व्यंग्य – आइये महान ज्योतिषी बने

ऎषणाओं की प्रतिमूर्ति बनते जा रहे मनुष्य में भविष्य जानने की लालसा जाने कितने युगों से रही है। ऎसे में ज्योतिष का प्रभाव दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। आजकल ज्योतिष के नाम पर जानकारों की बाढ़ आ गई है, जगह-जगह कुकुरमुत्तों की तरह उग आए हैं ज्योतिषी। इसके साथ ही हस्तरेखाविद् बनने का शौक भी हर कहीं परवान चढ़ रहा है।

इनकी अनेक किस्में हैं, कोई घर में ही ज्योतिष की दुकान चला कर अपना भविष्य संवारने में लगा है तो कोई ज्योतिष के नाम पर संस्था और ट्रैनिंग सेंटर खोलकर। इसके अलावा कई-कई जमातें फुटपाथों से लेकर राजपथों तक नव ग्रहों का मायाजाल फैलाने में जुटे हैं।

ज्योतिष में जहां सच्चाई है वहीं गप्पे और कयास, मनोविज्ञान आदि का भी उतना ही स्थान है। यह धंधा ऎसा है कि हींग लगे न फिटकरी। जहाँ चाहो वहां डेरा जमाते जाओ। भविष्य जानने और रातों-रात लखपति, करोड़पति बनने वाले भूखे लोगों की भीड़ भारत से ज्यादा और कहाँ होगी?

आप भी पढ़ लीजिये छोटी-मोटी ज्योतिष की पुस्तक और आजमा लीजिए अपना भाग्य। फिर यह धंधा अकेला ज्योतिष से ही जुड़ा नहीं है, इसमें जड़ी-बूटियां, नग-रत्न, रूद्राक्ष, ताबीज, कड़े, अंगूठी और जाने कितनी सामग्री बेचने के आप ‘ब्राण्ड एम्बेसेडर’ बन सकते हैं। फिर क्या है। सबसे सस्ता, सहज एवं सर्वसुलभ धंधा है ज्योतिष।

उठा लीजिए कुछ किताबें, पहन लीजिये रूद्राक्ष या और रत्नों की माला, रंग-बिरंगे ताबीज और डोरे बांध लीजिये हाथों में, अलग-अलग रंगों के तिलक भाल पर लगाइये और चल पड़िए इस सुनहरे सफर की ओर। फिर कौन रोक सकता है आपको सिद्ध हस्तरेखाविद् और ज्योतिषी बनने से।

यहां कुछ टिप्स दी जा रही है जिन्हें अपना कर आप भी चला सकते हैं अपना सिक्का और पा सकते हैं शौहरत।

–     जब भी कोई अपनी समस्या/जिज्ञासा/प्रश्न लेकर आपके पास आए, उसकी जन्म कुण्डली/हाथ देखकर चंद क्षणों तक आंखे बंद कर इस तरह बुदबुदाएं कि सामने वाले को लगे कि आप कोई सिद्धि प्राप्त ज्योतिषी हैं।

–     इसके बाद गंभीर होकर देखिए। कुण्डली हो तो एक बार उस पर आंखें गड़ाते हुए पूरी कुण्डली को देख लीजिये। हाथ को उलट-पलट कर देखिएं और चेहरे के गांभीर्य को बरकरार रखते हुए मुख मुद्राएं बदलते रहें।

जन्म कुण्डली के विभिन्न पक्षों/विविध हस्तरेखाओं को ध्यान से पढ़ते हुए आप यह निष्कर्ष क्रमशः धीरे-धीरे बोलते जाएं-

–     आपका जीवन संघषोर्ं से घिरा रहा है। समस्याएं किसी न किसी रूप में आपके सामने आती रहती हैं।

–     आपके मन में लोगों की भलाई का जज्बा है लेकिन आपको यश(जस) प्राप्त नहीं होता। आप जिसकी भलाई करते हैं वही काम निकल जाने के बाद आपकी बुराई करने लग जाते हैं।

–     आपके पास पैसा ठहरता नहीं है। जितना आता है  कहां चला जाता है पता ही नहीं चलता है, जरूरत के वक्त कहीं से भी पैसों का बन्दोबस्त हो ही जाता है।

–     स्वास्थ्य का पाया कमजोर तो नहीं दिखता मगर छोटी-मोटी शारीरिक तकलीफें जरूर आती रहती हैं।

–     सामने वाले के चेहरे को पढ़ते हुए कहें- आपके मन में सदैव चिंताए/आशंकाएं बनी रहती हैं मगर इनसे घबराइये नहीं। रोजाना 10-15 मिनट तक जिसे भी मानते हैं उपासना करें।

–     आप जल्दी-जल्दी सब कुछ पाने को उतावले रहते हैं पर ऎसा नहीं हो पाता। आप सोचते कुछ हैं और हो कुछ और जाता है। हर हमेशा थोड़ा सा धैर्य रखिएं।

