अतुलनीय है ईश्वर

भगवान सर्वोपरि सत्ता है जिसकी किसी से तुलना नहीं की जा सकती। वह शुचिता से लेकर धर्म, सत्य, न्याय, सदाचार और सभी आदर्शों में सर्वश्रेष्ठ है।प्रकृति और परमेश्वर की तुलना करना या उनके समकक्ष किसी को मानना, रखना और पूजना सर्वथा वर्जित है।  हमारे ऋषि-मुनियों ने ब्रह्माण्ड भर के अणु-परमाणु और परिवेश को खंगाल कर वैज्ञानिक रहस्यों का जो प्रकटीकरण ... Read More »

अक्षय तृतीया पर विशेष – लीमथान का प्राचीनतम परशुराम धाम

जहाँ आज भी होते हैं भगवान परशुराम के दर्शन दुनिया का प्राचीनतम परशुराम तीर्थ है लीमथान गांव में। राजस्थान के ठेठ दक्षिण में पर्वतीय अंचल बांसवाड़ा जिले के लीमथान गांव में स्थित इस मन्दिर में सदियों पुरानी परशुराम प्रतिमा है। श्वेत पाषाण से निर्मित सुन्दर परशुराम मूर्ति ओजस्वी है जिसके दर्शन से आत्मीय आनंद की अनुभूति होती है और सारे ... Read More »

ब्लेकमेलर हैं निजताखोर

निजता हर इंसान का वैयक्तिक स्वातंतर््य है और इसकी रक्षा करना उन सभी लोगों का फर्ज है जो कि उसके संपर्कित हैं, साथ रहते हैं, सहकर्मी, सहधर्मी हैं या जिनसे काम पड़ता रहता है। पर आजकल निजता के मामले में सब कुछ बुरी तरह गड़बड़ा गया है। इंसान की निजता पर चारों तरफ से गिद्ध दृष्टि रहने लगी है। हर ... Read More »

किसी काम के नहीं चिल्लाने-झल्लाने वाले

पूरी दुनिया के तमाम आदमियों को दो भागों में बांटा जा सकता है। एक वे हैं जो वाकई तल्लीनता से काम करते हैं और चुपचाप अपने कामों में लगे रहते हैं। इनसे किसी को कोई शिकायत नहीं होती। दूसरे वे हैं जो कोई काम-धाम नहीं करते मगर चिल्लाने और झल्लाने में ही माहिर हैं। ये लोग जिन बाड़ों और परिसराें ... Read More »

आहुति दें वरुण यज्ञ में

इन दिनों राजस्थान ऎसा अपूर्व इतिहास रच रहा है जिसकी चर्चा सब जगह है। खासकर गांवों में लोग भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बावजूद ऎसे जुटे हुए हैं जैसे कि उन्हीं के गाँव का अपना कोई उत्सव हो।आने वाले कल के सुनहरे स्वप्नों को आकार देने के लिए हर तरफ इतना सब कुछ किया जा रहा है कि ... Read More »

दुःखी करते हैं ये गूंगे-बहरे

जो वाकई दिव्यांग हैं वे हमारे लिए सम्माननीय भी हैं और सभी सुविधाओं के हकदार भी। इन दिव्यांगाें को सभी प्रकार से सहयोग करना हम सभी का पहला फर्ज है। पर इनके सिवा खूब सारे लोग हैं जो न गूंगे हैं, न बहरे, बल्कि जीते ऎसे हैं जैसे कि वास्तव में गूंगे और बहरे ही हों। इनके जीवन का हर ... Read More »

संतुलन रखें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में

पुरुषार्थ चतुष्टय मनुष्य के जीवन का मूलाधार है और इसी के अनुरूप पूरी जीवन यात्रा चलती है। पुराने जमाने में इंसान की औसत आयु सौ वर्ष मान कर उसी के अनुरूप जीवन को आयु के अनुरूप चार भागों में 25-25 वर्ष के लिए विभक्त किया गया था। इसी के अनुरूप आश्रमों का निर्धारण था। ब्रह्मचर्याश्रम, गृहस्थाश्रम, वानप्रस्थाश्रम और संन्यासाश्रम। इसी ... Read More »

सम्मान नहीं, दण्ड दें

  सामाजिक परिवर्तन और समग्र राष्ट्रीय उत्थान के लिए पुरस्कार, सम्मान और अभिनंदन अपनी जगह हैं और इनसे उन लोगों को प्रोत्साहन प्राप्त होता है जो कि सच्चे मन से अपने कर्म के प्रति वफादार होकर समर्पित कार्य करते हैं, समाज और देश के लिए जीने का माद्दा रखकर निष्काम कर्म करते हैं। इन लोगों को सम्मानित करने से सामाजिक ... Read More »

हमारी उपलब्धियाँ हैं शत्रुओं के कारण

जब धर्म, सत्य, न्याय, ईमानदारी, सदाचार और नीर-क्षीर विवेक भरी सकारात्मक शक्तियों और सिद्धान्तों पर स्वार्थ हावी हो जाएं, कलियुग का प्रभाव हर तरफ दृष्टिगोचर होने लगे तब यह मान लेना चाहिए कि उन लोगों के पर निकल आएं हैं जो  नरपिशाचों की तरह व्यवहार करते हैं। आसुरी विपदाओं और राक्षसी शक्तियों का संख्या बल, बाहुबल, धन बल और व्यभिचारी ... Read More »

याचना छोड़ें कर्म से खुश करें

सच्चा इंसान वही है जो अपने अच्छे कर्म से औरों को खुश करें। यहाँ तक कि भगवान से भी कोई काम हो, प्रार्थना जरूर करें पर साथ में उन अच्छे कर्मों को भी अपनाएं जो भगवान को पसंद हैं। हम लोग इंसान से भी बहुत कुछ चाहते हैं और जहाँ थक-हार जाते हैं या आशंका, भ्रमों, अन्यमनस्क अवस्थाओं से घिर ... Read More »