खाली हाथ ही जाना है

वो जमाना चला गया जब पहले तुम-पहले तुम जैसी बातें तरन्नुम में गायी भी जाती थीं और इसका लोक जीवन में अनुसरण भी होता था। …

सरलता अपनाएँ, सहजता लाएँ

बहुद्देशीय प्रतिस्पर्धा और तेज रफ्तार भरे इस युग में दूसरी सारी बातों से कहीं अधिक जरूरी है जिन्दगी को आसान बनाना। हम सभी का जीवन…

कब मरेंगे ये ?

हर तरफ लोग किसी न किसी से परेशान हैं। कोई किसी वाजिब कारण से परेशान है, कोई बिना वजह किसी न किसी से परेशान है।…

कछुआ छाप गधे

काम के न काज के, ढाई मन अनाज के कोई लाख कोशिश कर लें, कछुओं पर क्या असर पड़ने वाला है। छोटे दिमाग और मोटी…

सच बोलें, स्पष्ट कहें

कलिकाल के दुष्प्रभाव से घिरे वर्तमान समय में जात-जात के भयंकर और विचित्र असुरों का बोलबाला है।  पिछले सारे युगों के तमाम किस्मों के असुरों…

कबाड़ी ही हैं ये जुगाड़ी

किससे करें उम्मीद ? संरक्षक हो गए हैं भक्षक सामाजिक एवं परिवेशीय समस्याओं का मूल कारण स्वधर्म से पलायन या विमुख होना है। सृष्टि का…

स्थानीय उत्पाद ही हैं उपयोगी

प्रकृति असंख्य उत्पादों की जननी है। हर क्षेत्र का अपना विशिष्ट उत्पाद होता है। पंच तत्वों के सम्मिश्रण से निर्मित पदार्थों का मौलिक प्रभाव उन्हीं…

बर्बाद कर देगी हराम की दौलत

इंसान जीवन में आनंद की प्राप्ति के लिए सारे जतन करता है। खूब सारा पैसा जमा कर लेता है, काफी संख्या और मात्रा में जमीन-जायदाद…