–     आपके घर-परिवार वाले आपसे अन्दर ही अन्दर ईष्र्या भी करते हैं। उनके लिए आप बहुत कुछ करते हैं पर वे है कि आपको मानते ही नहीं।

–     हाथ को उलट-पलट कर पूर्ण तनाव व गांभीर्य के भाव लाकर कहिए, जीवन में दो-तीन मौके घात(मृत्यु सी स्थिति) के आए लेकिन भगवान की मेहरबानी या भाग्य ही कहिए कि आप बच गए। अब रोजाना किसी मंत्र जप करें, इससे अनिष्ट टल जाएगा।

–     पूरी मेहनत करने के बाद भी इसका पूरा फायदा नहीं मिलता। पितर दोष की शांति जरूरी है। पितरों के दोष की शांति जरूरी है। पितरों को प्रसन्न करना चाहिए ताकि बाधाएं दूर हो सके।

 

आप देखें कि सामने वाला भावुक है, हां-हां कर सर हिलाता है और अब आपके चक्कर में आ गया है तो आप उसे भयभीत करते हुए सुनहरे भविष्य के सब्जबाग दिखाते हुए इस तरह आशान्वित करें-

0     व्यवसाय में तरक्की होगी/नौकरी में प्रमोशन होगा। बढ़िया नौकरी के चांस आ रहे हैं।

0     मकान बनेगा खुद का। शादी के योग आ रहे हैं। थोड़ी मंगल की शांति करा लें।

0     कर्ज से आप परेशान है। फिक्र न करें। कुछ दिन बाद धन लाभ के योग बन रहे हैं।

0     आपके भीतर कई हुनर छिपे हुए हैं इस पर ध्यान दें और विकसित करें।

0     आपके दाम्पत्य जीवन में कहासुनी होती रहती है। हालांकि इसके बावजूद प्रेमभाव बना रहता

है।

0     बच्चे आपका कहा नहीं मानते।

0     घर की बनावट ऎसी है कि वास्तुदोष लगता है।

 

भविष्य जानने वाले व्यक्ति पर आपकी बातों का जब पुूरा प्रभाव दीखने लगे  और उसका चेहरा भयभीत लगे तब आप सान्त्वना के भाव लाते हुए उसे आशा भरा मार्ग दिखाएं। इसे निम्न टिप्स देः-

+     पीपल पर कच्चा दूध मिला पानी चढ़ाएं।  शिवलिंग पर कच्चा दूध मिला पानी चढ़ाएं।

+     पांच गुलाब के फूल शिवजी को चढ़ाएं। सूर्य भगवान को जल चढ़ाएं।

+     मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं।

+     चींटियों को सत्तू (गुड़-शक्कर, शुद्ध घी में भुना हुआ आटा) डालें।

+     हनुमान चालीसा/रामरक्षा स्तोत्र/गायत्री मंत्र/दुर्गापाठ आदि करें।

+     अमुक रत्न या अमुक पौधे की जड़ या जड़ी-बूटी गले या हाथ में बांधे।

+     अमुक भगवान की मूर्ति के समक्ष श्रीफल वधेरे।

+     चिडियाओं को साल/चावल व कबूतरों का दाना डालें।

+     गाय को घास/चारा, कुत्ते को रोटी डालें।

+     स्वास्थ्य रक्षा के लिए रात को अपने शरीर पर से सात बार रोटी उतार कर

चौराहे पर जाकर इसे चुपचाप फेंक आएं।  न जाते समय बोलें न लौटते समय।

+     गणेशजी पर दुर्वा/हनुमानजी पर तिल्ली का तेल चढ़ाएं। किसी डिब्बी में तेल भर के उसमें

अपने मुंह की छाया देख कर दान कर दें।

+     आधी रात को चुपचाप दीपक चौराहे पर रख आएं।

+     सूर्य की प्रसन्नता और ऎश्वर्य पाने के लिए रविवार को पान खाएं व खिलाएं।

+     सुबह, शाम या रात को कुत्तों को जलेबी, गुड़ या मीठी सेव खिलाएं।

+     शारीरिक व्याधि शमन के लिए अपने शरीर से गुड़ या मोतीचूर के लड्डू सात

बार उतार कर कुत्तों या गायों को खिला दें।

+     शनिवार को उड़द का दही बड़ा प्रसाद के रूप में शाम ढलने के बाद लें। कैर-सांगरी की सब्जी

लें शाम को 7 से 9 बजे के बीच।

+     राहु की शांति के लिए एक काले कपड़े में एक-दो किलो कोयले लें और उसमें तिल्ली का 50

ग्राम तेल चढ़ा कर इसे बुधवार शाम नदी-नाले में बहते पानी में बहा दें।

 

अपने पास आने वालों को इसी तरह का कोई प्रयोग बताते रहें। एक न एक दिन आपके चेलों को फायदा जरूर होगा। आपके लिए सिक्के का हर पहलू फायदा देने वाला है। उनको तो फायदा हो या न हो, आपकी जेब तो उसी समय भरने लगेगी।(गृहशोभा में प्रकाशित मेरा आलेख)

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