भ्रम अमर रहे …

कुत्तों की तरह जहां-तहां का झूठन चाटने वाले, भिखारियों की तरह पैसा बटोरने वाले, छोटे-छोटे स्वार्थों के लिए सब कुछ खोल-खुलाकर पूरी बेशर्मी ओढ़कर पसर जाने वाले तथा औरों के इशारों पर भौंकने वाले लोग गजराज की तरह मुक्तामणि का अहसास कर खुद को सर्वोपरि और मदमस्त मान बैठे हैं। इसमें आखिर किसकी गलती है?  भ्रम में जीना, भ्रमित करना और भ्रम फैलाते हुए आगे बढ़ जाने का शगल सदियों पुराना है। जब तक भ्रम और भ्रान्तियों का अस्तित्व बना हुआ है तब तक भ्रमित करने वाले लोगों की चवन्नियां और खोटे सिक्के यों ही चलते रहेंगे। भ्रम का अंधकार नालायकों, प्रतिभाहीनों और लुच्चे-टुच्चे एवं लफंगे लोगों का सबसे बड़ा हथियार है। हम सभी यही तो कर रहे हैं। भ्रमित करते रहो, आगे बढ़ते रहो।