अमावास्या के मेरे अनुभूत प्रयोग

रविवार, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को जब भी अमावास्या होती है, यह सूर्यग्रहण के बराबर प्रभावी होती है। इसलिए इसमें जप-तप, दान-पुण्य और सेवा-परोपकार के कार्य करने पर अक्षय फल प्राप्त होता है। और कुछ न हो सके तो अपने आस-पास की किसी बड़ी नदी या तीर्थ-सरोवर में स्नान ही कर लें।

आरोग्य, ग्रह शान्ति और सुख-समृद्धि के लिए अमावास्या को यह प्रयोग करें। इससे जीवन निर्वाह में आसानी रहती है और जीवन की कई समस्याओं और अभावों का अपने आप अन्त हो जाता है।

1- टोस्ट/बिस्किट/ब्रेड या रोटी में से कोई एक वस्तु अपनी आयु के वषोर्ं की गिनती के अनुरूप ले लें। इसे अपने ऊपर से एक साथ सात बार उतार कर कुत्तों को खिला दें। अच्छा हो शुरूआत काले कुत्ते से करें। इससे अब तक भुक्तमान आयु के सारे पिछले दोष, पाप और नज़र आदि से मुक्ति प्राप्त होने में मदद मिलती है।

2- कम से कम चार-पाँच किलो सत्तू/कसार या कीडीनगरा वहां बिखेर दें जहां चींटियों का बाहुल्य दिखता हो। इससे सारे ग्रह-नक्षत्र शान्त हो जाते हैं।

3- कबूतरों व अन्य पक्षियों को दाने डालें।

4- घर में खीर खाएं, खिलाएं। नित्य संध्या-गायत्री करने वाले शुद्ध विप्र और अतिथियों को जिमाएं।  इससे पहले कण्डे पर आहुतियां दें।

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