हिमालय की चोटियों और आसमान तक पहुँची वागड़ की महक

साहसी शैलपुत्री महक सनाढ्य ने महकाया आसमान

राजस्थान के छोटे से शहर बाँसवाड़ा की महक हिमालय की उत्तुंग पर्वतमालाओं तक जा पहुँची है। बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी बांसवाड़ा की होनहार बिटिया ने जोखिम भरे कामों को चुनौती के रूप में लिया और एक के बाद एक सफलताओं को अपनी मुट्ठी में कैद करती हुई ऎसे मुकाम पर जा पहुँची है जिस पर पूरा राजस्थान प्रदेश और देश गर्व करता है।

राजस्थान के छोटे से शहर बाँसवाड़ा की महक हिमालय की उत्तुंग पर्वतमालाओं तक जा पहुँची है। बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी बांसवाड़ा की होनहार बिटिया ने जोखिम भरे कामों को चुनौती के रूप में लिया और एक के बाद एक सफलताओं को अपनी मुट्ठी में कैद करती हुई ऎसे मुकाम पर जा पहुँची है जिस पर पूरा राजस्थान प्रदेश और देश गर्व करता है।

बाल मन से जगा शौर्य-पराक्रम का ज़ज़्बा

बाल्यकाल से ही होनहार महक के मन में  देशभक्ति और शौर्य-पराक्रम के बीजों का पल्लवन होने लगा। इसके लिए वह अपने नाना देवकीनंदन शर्मा को प्रेरक मानती है जो कि नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की सेना में सिपाही थे। ननिहाल में महक को वे वीरता की कहानियाँ सुनाया करते थे जिससे बाल मन पर गहरा प्रभाव पड़ा। अदम्य आत्मविश्वास की धनी और उच्चाकांक्षी किन्तु धीर-गंभीर स्वभाव वाली महक ने हर मोर्चे पर सफलता हासिल की।

आरंभिक शिक्षा-दीक्षा बाँसवाड़ा में

महक ने आरंभिक शिक्षा-दीक्षा बांसवाड़ा में पायी। यहीं उसने न्यु लुक स्कूल से बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की और इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उदयपुर का रुख किया। स्कूली और महाविद्यालयी विद्यार्थी के रूप में महक ने कई साँस्कृतिक-साहित्यिक स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और अपने मौलिक हुनर का परिचय कराते हुए हर कहीं सराहना पायी।

कई स्पर्धाओं में अव्वल रही

कक्षा सातवीं में पढ़ते हुए ही महक का अन्तर्राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता में चयन हो गया और इसमें उसने काँस्य पदक प्राप्त किया। संगीत में रुचि ने उन्हें गायन प्रतियोगिताओं में भी कई पुरस्कार दिलाए। इसके साथ ही खेलकूद, गायन-वादन, संचालन आदि विधाओं में दक्ष महक की गंध हर कहीं पसरती रही। राष्ट्रीय स्तर के आयोजन तक का संचालन महक कर चुकी है।

आर्मी गतिविधियों में जमायी धाक

उदयपुर के गुरु नानक कॉलेज में बी.कॉम. प्रथम वर्ष में अध्ययनरत रहते हुए ही सन् 2009 में राष्ट्रीय थल सेना केंप (आर्मी) में चयन हो गया। इसमें राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए फायरिंग, बाधा दौड़, शारीरिक दक्षता परीक्षा व मेप रीडिंग गतिविधियों में उम्दा प्रदर्शन की धाक जमाकर रजत पदक पाया। 

इस उपलब्धि पर उदयपुर में महक को स्वर्णपदक प्रदान किया गया तथा मेवाड़-वागड़ में कई संस्थाओं ने सम्मानित किया। पूर्व सैनिक सेवा परिषद उदयपुर ने विजय दिवस पर महक को सम्मानित किया। पर्वतारोहण में नाम ऊँचा करने वाली महक की इस उपलब्धि पर दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने स्वर्ण पदक प्रदान कर अभिनंदन किया।

कराटे में भी जबर्दस्त दखल रखने वाली महक इण्डियन आर्मी की कराटे प्रतिस्पर्धा में राष्ट्रीय पदक तथा राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट कैडेट सम्मान का गौरव प्राप्त कर चुकी हैं। बीस जनवरी 2011 को उदयपुर में पहली बार हुई हुुई राष्ट्रीय  बॉक्सिंग की प्रतिस्पर्धा में भी महक ने हिस्सा लिया।

बांसवाड़ा के कुशलबाग मैदान में गणतंत्र दिवस-2010 के जिलास्तरीय समारोह में जिला प्रशासन की ओर से महक सनाढ्य को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। महक की इन उपलब्धियों को कई पत्र-पत्रिकाओं ने प्रमुखता से स्थान दिया। सामाजिक पत्रिका परशुराम ब्रह्म ज्योति हिन्दी मासिक के अक्टूबर 2010 और त्रैमासिक पत्रिका सनाढ्य दर्पण ने सितम्बर 2010 के अंक में सनाढ्य रत्न का सम्मान देते हुए महक को बधाई दी और फोटो सहित परिचय दिया।

यों हुआ रूद्रगेरा फतह

राष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान में पांच पर्वतारोहियों में एनसीसी पांचवीं राज बटालियन की प्रतिनिधि के रूप में शामिल राजस्थान की एकमात्र कैडेट महक बताती है कि इस अभियान में हरिद्वार से हरसिल, गंगोत्री होते हुए गौमुख पहुंचे जहाँ से उनकी मंजिल करीब थी। बर्फीले पहाड़ों में ऋणात्मक तापमान में कील व रस्सियों के सहारे दो दिन की चढ़ाई के बाद सारी अविस्मरणीय बाधाओं को पार कर उत्तरांचल की सर्वोच्च बर्फीले पर्वत रूद्रगेरा की 22 हजार फीट ऊँची चोटी पर पहुँचे। वहाँ थोड़ी देर तक आसमान साफ रहा लेकिन बाद में बर्फबारी शुरू हो गई और तापमान शून्य से 20 डिग्री तक नीचे उतर गया।

महक और उनके दल ने रूद्रगेरा की चोटी पर तिरंगा फहरा कर खुशियाँ बाँटी। यह उसके जीवन का सबसे सुखद क्षण था। यह दल लेफ्टिनेंट कर्नल बीसी सती के नेतृत्व में वहाँ पहुँचा। रूद्रगेरा पर्वत शिखर फतह करने वाले दल को नई दिल्ली में पर्वतारोहण व क्षेत्रीय परिस्थितियों का पूरा प्रशिक्षण दिया गया। दो बार माउंट एवरेस्ट तक पहुंचने वाले सेना के मेजर केएस दामी का इस दल को पूरा मार्गदर्शन मिला।

अब दूर नहीं माउंट एवरेस्ट

उत्तरांचल के 20 हजार फीट ऊँचे रूद्रगेरा पर्वत पर कदम रखने वाली महक ने बता दिया है कि अब माउंट एवरेस्ट ज्यादा दूर नहीं। खुद महक का अगला लक्ष्य नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में दाखिला लेकर माउंट एवरेस्ट फतह करना है।

सफलता का श्रेय इन सभी को

अपनी लगातार उपलब्धियों के लिए महक कमाण्डिंग ऑफिसर मोहनसिंह शक्तावत के मार्गदर्शन के साथ ही माताश्री श्रीमती विमला, पिता श्री अमृतलाल सनाढ्य और बड़े भाई इंजीनियर सनातन के आशीर्वाद को खास प्रेरणादायी मानती हैं।

सेना के आँगन को महकाया

पर्वतारोहण और एनसीसी प्रवृत्तियों में माहिर होने के साथ ही महक ने अपने विलक्षण हुनर और जांबाजी का परिचय देते हुए सेना के आँगन को भी महकाया है।  दिल्ली में डेढ़ वर्ष पूर्व सम्पन्न 11 दिवसीय थल सैनिक शिविर में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए बेहतर प्रदर्शन किया। इन विशिष्ट उपलब्धियों के लिए उसे कई पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें रजत पदक, टीएससी बैच, एनसीसी फ्लेग तथा बेस्ट कैडेट बैच महत्वपूर्ण हैं।

थल सेना के इसी शिविर में कई खास मौकों पर उसने प्रभावशाली एंकरिंग कर संचालन विधा में भी महारथ होने की छाप छोड़ी। महक स्कूली जीवन से ही एंकरिंग में दक्ष रही है।

एनसीसी ने दिया हौसला

शैशव से ही सैन्य जीवन से प्रभावित महक ने इसी दिशा में आगे बढ़ने का मानस बनाया और एनसीसी में प्रवेश कर शौर्य-पराक्रम भरे इस कठिनतम सफर की शुरूआत कर दी।

अपने कैडेट जीवन में महक एनसीसी व सैन्य गतिविधियों से संबंधित कई प्रादेशिक/राष्ट्रीय स्तर के शिविरों व प्रशिक्षणों में हिस्सा लेकर ढेरों प्रशंसा पत्र एवं पुरस्कार पा चुकी है।

एनसीसी से जुड़ी तमाम विधाओं में विलक्षण प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी महक के इसी पराक्रमी व्यिंक्तत्व को देखते हुए ऊँचाइयों को छूने का मौका मिलता रहा।

