उपेक्षा करें कमीनों की

  असुरों की सबसे बड़ी विजय है दैव वंश का प्रभावित और प्रतिक्रियावादी हो जाना। लोग हमें भटकाने – भड़काने की कोशिश करते रहते हैं और यही चाहते हैं कि हम अपने श्रेष्ठ कर्म को छोड़कर भटक जाएं। जो कुछ कर रहा है उसे करने दो। उस तरफ ध्यान देने का अर्थ है कि हम उसे गंभीरता से ले रहे ... Read More »

वास्तु चर्चा – बाथरूम रखें साफ-सुथरा, गंधमुक्त

जिस घर के बाथरूम से बदबू आती रहती हो, रसोईघर में झूठन पड़ी रहती हो, रात के समय झूठे बर्तन बिना माँजे पड़े रहते हें, वह घर वास्तु शास्त्र के हिसाब से कितना ही श्रेष्ठ क्यों न बनाया गया हो, वहाँ वास्तुदोष के साथ ही सारे ग्रह-नक्षत्र कुपित रहते हैं और कोई भी देवी-देवता उस घर की ओर झाँकते तक ... Read More »

कुलाचार अपनाएं

साधना, उपासना और भक्ति का मार्ग ऎसा नहीं है कि कोई भी किसी भी मार्ग को अपना ले और उस दिशा में आगे बढ़ जाए। भगवान के शरणागत हो जाने के सिवा जो भी उपासना मार्ग हैं उन सभी की अपनी मर्यादाएं, अनुशासन और निर्धारित प्रक्रियाएं हैं जिन पर चलकर ही उनमें सफलता पायी जा सकती है। अपनी कुल परंपराओं ... Read More »

श्रम दिवस पर विशेष – करें जयगान उनका जो पसीना बहाते हैं

श्रमिक वही है जो पसीना बहाता है अथवा जिसे पसीना बहाना आता है। जो पसीना नहीं बहा सकता वह असली इन्सान भी नहीं हो सकता। पसीना उसी का बह सकता है जो ईमानदारी और निष्ठा से पुरुषार्थ करता है। शरीर के अंग-प्रत्यंगों से काम लिए बिना पसीना बह नहीं सकता। यही कारण है कि लोग बोरों की तरह भरे-भरे होते ... Read More »

बहुरूपिये बाहुबलियों का पूरा संसार रहता है हमारे इर्द-गिर्द

रोजाना इतने सारे बाहुबलियों की भीड़ से रूबरू होते रहे हैं कि बाहुबली देखने की जरूरत ही नहीं पड़ती।  हमारे आस-पास के बाहुबलियों में इतनी अधिक ताकत है कि वे अपने बाहुओं का कमाल दिखाते हुए इंसानियत, सिद्धान्तों, आदर्शों, मूल्यों और सज्जनों तक की बलि चढ़ा देने से पीछे नहीं रहते।  मुद्राबली, कामबली, मूर्खताबली, पदबली, प्रतिष्ठाबली, मक्कारबली, धूर्तबली आदि का ... Read More »

मन, कर्म और वचन से पक्का, वही ज्योतिषी सच्चा

ज्योतिष यों तो हमेशा लोकप्रिय रहा है लेकिन इन दिनों इसके प्रति कुछ ज्यादा ही लगाव देखा जा रहा है। जब से टीवी पर ज्योतिष और चमत्कारों की चर्चाएं बढ़ी हैं तब से तो ज्योतिष का ग्लैमर ही कुछ विचित्र होता जा रहा है। लेकिन जिस अनुपात में ज्योतिष का वर्चस्व बढ़ा है उस अनुपात में ज्योतिषीय सच्चापन नहीं बढ़ ... Read More »

इधर – उधर की

कोई फर्क नहीं है – तटस्थता और नपुंसकता में। नपुसंकता नैसर्गिक या संयमहीनता से, तटस्थता ओढ़ी हुई बेहोशी। धर्म परम्परा – खुले साण्ड किसी को भी छेड़ सकते हैं, साण्डों को कोई नहीं। कश्मीर में सेना की हर कार्यवाही में सेकुलरों, शान्तिदूतों और पत्थरबाजों के हिमायतियों को आगे रखें। मेहनत करने में शर्म न आए तो घर-आँगन और खेत-खलिहान से ... Read More »

वैराग्य नहीं विरक्ति का आनंद पाएं

वैराग्य दुःख, शोक और अभावों से प्राप्त होता है और इसके साथ कई सारे मनुष्यों की स्मृतियां जुड़ी होती हैं जिनके बाद में कई-कई बार उभरने, अंकुरित होने और पल्लवित-प्रसरित होने की तमाम संभावनाएं बनी रहती हैं। यह प्रतिकूल घटनाओं-दुर्घटनाओं से भरे हुए अवचेतन से प्राप्त होता है इसलिए जब भी दुःखों या अभावों के अवसर आएंगे, अवचेतन के द्वार ... Read More »

दुनिया का यथार्थ

  बहुत सो का तकिया कलाम है – ठाकुरजी की कृपा है। और इनके आचरण दैत्यों से भी गए बीते हैं।   धर्म रहस्य – असली प्रसाद वही जो बिके नहीं, जो बिकता है वह केवल पदार्थ है।   श्रीकृष्ण अहर्निश महान-कर्मयोगी थे। उनके भक्त कभी कामचोर नहीं हो सकते।   सेवा-पूजा का ढोंग देखने लायक है लेकिन कामचोरी के ... Read More »

मेरी विनम्र राय

अपनी अपरिमित ऊर्जा और क्षमता हमारे सकारात्मक कल्याण के लिए है। निन्दा, विरोध और बाधाएं वहीं आती हैं जहां कार्यसिद्धि की संभावनाएं होती हैं। सबसे बढ़िया और बड़ा उपाय है उपेक्षा। अपने कर्म में कमी न लाएं, निरन्तर कर्म करते रहें। ये स्थिति दुनिया के हर महापुरुष और हर अभियान के साथ रही हैं। अपनी दैवीय ऊर्जा और दिव्यताओं का ... Read More »