अत्यन्त महत्वपूर्ण – बहुत खास दिन है 23 दिसम्बर

छह माहों का भविष्य जानें उत्तरायण की प्रभात से …

आम तौर पर उत्तरायण का आरंभ मकर संक्रान्ति से माना जाता है। लेकिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश अर्थात उत्तरायण की ओर गतिमान होने का क्रम 22 दिसम्बर 2019 को प्रातः लगभग 10 बजे आरंभ हो चुका है। यानि की मकर का सूर्य सायन में आ चुका है।

आम तौर पर उत्तरायण का आरंभ मकर संक्रान्ति से माना जाता है। लेकिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश अर्थात उत्तरायण की ओर गतिमान होने का क्रम 22 दिसम्बर 2019 को प्रातः लगभग 10 बजे आरंभ हो चुका है। यानि की मकर का सूर्य सायन में आ चुका है।

ज्योतिष के प्रमुख अंग स्वर विज्ञान की दृष्टि से जिस समय उत्तरायण आरंभ हो अर्थात सायन में मकर राशि का सूर्य हो, उस दिन प्रातःकालीन जागरण के समय जातक का स्वर सूर्य RIGHT होने से उत्तरायण के आने वाले छह माह शांति और सुख-समृद्धि के साथ गुजरते हैं और जीवन निर्वाह में किसी भी प्रकार की बाधा सामने नहीं आती।

सामान्य तौर पर अधिकांश समय मनुष्य की नाक के बाँये LEFT अथवा दाँये RIGHT नथुने से साँस निकलती रहती है। बायाँ स्वर (लेफ्ट) चन्द्रमा और दायाँ स्वर(राईट) सूर्य का प्रतीक होता है। बहुत कम बार चन्द सैकण्ड के लिए बीच का स्वर (सुषुम्ना) चलता है। अन्यथा या तो दांये छिद्र से हवा आएगी-निकलेगी अथवा बांये नाक से।

इस बार 23 दिसंबर, सोमवार को जब हम लोग नींद त्याग कर प्रभात में जागरण करेगे, उस समय उदय होने वाला सूर्य मकर का ही होगा। यह 23 दिसम्बर, सोमवार की प्रभात आने वाले छह माहों के लिए भविष्य का संकेत देने वाली होती है।

इस समय प्रभात काल में नींद से जगते ही यदि हमारे दाँये RIGHT नाक से साँस का आवागमन होगा तो यह माना जाना चाहिए कि स्वास्थ्य और विभिन्न दृष्टियों से आने वाले छह माह अच्छे गुजरेंगे।

ऎसा नहीं होने पर छह माह में न केवल स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहता है बल्कि सामान्य जीवन निर्वाह में भी बाधाएं आती रहती हैं और अनिष्ट की आशंका बनी रहती है।

इसलिए 23 दिसम्बर को जिस समय नींद त्याग कर हमारा जागरण हो तब प्रयत्नपूर्वक यह देखना चाहिए कि हमारी कौनसी साँस चल रही है। यदि उस समय हमारी नासिका के दाहिनी RIGHT ओर वाले नथुने में साँस चल रही हो तब अच्छा सुकून है कि आने वाले छह माह बहुत अच्छी तरह होंगे।

इस अवस्था में बिना कोई देरी किए आलस्य त्याग कर बिस्तर छोड़ दें।

यह ध्यान रखें कि 23 दिसम्बर की प्रभात में नींद त्यागकर जागरण के समय दाहिना RIGHT स्वर हो जो हमारे लिए बहुत जरूरी होता है, फिर भी हम आलस्य करते हुए बिस्तर नहीं त्यागेंगे तो हो सकता है कि हमारा स्वर दाहिने से बदलकर बायाँ हो जाए। इसलिए दाहिना स्वर होने की स्थिति में तत्काल बिस्तर त्यागें। यह भी प्रयास करें कि कम से कम घण्टा भर अपना स्वर दाहिना रखें।

अपने क्षेत्र में सूर्योदय का समय देख लें, उससे पहले जागरण कर लें और यह सुनिश्चित कर लें कि सूर्योदय से लेकर घण्टे भर तक दाहिना RIGHT स्वर बना रहे।

जो लोग सूर्योदय से ब्रह्ममुहूर्त में पूर्व नींद त्यागने वाले यानि की जल्दी उठने वाले होते हैं उन्हें भी चाहिए कि वे उठते समय दाहिने RIGHT स्वर में उठें और दाहिना RIGHT पाँव जमीन पर रखकर ही बिस्तर त्यागें।

लेकिन बिस्तर त्यागने से पूर्व अपनी दाँयी हथेली का चुम्बन लेकर पूरे शरीर पर फिरा दें और फिर जब बिस्तर से नीचे उतरें तब अपना दाहिना पाँव जमीन पर रखें और आगे बढ़ निकलें।

यदि 23 दिसम्बर 2019 की प्रभात में जागरण के समय हमारा स्वर दाहिना न हो और बायाँ चल रहा हो तो उस स्थिति में बिस्तर न छोड़ें बल्कि बिस्तर पर सोये-सोये ही बाँयी ओर करवट ले लें और दो-चार मिनट प्रतीक्षा करें।