शिखर पर रहने का लक्ष्य

भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के प्रतिष्ठित ओहदे पर पहुँच कर देश सेवा का ज़ज़्बा  रखने वाली महक इस बात से खुश है कि उसके अन्तर्मन के स्वप्न साकार हो रहे हैं। अपनी खास दोस्त नेहा पालरेचा को भी वह खूब मानती है। महक की ये उपलब्धियाँ आधे आसमाँ के सपनों को साकार करने के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। (आलेखों के पुराने संग्रह से – यह लेख 14 जुलाई 2011 को लिखा गया था। )

बाल मन से जगा शौर्य-पराक्रम का ज़ज़्बा

बाल्यकाल से ही होनहार महक के मन में  देशभक्ति और शौर्य-पराक्रम के बीजों का पल्लवन होने लगा। इसके लिए वह अपने नाना देवकीनंदन शर्मा को प्रेरक मानती है जो कि नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की सेना में सिपाही थे। ननिहाल में महक को वे वीरता की कहानियाँ सुनाया करते थे जिससे बाल मन पर गहरा प्रभाव पड़ा। अदम्य आत्मविश्वास की धनी और उच्चाकांक्षी किन्तु धीर-गंभीर स्वभाव वाली महक ने हर मोर्चे पर सफलता हासिल की।

आरंभिक शिक्षा-दीक्षा बाँसवाड़ा में

महक ने आरंभिक शिक्षा-दीक्षा बांसवाड़ा में पायी। यहीं उसने न्यु लुक स्कूल से बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की और इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उदयपुर का रुख किया। स्कूली और महाविद्यालयी विद्यार्थी के रूप में महक ने कई साँस्कृतिक-साहित्यिक स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और अपने मौलिक हुनर का परिचय कराते हुए हर कहीं सराहना पायी।

कई स्पर्धाओं में अव्वल रही

कक्षा सातवीं में पढ़ते हुए ही महक का अन्तर्राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता में चयन हो गया और इसमें उसने काँस्य पदक प्राप्त किया। संगीत में रुचि ने उन्हें गायन प्रतियोगिताओं में भी कई पुरस्कार दिलाए। इसके साथ ही खेलकूद, गायन-वादन, संचालन आदि विधाओं में दक्ष महक की गंध हर कहीं पसरती रही। राष्ट्रीय स्तर के आयोजन तक का संचालन महक कर चुकी है।

आर्मी गतिविधियों में जमायी धाक

उदयपुर के गुरु नानक कॉलेज में बी.कॉम. प्रथम वर्ष में अध्ययनरत रहते हुए ही सन् 2009 में राष्ट्रीय थल सेना केंप (आर्मी) में चयन हो गया। इसमें राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए फायरिंग, बाधा दौड़, शारीरिक दक्षता परीक्षा व मेप रीडिंग गतिविधियों में उम्दा प्रदर्शन की धाक जमाकर रजत पदक पाया। 

इस उपलब्धि पर उदयपुर में महक को स्वर्णपदक प्रदान किया गया तथा मेवाड़-वागड़ में कई संस्थाओं ने सम्मानित किया। पूर्व सैनिक सेवा परिषद उदयपुर ने विजय दिवस पर महक को सम्मानित किया। पर्वतारोहण में नाम ऊँचा करने वाली महक की इस उपलब्धि पर दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने स्वर्ण पदक प्रदान कर अभिनंदन किया।

कराटे में भी जबर्दस्त दखल रखने वाली महक इण्डियन आर्मी की कराटे प्रतिस्पर्धा में राष्ट्रीय पदक तथा राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट कैडेट सम्मान का गौरव प्राप्त कर चुकी हैं। बीस जनवरी 2011 को उदयपुर में पहली बार हुई हुुई राष्ट्रीय  बॉक्सिंग की प्रतिस्पर्धा में भी महक ने हिस्सा लिया।

बांसवाड़ा के कुशलबाग मैदान में गणतंत्र दिवस-2010 के जिलास्तरीय समारोह में जिला प्रशासन की ओर से महक सनाढ्य को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। महक की इन उपलब्धियों को कई पत्र-पत्रिकाओं ने प्रमुखता से स्थान दिया। सामाजिक पत्रिका परशुराम ब्रह्म ज्योति हिन्दी मासिक के अक्टूबर 2010 और त्रैमासिक पत्रिका सनाढ्य दर्पण ने सितम्बर 2010 के अंक में सनाढ्य रत्न का सम्मान देते हुए महक को बधाई दी और फोटो सहित परिचय दिया।

