बिना अपरिग्रह अपनाए व्यर्थ है जीवन

भगवान महावीर के निर्वाण दिवस दीपावली पर्व को जीवन भर के लिए यादगार बनाना चाहें तो आज ही यह संकल्प लें कि जीवन भर अपरिग्रह अपनाएंगे।

हमारे इसी एकमात्र संकल्प को आत्मसात कर हम जीवन और परिवेश की तमाम समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं।

दुनिया की तमाम समस्याओं, भ्रष्टाचार, तमाम तरह की अपेक्षाओं से परिपूर्ण जिन्दगी, रिश्वतखोरी और आसक्तिपूर्ण व्यवहार का सबसे प्रमुख दोषी कोई है तो वह है संचय करने की प्रवृत्ति।

हम उपयोगहीन वस्तुओं को भी कबाड़ियों की तरह जमा करने लगे हैं और सारा कबाड़ यहीं छोड़कर वैसे ही चले जाते हैं जैसे आये थे।

सभी इस शाश्वत सत्य और मृत्यु की अनिवार्यता को जानते-बूझते हुए भी परिग्रह के प्रति हर क्षण दासत्व भावों को ओढ़े हुए हैं, यही हमारी असफलताओं, अशांति, उद्विग्नताओं और असंतोष का सबसे बड़ा कारण है।

जो कुछ है वह जगत के लिए है, हम केवल द्रष्टा और ट्रस्टी मात्र है।  जय महावीर- जय दीवाली।