ऎसा करने से अपना स्वर कुछ समय बाद अपने आप दाहिना RIGHT हो जाएगा। फिर भी न हो तो ईष्ट मंत्र का उच्चारण करें, भगवान सूर्य अथवा अग्नि का ध्यान करें, यह मानसिक भावना करें कि अग्नि में स्नान कर रहे हैं। अग्नि के बीज मंत्र  ‘ रं ’ का उच्चारण करते रहें और अपने संकल्प को मजबूत बनाते हुए यह ध्यान करें कि धीरे-धीरे स्वर दाहिना हो रहा है। इससे कुछ समय में अपने आप हमारा स्वर दाहिना (सूर्य स्वर) हो जाएगा। दाहिना RIGHT स्वर हो जाने पर ही बिस्तर त्यागें।

अपने आप स्वर दाहिना होने का अर्थ है आने वाले छह माह सहज स्वाभाविक रूप से श्रेष्ठ होंगे लेकिन स्वर को बाँये से दाहिना करने के लिए यदि प्रयत्न करना पड़े और इसके बाद ही स्वर दाहिना हो पाए, तो इसका अर्थ यह है कि आने वाले छह माह सामान्य गुजरेंगे और अनिष्टों पर अपने किसी प्रयासों से ही काबू पाया जा सकेगा। स्वास्थ्य भी नरम-गरम चलता रहेगा।

हालांकि स्वर विज्ञान की माहवार तालिका के अनुसार 23 दिसंबर 2019 को मार्गशीर्ष (अमान्त पद्धति अनुसार) कृष्ण पक्ष की द्वादशी है और इसलिए कृष्णपक्षीय द्वादशी और सोमवार का स्वर बांया निर्धारित है। लेकिन आने वाले छह माहों की दृष्टि से द्वादशी के निर्धारित वाम स्वर का उल्लंघन कर उत्तरायण यानि मकर के सूर्य का दिन शुरू होने से स्वर दाहिना होना जरूरी है।

इसलिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि 23 दिसम्बर की प्रभात के समय जागरण काल में जीवात्मा का दाँया RIGHT स्वर होने से आने वाले छह माह तरक्की और कामनासिद्धि के होते हैं। सोमवार भोर में जातक बिस्तर छोड़ते समय अपनी साँस को जानकर आने वाले छह माहों के भविष्य का संकेत अच्छी तरह प्राप्त कर सकता है।

प्रभातकालीन स्वर अनुकूल रखने के लिए जरूरी है कि रात को खाना जल्दी खाएं तथा हमेशा रात्रि में दाहिना स्वर करके ही शयन करें। इससे अगले दिन वही स्वर होगा, जो होना चाहिए।

इसे आजमायें और भारतीय ज्योतिष की प्राचीन परंपराओं के महत्व को जानें। शुभं भवतु….।

आम तौर पर उत्तरायण का आरंभ मकर संक्रान्ति से माना जाता है। लेकिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश अर्थात उत्तरायण की ओर गतिमान होने का क्रम 22 दिसम्बर 2019 को प्रातः लगभग 10 बजे आरंभ हो चुका है। यानि की मकर का सूर्य सायन में आ चुका है।

ज्योतिष के प्रमुख अंग स्वर विज्ञान की दृष्टि से जिस समय उत्तरायण आरंभ हो अर्थात सायन में मकर राशि का सूर्य हो,  उस दिन प्रातःकालीन जागरण के समय जातक का स्वर सूर्य होने से उत्तरायण के आने वाले छह माह शांति और सुख-समृद्धि के साथ गुजरते हैंं और जीवन निर्वाह में किसी भी प्रकार की बाधा सामने नहीं आती।

सामान्य तौर पर अधिकांश समय मनुष्य की नाक के बाँये अथवा दाँये नथुने से साँस निकलती रहती है। बायाँ स्वर (लेफ्ट) चन्द्रमा और दायाँ स्वर(राईट) सूर्य का प्रतीक होता है। बहुत कम बार चन्द सैकण्ड के लिए बीच का स्वर (सुषुम्ना) चलता है।  अन्यथा या तो दांये छिद्र से हवा आएगी-निकलेगी  अथवा बांये नाक से।

इस बार 23 दिसंबर, सोमवार को जब हम लोग नींद त्याग कर प्रभात में जागरण करेगे, उस समय उदय होने वाला सूर्य मकर का ही होगा। यह 23 दिसम्बर, सोमवार की प्रभात आने वाले छह माहों के लिए भविष्य का संकेत देने वाली होती है।

इस समय प्रभात काल में नींद से जगते ही यदि हमारे दाँये नाक से साँस का आवागमन होगा तो यह माना जाना चाहिए कि स्वास्थ्य और विभिन्न दृष्टियों से आने वाले छह माह अच्छे गुजरेंगे।

ऎसा नहीं होने पर छह माह में न केवल स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहता है बल्कि सामान्य जीवन निर्वाह में भी बाधाएं आती रहती हैं और अनिष्ट की आशंका बनी रहती है।

इसलिए 23 दिसम्बर को जिस समय नींद त्याग कर हमारा जागरण हो तब प्रयत्नपूर्वक यह देखना चाहिए कि हमारी कौनसी साँस चल रही है। यदि उस समय हमारी नासिका के दाहिनी ओर वाले नथुने में साँस चल रही हो तब अच्छा सुकून है कि आने वाले छह माह बहुत अच्छी तरह होंगे।

इस अवस्था में बिना कोई देरी किए आलस्य त्याग कर बिस्तर छोड़ दें।

यह ध्यान रखें कि 23 दिसम्बर की प्रभात में नींद त्यागकर जागरण के समय दाहिना स्वर हो जो हमारे लिए बहुत जरूरी होता है, फिर भी हम आलस्य करते हुए बिस्तर नहीं त्यागेंगे तो हो सकता है कि हमारा स्वर दाहिने से बदलकर बायाँ हो जाए। इसलिए दाहिना स्वर होने की स्थिति में तत्काल बिस्तर त्यागें। यह भी प्रयास करें कि कम से कम घण्टा भर अपना स्वर दाहिना रखें।

अपने क्षेत्र में सूर्योदय का समय देख लें, उससे पहले जागरण कर लें और यह सुनिश्चित कर लें कि सूर्योदय से लेकर घण्टे भर तक दाहिना स्वर बना रहे।

जो लोग सूर्योदय से ब्रह्ममुहुूर्त में पूर्व नींद त्यागने वाले यानि की जल्दी उठने वाले होते हैं उन्हें भी चाहिए कि वे उठते समय दाहिने स्वर में उठें और दाहिना पाँव जमीन पर रखकर ही बिस्तर त्यागें।

लेकिन बिस्तर त्यागने से पूर्व अपनी दाँयी हथेली का चुम्बन लेकर पूरे शरीर पर फिरा दें और फिर जब बिस्तर से नीचे उतरें तब अपना दाहिना पाँव जमीन पर रखें और आगे बढ़ निकलें।

यदि 23 दिसम्बर 2019 की प्रभात में जागरण के समय हमारा स्वर दाहिना न हो और बायाँ चल रहा हो तो उस स्थिति में बिस्तर न छोड़ें बल्कि बिस्तर पर सोये-सोये ही बाँयी ओर करवट ले लें और दो-चार मिनट प्रतीक्षा करें।

ऎसा करने से अपना स्वर कुछ समय बाद अपने आप दाहिना हो जाएगा। फिर भी न हो तो ईष्ट मंत्र का उच्चारण करें, भगवान सूर्य अथवा अग्नि का ध्यान करें, यह मानसिक भावना करें कि अग्नि में स्नान कर रहे हैं। अग्नि के बीज मंत्र  ‘ रं ’ का उच्चारण करते रहें और अपने संकल्प को मजबूत बनाते हुए यह ध्यान करें कि धीरे-धीरे स्वर दाहिना हो रहा है। इससे कुछ समय में अपने आप हमारा स्वर दाहिना (सूर्य स्वर) हो जाएगा। दाहिना स्वर हो जाने पर ही बिस्तर त्यागें।

अपने आप स्वर दाहिना होने का अर्थ है आने वाले छह माह सहज स्वाभाविक रूप से श्रेष्ठ होंगे लेकिन स्वर को बाँये से दाहिना करने के लिए यदि प्रयत्न करना पड़े और इसके बाद ही स्वर दाहिना हो पाए, तो इसका अर्थ यह है कि आने वाले छह माह सामान्य गुजरेंगे और अनिष्टों पर अपने किसी प्रयासों से ही काबू पाया जा सकेगा। स्वास्थ्य भी नरम-गरम चलता रहेगा।

हालांकि स्वर विज्ञान की माहवार तालिका के अनुसार 23 दिसंबर 2019 को मार्गशीर्ष (अमान्त पद्धति अनुसार) कृष्ण पक्ष की द्वादशी है और इसलिए कृष्णपक्षीय द्वादशी और सोमवार का स्वर बांया निर्धारित है। लेकिन आने वाले छह माहों की दृष्टि से द्वादशी के निर्धारित वाम स्वर का उल्लंघन कर उत्तरायण यानि मकर के सूर्य का दिन शुरू होने से स्वर दाहिना होना जरूरी है।

इसलिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि 23 दिसम्बर की प्रभात के समय जागरण काल में जीवात्मा का दाँया RIGHT स्वर होने से आने वाले छह माह तरक्की और कामनासिद्धि के होते हैं।  सोमवार भोर में जातक बिस्तर छोड़ते समय अपनी साँस को जानकर आने वाले छह माहों के भविष्य का संकेत अच्छी तरह प्राप्त कर सकता है।

प्रभातकालीन स्वर अनुकूल रखने के लिए जरूरी है कि रात को खाना जल्दी खाएं तथा हमेशा रात्रि में दाहिना स्वर करके ही शयन करें। इससे अगले दिन वही स्वर होगा, जो होना चाहिए।

इसे आजमायें और भारतीय ज्योतिष की प्राचीन परंपराओं के महत्व को जानें। शुभं भवतु….।

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