यों हुआ रूद्रगेरा फतह

राष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान में पांच पर्वतारोहियों में एनसीसी पांचवीं राज बटालियन की प्रतिनिधि के रूप में शामिल राजस्थान की एकमात्र कैडेट महक बताती है कि इस अभियान में हरिद्वार से हरसिल, गंगोत्री होते हुए गौमुख पहुंचे जहाँ से उनकी मंजिल करीब थी। बर्फीले पहाड़ों में ऋणात्मक तापमान मेें कील व रस्सियों के सहारे दो दिन की चढ़ाई के बाद सारी अविस्मरणीय बाधाओं को पार कर उत्तरांचल की सर्वोच्च बर्फीले पर्वत रूद्रगेरा की 22 हजार फीट ऊँची चोटी पर पहुँचे। वहाँ थोड़ी देर तक आसमान साफ रहा लेकिन बाद में बर्फबारी शुरू हो गई और तापमान शून्य से 20 डिग्री तक नीचे उतर गया।

महक और उनके दल ने रूद्रगेरा की चोटी पर तिरंगा फहरा कर खुशियाँ बाँटी। यह उसके जीवन का सबसे सुखद क्षण था। यह दल लेफ्टिनेंट कर्नल बीसी सती के नेतृत्व में वहाँ पहुँचा। रूद्रगेरा पर्वत शिखर फतह करने वाले दल को नई दिल्ली में पर्वतारोहण व क्षेत्रीय परिस्थितियों का पूरा प्रशिक्षण दिया गया। दो बार माउंट एवरेस्ट तक पहुंचने वाले सेना के मेजर केएस दामी का इस दल को पूरा मार्गदर्शन मिला।

अब दूर नहीं माउंट एवरेस्ट

उत्तरांचल के 20 हजार फीट ऊँचे रूद्रगेरा पर्वत पर कदम रखने वाली महक ने बता दिया है कि अब माउंट एवरेस्ट ज्यादा दूर नहीं। खुद महक का अगला लक्ष्य नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में दाखिला लेकर माउंट एवरेस्ट फतह करना है।

सफलता का श्रेय इन सभी को

अपनी लगातार उपलब्धियों के लिए महक कमाण्डिंग ऑफिसर मोहनसिंह शक्तावत के मार्गदर्शन के साथ ही माताश्री श्रीमती विमला, पिता श्री अमृतलाल सनाढ्य और बड़े भाई इंजीनियर सनातन के आशीर्वाद को खास प्रेरणादायी मानती हैं।

सेना के आँगन को महकाया

पर्वतारोहण और एनसीसी प्रवृत्तियों में माहिर होने के साथ ही महक ने अपने विलक्षण हुनर और जांबाजी का परिचय देते हुए सेना के आँगन को भी महकाया है।  दिल्ली में डेढ़ वर्ष पूर्व सम्पन्न 11 दिवसीय थल सैनिक शिविर में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए बेहतर प्रदर्शन किया। इन विशिष्ट उपलब्धियों के लिए उसे कई पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें रजत पदक, टीएससी बैच, एनसीसी फ्लेग तथा बेस्ट कैडेट बैच महत्वपूर्ण हैं।

थल सेना के इसी शिविर में कई खास मौकों पर उसने प्रभावशाली एंकरिंग कर संचालन विधा में भी महारथ होने की छाप छोड़ी। महक स्कूली जीवन से ही एंकरिंग में दक्ष रही है।

एनसीसी ने दिया हौसला

शैशव से ही सैन्य जीवन से प्रभावित महक ने इसी दिशा में आगे बढ़ने का मानस बनाया और एनसीसी में प्रवेश कर शौर्य-पराक्रम भरे इस कठिनतम सफर की शुरूआत कर दी।

अपने कैडेट जीवन में महक एनसीसी व सैन्य गतिविधियों से संबंधित कई प्रादेशिक/राष्ट्रीय स्तर के शिविरों व प्रशिक्षणों में हिस्सा लेकर ढेरों प्रशंसा पत्र एवं पुरस्कार पा चुकी है।

एनसीसी से जुड़ी तमाम विधाओं में विलक्षण प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी महक के इसी पराक्रमी व्यिंक्तत्व को देखते हुए ऊँचाइयों को छूने का मौका मिलता रहा।

शिखर पर रहने का लक्ष्य

भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के प्रतिष्ठित ओहदे पर पहुँच कर देश सेवा का ज़ज़्बा  रखने वाली महक इस बात से खुश है कि उसके अन्तर्मन के स्वप्न साकार हो रहे हैं। अपनी खास दोस्त नेहा पालरेचा को भी वह खूब मानती है। महक की ये उपलब्धियाँ आधे आसमाँ के सपनों को साकार करने के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। (आलेखों के पुराने संग्रह से – यह लेख 14 जुलाई 2011 को लिखा गया था। )

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *