दुनिया के लोग अब रूबरू हो सकेंगे मावजी महाराज के दुर्लभ साहित्य से

दुनिया के लोग अब रूबरू हो सकेंगे मावजी महाराज के दुर्लभ साहित्य से

प्राचीन माव साहित्य को अंगे्रजी में प्रकाशित करने की तैयारी शुरू

संत मावजी महाराज के साहित्य को अब आंग्ल भाषा में रूपान्तरित कर प्रकाशित कराया जाएगा जिससे कि दुनिया भर के लोगों को संत मावजी की दिव्य वाणियों, उपदेशों और आध्यात्मिक अनुभवों का लाभ प्राप्त हो सके। इसके लिए प्रयास आरंभ कर दिए गए हैं और कई देशी-विदेशी विद्वान तथा आंग्ल भाषाविदों ने इसमें रुचि दिखायी है। आंग्ल में रूपान्तरण के उपरान्त इन पर विषयवार ग्रंथों की श्रृंखला प्रकाशित की जाएगी।

यह जानकारी बेणेश्वर पीठाधीश्वर गोस्वामी अच्युतानंद महाराज ने हाल ही उदयपुर प्रवास के दौरान आयोजित माव साहित्य विषयक चर्चा गोष्ठी में दी। उन्होंने बेणेश्वर धाम विकास तथा माव साहित्य के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए यह बात कही तथा अब तक इस दिशा में हुए कामों की रूपरेखा से अवगत कराया।

       माव-बेणेश्वर साहित्य भेंट

इस अवसर पर बेणेश्वर पीठाधीश्वर गोस्वामी अ
च्युतानन्द महाराज ने जापानी भाषा की मासिक पत्रिका ‘एजी’ की मीडिया मैनेजर जैमिनी तथा टाईम्स ऑफ इण्डिया अहमदाबाद के वरिष्ठ सह संपादक श्री तुषार अनिल प्रभुने को बेणेश्वर तथा संत मावजी महाराज से संबंधित साहित्य भेंट किया और अहमदाबाद में संत मावजी के मन्दिर और इससे संबंधित रोचक परंपराओं के बारे में विस्तार से बताया। आध्यात्मिक चिन्तक श्री गोपाल काबरा ने मावजी की पीठाधीश्वर परंपरा के बारे में जानकारी देते हुए महंत अच्युतानंद महाराज के व्यक्तित्व के बारे में अवगत कराया।

आरंभ में बेणेश्वर पीठाधीश्वर का स्वागत लेखक डॉ. दीपक आचार्य ने किया और अठारहवीं सदी में अवतरित संत मावजी महाराज, उनके साहित्य, चित्रकारिता, उपदेशों, वाणियों, हस्तलिखिल ग्रंथों, परंपराओं, निष्कलंक सम्प्रदाय और रहस्यों से परिपूर्ण ज्ञान-विज्ञान व भविष्यवाणियों के बारे में संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। इस अवसर पर भक्तों की ओर से बेणेश्वर पीठाधीश्वर गोस्वामी अच्युतानंद महाराज का अभिनन्दन किया गया।