पुराने कैलेण्डर रोकते हैं प्रवाह . . .

घर, आफिस, दुकानों और प्रतिष्ठानों में पुराने कैलेण्डर टंगे न रखें, इससे तरक्की में ब्रेक लग जाता है और पुरानी तिथियों के दिग्दर्शन की वजह से हम आगे नहीं बढ़ पाते हैं।

पिछले समय का कोई न कोई काम हमेशा बाकी रहता है तथा वर्तमान के कर्म का आनंद प्राप्त नहीं हो पाता। यदि किसी कैलेण्डर की तस्वीर अच्छी ही लग रही हो और उसे हटाने का मन नहीं कर रहा हो तो उसके साथ का कैलेण्डर हटा दें। तस्वीर भले ही रहने दें।

भगवान की फोटो व तस्वीर अपने टेबल के काँच के नीचे रखना भी अनिष्टकारक है। इनका स्थान उच्च और दर्शनीय है।

दुर्भाग्य का विषय यह भी है कि इन्हीं टेबलों पर हम चाय-काफी-पानी आदि के झूठे कप और ग्लास रखते हैं, इन्हीं टेबल्स पर खान-पान करते हैं, झाडू फिराते हैं। और भी न जाने क्या-क्या उपयोग होता है इन टेबल्स का।

भगवान के फोटो पर झूठन रखना कहाँ तक उचित है? धर्मभीरू लोग धर्म और भक्ति के नाम पर कई सारे दिखाऊ चोंचले और आडम्बर करते हैं किन्तु इन बारीकियों पर उनका दिमाग कभी नहीं जाता।

कई स्थानों पर बरसों पुराने कैलेण्डर लटके रहते हैं और कोई भी धर्मभीरू व्यक्ति इन्हें हटाने का साहस नहीं कर पाता। इस कारण से सालों साल ये पुराने कैलेण्डर यों ही पड़े रहते हैं चाहे कितने ही जीण-शीर्ण क्यों न हो जाएं।

आस्था अपनी जगह है किन्तु हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दैव कार्य में सदैव ताजातरीन माहौल और पदार्थ ज्यादा महत्वपूर्ण हैं और इनका वास्तु से भी सीधा संबंध है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *