अति महत्वपूर्ण संदेश – बहुत कुछ कहना चाहती है 22 जून की प्रभात…

सूर्य 21 जून रात से सायन में कर्क का हो गया है। इसके साथ ही दक्षिणायन आरंभ हो चुका है।

इस दृष्टि से 22 जून की प्रभात में सूर्य भगवान उदित होंगे वह कर्क के सूर्य होंगे।

स्वर विज्ञान के शकुन शास्त्र के अनुसार 22 जून की प्रभात में जागरण के समय यदि हमारी नासिका के बाँये Left नथुने से साँस की आवाजाही हो अर्थात अपना बांया Left स्वर चलता हुआ रहे, तो आने वाले छह माह अर्थात पूरा दक्षिणायन काल स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और जीवन के हिसाब से अच्छा और निर्बाध रहेगा।

इसलिए 22 जून के जागरण काल में प्रयत्नपूर्वक अपना स्वर बांया Left रखें।  यदि बांया ही स्वर हो तो बिस्तर से उतरते समय पहले अपना बांया पांव जमीन पर रखें, इससे दाहिना Right पांव मिलाएं, फिर बांये पाँव को आगे रखकर बढ़ जाएं।

यदि किसी कारण से बांया Left स्वर नहीं चल रहा हो तो बिस्तर पर सोते-सोते ही दाहिनी करवट लेट लें, इससे अपने आप बांया स्वर शुरू हो जाएगा। इसके बाद ही बिस्तर त्यागें।

माना गया है कि 22 जून की प्रभात में बांया स्वर होना चाहिए। इससे आने वाले छह माह आनंद से गुजरते हैं।

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