मंगलमय नव वर्ष हमारा

नव वर्ष का उल्लास यानि की पिण्ड से लेकर ब्रह्माण्ड तक में नवोन्मेषी ऊर्जा, अपरिमित ताजगी भरी हवाएं और प्रकृति तथा परमेश्वर की अनुकंपा से परिवेशीय सुकून की प्राप्ति जैसा सकारात्मक और बहुआयामी परिवर्तन तो चैत्र में ही संभव है जब तन-मन से लेकर प्रकृति वासन्ती मद का यौवन दर्शाती है।

यह ऎसा समय है कि जब अनगिनत दिव्य और दैवीय संयोग एक साथ जुड़े हुए हैं और वह भी आजकल से नहीं सदियों से। हमारे ऋषि-मुनियों ने ब्रह्माण्ड से लेकर पिण्ड तक में वासन्ती अहसास कराने वाले इस चैत्री नव वर्ष को युगों से मान्यता दी और यह सिद्ध किया कि नववर्ष वही है जब जड़-चेतन और हर प्रकार के जीव अपने भीतर उल्लास का अनुभव करें और प्रकृति पूरे यौवन के साथ हर तरफ सुकून का दरिया बहाती रहे।

इस दृष्टि से नव वर्ष के मायने चैत्री नव वर्ष ही है जब हमारी सनातन परंपरा के अनुरूप नव वर्ष का उल्लास एक-दो नहीं बल्कि ढेरों पहलुओं के साथ दृष्टिगोचर होता है।

यह नव वर्ष इस मायने में भी अनूठा है कि इसमें अंधकार का कोई कतरा नहीं है, जो कुछ है उसमें प्रकाश ही प्रकाश पसरा हुआ है। जीवन में आलोक भरने वाला यह नव वर्ष सूरज की पहली किरण से शुरू होता है और ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ का संदेश देता है।

रात अपने आप में निशाचरों के लिए विहित है और ऎसे में अंधकार के साये में नव वर्ष मनाना अपने आप में अंधेरी रातों के कड़वे सच और लक्ष्यहीन जीवन को अभिव्यक्त करता है।  हमारा हर काम भोर से शुरू होता है और चैत्र नव वर्ष भी सूरज की पहली किरण से उल्लास बिखेरने लगता है। अंधकार का कहीं कोई नामोनिशान नहीं।

हर तरफ उजाला ही उजाला। प्रकृति भी पूरी तरह मदमस्त होकर अठखेलियां करती है और हर जीव इस आनंद में सहभागी होता है। असल में उत्सव वही है जिसमें सभी की पूरी-पूरी भागीदारी हो, बहुपक्षीय आनंद का समावेश हो।

इस दृष्टि से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होने वाला नव वर्ष संकल्पों की ऊर्जा और इन्द्रधनुषी कर्मयोग के लिए नींव का काम करता है। सूर्य रश्मियों के साथ जो कुछ शुरू होता है उसमें आलोक की कोई कमी नहीं रहती।

 तय हमें करना है कि हम अंधेरों के साथ जीवन की शुरूआत करना चाहते हैं या कि उजालों के साथ। जो लोग अंधेरों के सहचर बनकर काम करते हैं वे जीवन भर अंधेरों ही अंधेरों भरे पाशों और मकड़जालों में जकड़े रहते हैं।

 अंधेरों का सीधा संबंध भोग-विलास प्रधान है जबकि उजालों के साथ जिनके कर्म और जीवन की शुरूआत होती है उनका जीवन उजालों से भरा होने लगता है। यह संभव है कि भौतिक विलासिता और परिग्रह तथा सांसारिक माया का प्रभाव अंधेरा पसन्द लोगों के साथ दिखता रहे लेकिन उजालों को पसंद करने वालों की बात ही कुछ और है।

इनके पास दिव्य जीवन और दैवीय कृपा है, जीवन का लक्ष्य है, कर्मप्रधान व्यक्तित्व है और आध्यात्मिक जीवन का आंनद इतना अधिक है कि हर क्षण जगत और जीव कल्याण की भावनाएं मूर्त रूप लेती रहती हैं। बशर्ते कि कोई दिखावा न हो तथा वाकई उजालों के अनुचर हों।

 परमेश्वर, प्रकृति और सारे के सारे जीवों के लिए यह समय वासन्ती उल्लास में नहाते हुए उल्लास अभिव्यक्ति का है। आईये हम भी इन सभी के साथ मिलकर पूरे उत्साह, जोश और उमंग से नववर्ष मनाएं।

सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ…।

जय-जय-जय नव वर्ष हमारा।

6 thoughts on “मंगलमय नव वर्ष हमारा

  1. सभी देशभक्त, ईमानदार एवं कर्मयोगी सज्जनों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ …

    1. नमस्कार मुक्ता, नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं …

    1. हार्दिक आभार
      भाई श्री कमल पालीवाल जी,
      नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं …

  2. नव संवत्सर एवं चैत्र नवरात्र कि हार्दिक शुभकामनाएं

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