चलते-फिरते मुर्दे

पता नहीं लोगों को क्या हो गया है, क्या होता जा रहा है। अधिकांश लोगों के चेहरे मुरझाए हुए मायूस हैं, शरीर या अत्यधिक मोटापे के कारण से भूसा भरे बोरा या बोरी जैसा होता जा रहा है अथवा इतना कृशकाय और मरियल कि हड्डियाँ दिखने लगी हैंं। असमय बुढ़ापा दिखने लगा है और आदमी बीमारियों का घर ही नज़र ... Read More »

राजधरम महा सुखदायी

राजधर्म केवल एक शब्द नहीं है बल्कि रामराज्य का वह सूत्र है जिसमेंं धर्मसंगत व्यवहार और लोक मंगल की अवधारणाओं के वटवृक्षीय बीज छिपे हुए हैं। धर्ममय राज का यह अर्थ नहीं कि किसी मत, सम्प्रदाय, पंथ, विचारधारा या वाद का प्रभाव हो। धर्म का सीधा सा अर्थ है उस तत्व विशेष का पूर्ण प्राकट्य और अनुभव, जिसके लिए वह ... Read More »

दुनिया के लोग अब रूबरू हो सकेंगे मावजी महाराज के दुर्लभ साहित्य से

प्राचीन माव साहित्य को अंगे्रजी में प्रकाशित करने की तैयारी शुरू संत मावजी महाराज के साहित्य को अब आंग्ल भाषा में रूपान्तरित कर प्रकाशित कराया जाएगा जिससे कि दुनिया भर के लोगों को संत मावजी की दिव्य वाणियों, उपदेशों और आध्यात्मिक अनुभवों का लाभ प्राप्त हो सके। इसके लिए प्रयास आरंभ कर दिए गए हैं और कई देशी-विदेशी विद्वान तथा ... Read More »

भीषण गर्मी पुकार रही, दिखाएं इंसानियत

भीषण गर्मी का दौर हर साल आता-जाता रहता है। हर बार आने वाली गर्मी हमारे जीवन के लिए यादगार अवसर प्रदान करने आती है लेकिन अपने ही दड़बोें में मौज-मस्ती की हमारी पुरानी आदत के मारे हम खुदगर्ज लोग अपने स्वार्थों में इतने अधिक मशगुल रहते हैं कि हमें पता ही नहीं रहता कि हमारे आस-पास के हालात क्या हैं? ... Read More »

अनूठी हैं मावजी की बावड़ियाँ

करीब तीन सौ साल पहले अवतरित लीलावतार संत श्री मावजी महाराज का पूरा जीवन चमत्कारों से परिपूर्ण रहा है। उनसे संबंधित अनगिनत रोचक परंपराओं की लम्बी श्रृंखला है और यही कारण है कि आज भी देश भर में उनके अनुयायियों की संख्या लाखों में है। संत मावजी महाराज द्वारा स्थापित सभी निष्कलंक धामों पर अवस्थित प्राचीन बावड़ियों का पानी एक ... Read More »

जागो, जगाओ, मस्त रहो

जो हो रहा है वो होना ही है, होने दो जो निश्चित किया है उसे कोई रोक नहीं सकता। सबसे बड़ी बात यह है कि आप किसी घटना-दुर्घटना को किस तरह से लेते हैं। दुःखी होकर दुःख प्रकट करोगे तो दुःख ही प्राप्त होगा। और प्रसन्न होकर स्वीकारोगे तो सब कुछ कल्याणकारी ही होगा। परिस्थितियां चाहे कितनी विकट हों, उन्हें ... Read More »

बच्चे पढ़ते नहीं, क्या करें ?

आजकल सबसे बड़ी और गंभीर समस्या सभी के सामने यही है कि उनके बच्चे पढ़ते नहीं। बच्चे उनके हों या अपने, सब तरफ यह समस्या विकराल और व्यापक बनकर उभर रही है। माता-पिता और बड़े-बुजुर्ग सारे इस बात को लेकर हैरान हैं कि आखिर बच्चों को ऎसी कौनसी महामारी खाए जा रही है कि वे पढ़ने की बजाय दूसरे-तीसरे कामों ... Read More »

हाहाकार

अब लगना-वगना पुरानी बातें हो चली हैं, अब तो महसूस होता है कि जैसे चारों ओर मचा हुआ है जबर्दस्त हाहाकार। न कोई शान्त है, न सन्तुष्ट। अपने आप से भी हम खुश नहीं हैं और अपनों से भी, परायों से तो खुशी पाने की कामना ही बेकार है। लगता है कि जैसे किसी का अपना कोई रहा ही नहीं, ... Read More »

महान रहस्य का उद्घाटन – नालायक पण्डित और बाबा ऎसे करते हैं टोटके

धन लोभ और प्रभावशाली वीआईपी से घनिष्टता बनाए रखने के चक्कर में इन विशिष्टजनों के कुकर्मों और पापों का भार उतारने के लिए कतिपय ढोंगी बाबा और धुतारे लोभी पण्डित ऎसे कई सारे टोटके करते हैं जिनके कारण से बेचारे नासमझ और भोले-भाले लोगों को दुःखी होना पड़ता है। ये वीआईपी कहे जाने वाले बड़े और महान लोगों की प्रतिष्ठा ... Read More »

भिखारी मुक्त हो भारत

यों तो अपने यहाँ भिखारियों की अनगिनत किस्में हैं जो यत्र-तत्र-सर्वत्र विद्यमान भी हैं और विचरणरत भी हैं लेकिन मूल रूप से दो तरह के भिखारी हैं। एक वे हैं जिनका स्वभाव, मन-मस्तिष्क, व्यवहार और तमाम प्रकार के आचरण भिखारी परंपरा को धन्य कर रहे हैं लेकिन ये भिखारी न तो अपने आपको भिखारी मानते हैं न भिखारी कहने देते ... Read More »