आत्मविश्वास खो देते हैं अपराधबोध से ग्रस्त लोग

हम लोग बड़ों और प्रभावशालियों से भय खाते हैं और इसी का फायदा उठाकर ये लोग स्वच्छन्द, उन्मुक्त और निरंकुश हो जाते हैं। इनके प्रभावी होने की वजह से हम लोग इनका न विरोध कर पाते हैं न प्रतिरोध।

और यही कारण है कि हमारी उदासीनता और मूकदर्शक भावों के कारण असामाजिक, भ्रष्ट और बेईमानों, लूट-खसोट करने वालों का ताण्डव हर तरफ देखने में आता है। इन लोगों को हम महान और प्रभावी मानने की भूल कर बैठते हैं।

जबकि हकीकत यह है कि जो जितना अधिक व्यभिचारी, कुटिल, षड़यंत्रकारी, भ्रष्ट और रिश्वतखोर होगा, उसका आत्मविश्वास उतना अधिक कमजोर रहेगा। कई सारे भ्रष्ट लोग केवल दिखावे के साण्ड या शेर होते हैं, उनमें आत्म विश्वास जीरो होता है।

इसलिए जो बुरे लोग हैं उनका प्रतिरोध करें, ये आत्मविश्वासहीन किन्तु दुस्साहसी और दिखावटी लोग हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। शुद्ध-बुद्ध लोगों के मुँह से निकले दो-चार घातक वाक्य भी इनके लिए वज्रपात की तरह असर करते हैं।

बुरा है उसे बुरा कहें, सार्वजनिक रूप से सबके सामने कहें, मुखर होकर कहें, इसमें न निन्दा का पाप लगता है, न बुराई का। बल्कि आज की सच्ची समाजसेवा यही है।

हमारी चुप्पी के कारण ही बुरे और समाजघाती लोग सर चढ़े हो जाते हैं। इनकी छिलाई करना, इन्हें अपनी औकात दिखाना और कान मरोड़ कर सत्य और यथार्थ का भान कराना ही सबसे बड़ी राष्ट्रसेवा है।

समाज और देश से नुगरों-नालायकों और चोर-उचक्कों की साफ-सफाई के बिना स्वच्छ भारत अभियान सफल नहीं माना जा सकता।