सफलता की कहानी – – – माँ-बेटी की त्वरित सुनवाई – – दो घंटे में हो गया बरसों पुराना काम

आम ग्रामीणों के लिए राजस्व लोक अदालत अभियान न्याय आपके द्वार सरकार का वह यादगार तोहफा सिद्ध हो रहे हैं जिनमें बरसों पुराने काम हाथों-हाथ होने का सुकून पूरी उदारता के साथ लुटाया जा रहा है।

शिविर में आने वाले ग्रामीणों के कामों का त्वरित निस्तारण इस अभियान की लोकप्रियता को शिखर पर पहुंचा रहा है। इसी वजह से इन शिविरों के प्रति आम ग्रामीणों में ख़ासा आकर्षण बना हुआ है। ग्रामीणों के लिए यह शिविर समस्याओं के समाधान और प्रकरणों के निस्तारण का वह केन्द्र बने हुए हैं जो समस्याओं और अदालती चक्करों से मुक्ति का सुकून बाँट रहे हैं।

INDIRA Monika Dechra Kherwada     विशेषकर दूरदराज के इलाकों में लगने वाले इन शिविरों में ग्राम्यजन उत्साह से पहुँच कर अपने बरसों पुराने काम पूरे करवा रहे हैं और जिंदगी भर के लिए अमन-चैन के साथ जीवन निर्वाह का सुख पा रहे हैं।

उदयपुर जिले में आयोजित राजस्व लोक अदालत न्याय आपके द्वार शिविर मेवाड़वासियों के लिए वाकई त्वरित न्याय दिलाने वाले धाम सिद्ध हो रहे हैं। जिले के विभिन्न उपखण्ड क्षेत्रों में लगने वाले शिविरों में रोजाना कई ऎसे प्रकरणों का समाधान हो रहा है जिनके लिए बरसों से ग्राम्यजन प्रतीक्षारत थे।

इसी तरह का एक मामला सामना आया उदयपुर जिले के खेरवाड़ा उपखण्ड क्षेत्र के अंतर्गत करावाड़ा ग्राम पंचायत मुख्यालय पर अटल सेवा केन्द्र में लगे शिविर में जहाँ माँ-बेटी की तत्काल सुनवाई कर मात्र दो घंटे में सारी औपचारिकताएं पूर्ण कर बरसों से लंबित चला आ रहा काम पूरा कर दिया गया।

इस शिविर में आई डेचरा गांव की खातेदार कृषक श्रीमती इंदिरा पत्नी स्व. बाबूलाल डांगी ने शिविर प्रभारी उपखण्ड अधिकारी कृष्णदत्त पाण्डेय को प्रार्थना पत्र दिया।

इसमें इंदिरा ने बताया कि दूसरे सारे रिकॉर्ड में उसका नाम इंदिरा ही अंकित है किन्तु जमाबंदी में उसका नाम दली बेवा बाबूलाल लिखा हुआ है जबकि यह उसका बचपन के दिनों का पीहर में बोलता नाम था। पति की मृत्यु के बाद उसके पति की विरासत के नामांतरकरण में भी दली ही अंकित है। जबकि उसका वास्तविक नाम इंदिरा है व इसे जमाबंदी में दर्ज किया जाये।

शिविर प्रभारी कृष्णदत्त पाण्डेय ने इस प्रकरण की जाँच कराई व सारी औपचारिक प्रक्रिया पूर्ण कर प्रार्थिया इन्दिरा का सही नाम दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया।

इंदिरा का सही नाम दर्ज कराने के साथ ही शिविर ने इस परिवार को दोहरा सुकून भी दे डाला। इंदिरा की पुत्री मोनिका का नाम जमाबंदी में नाबालिग अंकित था लेकिन अब मोनिका बालिग हो चुकी है। इस देखते हुए उम्र संबंधी प्रमाणपत्र देखकर मोनिका को बालिग दर्ज कर दिया गया।

मात्र दो घंटे में सारी प्रक्रिया पूर्ण हो जाने को शिविर में मौजूद सभी लोगों ने सराहा। इस घटना के साक्षी इंदिरा के नाबालिग पुत्र गोपाल को भी खुशी हुई, जिसने अपनी माँ और बहन की आँखों में पहली बार इतनी अधिक खुशी की चमक देखी।

इंदिरा को  उपखण्ड अधिकारी कृष्णदत्त पाण्डेय व खेरवाड़ा पंचायत समिति के प्रधान अमृतलाल डामोर ने खातेदारी भूमि की शुद्ध की गई जमा बंदी की नकल प्रदान की। नाबालिग गोपाल ने भी सभी के साथ फोटो खिंचवाया और खुशी जाहिर की। इंदिरा व उसका परिवार सरकार को लाख-लाख धन्यवाद देता हुआ अपार खुशी के साथ घर लौटा।