शान्ति से सुनें आत्मा की आवाज

शान्ति से सुनें आत्मा की आवाज

हर जीवात्मा के जीवन में आने वाले परिवर्तन के बारे में परमात्मा कोई न कोई संकेत देता ही है। माना जाता है कि ईश्वर की ओर से हरेक घटना-दुर्घटना, चाहे-अनचाहे काम और आकस्मिक परिवर्तन को लेकर तीन बार किसी न किसी रूप में पूर्वाभास कराता ही है। इसे ही आत्मा की आवाज कहते हैं।

जो लोग स्थिर चित्त, शांत, धीर-गंभीर और समत्व प्राप्त होते हैं वे हर तरह के संकेतों को शीघ्र ही भाँप लेते हैं और उसी के अनुरूप परिस्थितियों को अपने अनुकूल करने के लिए प्रयत्न करने में सफल हो जाते हैं। इस मामले में जो जितना अधिक निद्र्वन्द्व और शांत होता है वह संकेतों और उसके भावी प्रभावों के प्रति साफ-साफ और सटीक अनुमान लगा लेता है।

अधिकांश लोग हर समय अशांत, असन्तोषी, अतृप्त और उद्विग्न रहते हैं, निरन्तर किसी न किसी प्रतिस्पर्धा में भिड़े रहते हैं, कोई निन्यानवे के फेर में रहता है तो कोई चार सौ बीसी के चक्कर में पड़ा रहता है।

अधिसंख्य लोगों के पास इतना समय ही नहीं होता कि अपने बारे में सोचने और समझ बनाने की फुरसत निकाल सकें। ऎसे लोगों के लिए स्वार्थों, प्रतिस्पर्धाओं और ऎषणाओं के शोरगुल भरे माहौल में ईश्वरीय संकेतों को सुन पाना नितान्त असम्भव होता है और इन स्थितियों का खामियाजा ये लोग जिन्दगी भर भुगतते भी रहते हैं लेकिन मृत्यु होने तक भी यह समझ नहीं पाते कि आखिर माजरा क्या है।

इन लोगों के जीवन की असफलताओं, विषाद, तनावों और असंतोष का एक कारण यह भी है कि इन लोगों द्वारा आत्मा की आवाज को हमेशा अनसुना कर दिया जाता रहा होता है या फिर सुन कर भी उपेक्षा का बर्ताव किया जाता है।

एक बार जब हम भगवदीय दिव्य संकेतों की उपेक्षा करना आरंभ कर देते हैं और संसार के शोरगुल में खो जाते हैं तब हमारे जीवन की कई घटनाओं और दुर्घटनाओं के पूर्वाभास या संंकेत पकड़ पाने की ग्राह्यता क्षमता खोने लगती है और जीवन भर अनचाही परिस्थितियों का बनना और मनचाही स्थितियों की प्राप्ति नहीं होने का क्रम बना रहता है।

हम अपने भावी जीवन को लेकर किसी भी प्रकार की धारणा या पूर्वानुमान तक नहीं लगा पाते और इसका परिणाम यह होता है कि हमें न तो संभलने का कोई मौका मिल पाता है और न ही अनुकूल परिस्थितियों को अपने हक में भुनाने के अवसर। हमारी यह अवस्था पशुओं से भी गई बीती हो जाती है।

हर प्रकार के पशु-पक्षियों और जलचरों तक में प्रकृति के संकेतों को ग्रहण कर उसे समझने और अपने हित में तात्कालिक प्रतिक्रिया या बचाव करने का भाव पैदा हो जाता है और उसी के अनुरूप वे अपने में सम सामयिक परिवर्तन ले आया करते हैं।

इसी तरह भगवान जब हम पर मेहरबान होता है तब हमारे आस-पास रहने वालों, साथ काम करने वालों या  सम्पर्कितों के बारे में भी पूर्वाभास दे डालता है ताकि हम सतर्क हो जाएं।

इस मामले में दो तरह के इंसानों से हमारा पाला पड़ता है। एक किस्म में वे घाघ लोग आते हैं जो स्टन्टबाज, गुप्त षड़यंत्रकारी, लुच्चे-लफंगे, छुटभईये और घातक-मारक होते हैं। ये लोग हमेशा पीछे से वार करते हैं, शिकायतें करते हैं और पता भी नहीं चलता कि इन हरकतों के पीछे असली पापी या दुष्ट कौन लोग हैं।

