

आजकल किसी भी कर्म का किसी भी प्रकार का आंशिक या पूर्ण सुकून कोई भी प्राप्त नहीं कर पा रहा है। कारण साफ है कि न कर्म में शुचिता रही है न वाणी में। कर्म और वाणी सब में झूठ और फरेब का घालमेल हो गया है। आदमी करता क्या है और कहता क्या? आदमियों की तमाम प्रकार की किस्मों ... Read More »

ज्योतिष चर्चा – कैसे रहेंगे आने वाले छह माह

22 दिसम्बर की प्रभात बताएगी – छह माह का भविष्य बुधवार शाम सायन में मकर का सूर्य आ जाने के बाद से ही उत्तरायण में रवि की गति आरंभ हो गई है। इस दृष्टि से 22 दिसम्बर 2016 गुरुवार की प्रभात मकर के सूर्य में होगी। स्वरोदय विज्ञान के अनुसार यदि जीवात्मा का जागरण गुरुवार सवेरे सूर्य यानि की दांये ... Read More »

समाजभक्षी हैं या तमाशबीन

समाज में बहुत सी बीमारियां और अभाव इतने अधिक गहरे तक जड़ें जमा लिया करते हैं कि इनके जख्म, सिहरन और सिसकियाँ दिखती नहीं लेकिन पूरे समुदाय और राष्ट्र के लिए परमाणु बम विस्फोट से भी अधिक विध्वंसक और महाघातक से भी अधिक गंभीर होती हैं और इनका प्रभाव पूरे समाज और देश ही नहीं बल्कि विश्व भर पर पड़ता ... Read More »

अनूठा प्रयोग – यों करें गुस्से को शान्त

जब भी किसी बात पर गुस्सा आए या और कोई हम पर गुस्सा होने की कोशिश करे, मन ही मन तीन बार निम्न मंत्र का जप कर लें। खुद का क्रोध भी खत्म हो जाएगा और सामने वाला भी गुस्सा करना भुल जाएगा। कई बार हमें यह आशंका रहती है कि जिससे मिलने जा रहे हैं वह गुस्सा तो नहीं ... Read More »