ये लोग अमूमन चुप्पी साधे रहते हैं। हालांकि इनके चेहरों को देखकर अच्छी तरह पता चल भी जाता है कि इनके दिमाग और दिल में दुनिया भर के लोगों के बारे में बुरी-बुरी जानकारियों का कितना बड़ा कबाड़ भरा हुआ है।

ऎसे लोगों का चेहरा मलीन, खूंखार और हिंसक जानवरों जैसा दिखता है और इस किस्म के लोगों के आरंभिक गुणधर्म जासूसों, ब्लेकमेलरों और हत्याराेंं जैसे होते हैं। थोड़ा गंभीरता से प्रयास करें तो इन लोगों के चेहरों में कई सारे हिंसक जानवरों और धूर्त-मक्कार लोगों के चेहरों को अनुभव किया जा सकता है।

इस मामले में ये लोग ढेरों मुखौटे वाले होते हैं और इन्हें पहचानना सामान्य लोगों के बस में नहीं होता। ये लोग गाँठे बांधने वाले होते हैं इसलिए मुँह से कुछ नहीं कहते मगर षड़यंत्रों के मामले में सबसे अव्वल होते हैं।

ऎसे लोग जब प्रेम-माधुर्य और मुस्कान दर्शाते हैं तब भी लगता है कि ये कुटिलताओं का नग्न प्रदर्शन कर रहे हों। अनके ठीक विपरीत बहुत से लोग भारी पेटे के नहीं हुआ करते।

इन लोगों के लिए जीवन की मामूली घटनाएं भूकंप और ज्वालामुखियों या बादल फट जाने से कम नहीं हुआ करती। ऎसे लोग बड़बोले और भौन्दू होते हैं तथा किसी भी छोटी-मोटी बात के सामने आने पर फट से त्वरित प्रतिक्रिया व्यक्त करने के आदी होते हैं।

लेकिन यह भी सच है कि ऎसे लोग हमेशा नकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते रहते हैं, ईष्र्या-द्वेष और घृणा का व्यवहार दर्शाते हैं और अहंकार इतना कि अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते।

ऎसे लोग यदि किसी के बारे में कैसी भी टिप्पणी कर डालें तो समझ लेना चाहिए कि यह उनकी केवल पाँच से दस फीसदी अभिव्यक्ति ही है, जो बाहर आयी है। नब्बे से लेकर पिचानवे फीसदी जहर इनके दिल और दिमाग में ठूँसा होता है।

सज्जनों के लिए भगवान दिव्य शक्ति का साया हमेशा बनाए रखता है और इस कारण से ऎसे दुष्ट और प्रतिक्रियावादियों के मुँह से नकारात्मकता का संकेत निकलवा ही देता है ताकि सज्जन लोग आरंभिक चरण में ही दुष्टों और अधम लोगों के बारे में अपनी गहरी और पक्की समझ बना लें और इनसे प्रेमपूर्वक सायास दूरी बनाना आरंभ कर दें ताकि भविष्य में ऎसे लोगों द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले किसी भी प्रकार के खतरे से मुक्त रह सकें।

इसलिए जो लोग चुप्पी साधे रहकर षड़यंत्र और गुप्त वार करते हैं उनसे वे लोग अच्छे हैं जो कभी-कभार ज्यादा गुस्सा आ जाने पर भौंकना आरंभ करते हुए जो मन हैं उसकी बानगी देते हुए बक दिया करते हैं।

सज्जनों के हित में ही भगवान इन विद्वेषी और विघ्नसंतोषी लोगों के मुख खुलवा देता है ताकि सज्जनों को पूर्वाभास हो जाए, सबक मिल जाए और सायास तिलांजलि के अनुष्ठान आरंभ हो सकें।

इंसान को समझने की कोशिश करें और आत्मा की आवाज सुनें तो हमारे जीवन से कई सारे अनचाहे व्यक्ति, पदार्थ और समस्याएं अस्तित्वहीन हो सकती हैं।